नगीना-पिनगवां की तरक्की में मील का पत्थर साबित होगी तिजारा सड़क
August 9th, 2020 | Post by :- | 94 Views

नूंह मेवात , ( लियाकत अली )  ।  दो दशक लंबे संघर्ष के बाद नगीना से तिजारा सड़क का निर्माण आरंभ होने से हरियाणा, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के श्रद्धालुओं तक प्राचीन जैन मंदिर की पहुंच आसानी हो जाएगी। सड़क निर्माण की अवधि अब 18 अप्रैल 2021 तक बढ़ा दी गई है। अभी तक 50 फीसदी पहाड़ की कटाई हो चुकी है। हरियाणा सरकार ने इस सड़क का बजट 12 करोड़ रुपये रखा था। इधर राजस्थान सरकार ने दूसरी बार राजस्थान के सरेटा से हरियाणा प्रदेश की सीमा तक अरावली पहाड़ काटने को अनुमति दे दी है। इस कामयाबी पर क्षेत्र वासियों ने नगीना तिजारा सड़क निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता राजूद्दीन जंग को बधाई दी है। फिलहाल गांव नोटकी से राजस्थान सीमा तक तेजी से पहाड़ काटने का कार्य चल रहा है। इस सड़क के बनने का सबसे ज्यादा फायदा नगीना और पिनगवां क्षेत्र के सवा सौ से अधिक गांव को होगा। यहां के बच्चे आसानी के साथ टपूकड़ा और भिवाड़ी में बने कारखानों में जाकर नौकरी कर सकेंगे। नोटकी गांव के सरपंच रिजवान महमूद बताते हैं कि गांव की सीमा से अरावली को काटकर सड़क बनाने का कार्य जोर-शोर से चल रहा है ये सड़क क्षेत्र के पिछड़ापन दूर करने में मील का पत्थर साबित होगी। गुमटबिहारी गांव के सरपंच रमजान ने बताया कि एक जेसीबी मशीन लगाई हुई थी जिससे निर्माण कार्य धीमा चल रहा है। कंपनी से मांग की तो उसने दो-तीन मशीनें बढ़ाई जाएं तथा ताजा निशानदेही से अधिक पत्थर नहीं तोड़े। करीब दो दशक से लगातार नगीना-तिजारा सड़क निर्माण की लड़ाई युद्ध स्तर पर लड़ने वाले सामाजिक संगठन आरटीआई मंच अध्यक्ष राजूद्दीन जंग के सहयोग से सड़क का कार्य शुरू हुआ था। सबसे ज्यादा भाजपा सरकार बधाई की पात्र है। अब सीधे रास्ते से 10 से 15 मिनट में तिजारा पहुंचा जा सकता है। इससे पहले फिरोजपुर झिरका होते हुए 40 किलोमीटर फेर घटकर 14 किलोमीटर रह जाएगा। जैन समाज के पूर्व प्रधान मुनीराम जैन बताते हैं जैन समुदाय का प्राचीन जैन मंदिर तिजारा में है। हजारों श्रद्धालु वहां हर साल जाते हैं उन्हें बड़ी कठिनाई होती है। सीधा मार्ग बनने से सुविधा होगी। इसके लिए जैन समुदाय राजूद्दीन का आभार व्यक्त करता है जिन्होंने दो दशक तक लगातार संघर्ष किया और निर्माण कार्य शुरु कराकर दम लिया। मेवात क्षेत्र के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता राजूद्दीन जंग ने खास  बातचीत में बताया कि दो दशक लंबा संघर्ष नगीना से तिजारा सड़क को बनाने में लगा। जिसमें हस्ताक्षर अभियान, ज्ञापन पत्र, धरने, प्रदर्शन और अनशन तक किये गये। प्रधानमंत्री को 2015 में 15 हजार से अधिक लोगों से हस्ताक्षर सौ मीटर लंबे कपड़े पर कराकर भेजे गए थे तब जाकर बजट स्वीकृत हुआ और 2018 में निर्माण कार्य शुरु हो पाया। सबसे बड़ा फायदा युवाओं को रोजगार और किसानों को जमीन के दाम बढ़ने से होगा तथा 20 हजार से अधिक रिश्तेदारियों से मिलने की अड़चन पहाड़ कटने के बाद खत्म होगी। खासकर मेवात आरटीआई मंच, गालिब मौजी खान फाउंडेशन का अभियान में महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

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