क्या हनुमान जी कर रहे हैं अपने क्षतिग्रस्त मंदिर के पुर्ननिर्माण की प्रतीक्षा..?
September 10th, 2019 | Post by :- | 490 Views
  • विकासवाद हावी, संकटमोचन हनुमान जी के मंदिर की जीर्णोद्धार हेतु कोई नही आया सामने
  • नगर सौंदर्यीकरण की भेंट चढ़ी मंदिर, हिंदुत्व के नाम पर राजनैतिक रोटी सेंकने वालो ने साध रखी है चुप्पी

छत्तीसगढ़ (कोंडागांव) । कोंडागांव नगरपालिका के शहर सौंदर्यीकरण योजना के तहत जगदलपुर – रायपुर रास्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 के किनारे स्थानीय वनोपज जांच नाका क्रमांक 02 जहां जगदलपुर, रायपुर व मर्दापाल की तरफ़ से सड़क के मिलने पर चौक का निर्माण होता है, नगर पालिका द्वारा बस्तर की तीरथगढ़ जलप्रपात की अनुकृति बनवाकर कैफेटेरिया जैसी सुविधा देने हेतु अनुमानित राशी 40 लाख रुपये का निविदा जारी किया गया है।

इस स्थान पर तीन तरफ से सड़कों के जुड़ने के कारण आये दिन सड़क दुर्घटनाओं को देख बहुत पहले ही हिंदू आस्था के चलते यहां एक किनारे में हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर दिया गया था।

जिस मंदिर के आड़ में कई लोगों ने सरकारी जमीन पर अवैध अधिग्रहण कर अपनी दुकानें चलाने लगे थे।

अब नगर पालिका प्रशासन द्वारा शहर सौंदर्यीकरण व अवैध कब्ज़ों को हटाने उक्त स्थान पर बुलडोज़र तो चलवा दिया गया है, परंतु इसके कारण क्षतिग्रस्त हुए भगवान संकटमोचन हनुमान जी के मंदिर पर किसी भी हिन्त्वदूवादी संगठन या किसी भी राजनैतिक दल के नेताओं द्वारा कोई प्रतिक्रिया नही आई है, जो हिंदुत्व के नाम पर इनके रोटी सेंकने की बात को साबित करने के लिए काफ़ी है।

हालांकि नगर पालिका प्रसाशन ने स्वयं को इस विवाद से दूर रखने के लिए वही पास में ही वन काष्टागार के समीप एक स्थान को सुरक्षित करके एक मंदिर का निर्माण करवाया है जिसमें इस हनुमान जी के प्रतिमा को विस्थापित करने की योजना बनाई गई है।

परंतु आपको बताना चाहेंगे कि जिस स्थान पर नया मंदिर का निर्माण स्वयं को विवाद से बचाने के लिए नगर पालिका द्वारा किया गया है वहां पर मंदिर हेतु पर्याप्त स्थान की कमी है।

यहां तक कि नगर पालिका ने जिस तरह से इस नए मंदिर का निर्माण किया है वह प्रथम दृष्टि में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी “स्वच्छ भारत योजना” के तहत बनाये जा रहे शौचालय के जैसे दिखाई देती है।

यहां तक कि इसमें अबतक दरवाज़ा तक नही लगाया गया है व हिंदू आस्था व वास्तुकला अनुसार मंदिर में गुंबद की ज़गह सीमेंट की छत लगा दिया गया है।

इसके प्रवेश द्वार इतना संकीर्ण बनाया गया हैकि इसमें एक व्यक्ति भी ठीक से प्रवेश करके पूजा नही कर पायेगा।

स्तिथी देखकर अब तो यही लग रहा हैकि शायद भगवान हनुमान  अपने क्षतिग्रस्त मंदिर के पुर्ननिर्माण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

सवाल यह उठना लाज़मी हैकि आखिर विकासवाद क्या इतना हावी हो चुका हैकि शहर के समाजसेवकों, हिंदूवादी संगठनों व राजनैतिक दलों के लोगों के द्वारा भगवान हनुमान जी के इस क्षतिग्रस्त मंदिर के लिए अबतक आवाज़ क्यों नही उठाया गया..?

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