पूरी खबर पढ़कर जाने के हिमाचल सरकार का कौन बिधायक हुआ है हिमाचल सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार से नाराज
July 30th, 2020 | Post by :- | 250 Views

गगन ललगोत्रा (व्यूरो कांगड़ा)

सन 1998 के हीरो नाराज,सरकार की तबीयत खराब…

जयराम की लीडरशिप पर अढाई साल बाद पहला हमला

वरिष्ठ विधायक धवाला,बिंदल और बरागटा विधायक दल की बैठक से गायब

जैसे ही आज गुरुवार सुबह को मन्त्रिमण्डल विस्तार हुआ तो शाम ढलते ही भाजपा के आकार पर ग्रहण लग गया। विधायक दल की बैठक से वरिष्ठ भाजपाइयों में शामिल नरेंद्र बरागटा,रमेश चंद धवाला और डॉ राजीव बिंदल गैर हाजिर हुए दीखे। यह तीनों वो नाम हैं जिनको खाली पड़े तीन मंत्री पदों से आस थी।

मजे की बात यह भी है कि इन तीनों विधायकों की सियासत में एंट्री और एडजस्टमेंट आज तक का सबसे रोचक भाजपाई इतिहास रहा है। बात सन 1998 की है जब ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र से रमेश चंद धवाला आजाद जीते थे और उस समय भाजपा को सरकार बनाने के लाले पड़े हुए थे।धवाला पर कांग्रेस ने पूर्णता कब्जा कर लिया था और भाजपा सत्ता से बाहर हो गई थी। ओर तीसरा बिकल्प रहे पण्डित सुखराम का साथ भी सहारा नहीं बन पा रहा था। तब रक्तरंजित लड़ाई के बाद शान्ता कुमार के कहने पर भाजपा के पाले में धवाला,कांग्रेस की हर ऑफर और मंत्रीपद को ठुकरा कर लौटे थे। तब भाजपा को धवाला की बदौलत सत्ता की दौलत मिली थी।

इसके बाद सन1998 में ही अगली एंट्री जब डॉ राजीव बिंदल की हुई तो सोलन में मेजर कृष्णा मोहिनी के चुनाव को भाजपा प्रत्याशी रहे महेंद्र नाथ सोफत ने चुनौती दी थी। कोर्ट ने चुनाव को अवैध ठहराया और किस्मत का खेल देखिए,सोफत साहब बाहर रह गए और उनकी जगह डॉ बिंदल प्रेम कुमार धुमल के आशीर्वाद से सरकार में पहुंच गए थे।

अब बात आती है नरेंद्र बरागटा की । सन 1998 में यह पहले ऐसे हीरो थे जिन्होंने पहली बार ही ढली सुरंग को पार कर अप्पर शिमला के जुब्बल-कोटखाई से भगवां लहराया था। अब यह तीनों चमत्कारी नेता जंग का हिस्सा तो दूर की बात सियासत में किस्सा बनाकर रह कर रह गए है । यह तीनों ही मन्त्रिमण्डल से बाहर तो हो ही गए है पर इसके साथ साथ आज भाजपा विधायक दल की बैठक से भी खुद ही बाहर हो गए।

ऐसे में अब राजनीति के सियासी माहिर इनकी गैरहाजिरी को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व पर सीधा हमला मान रहे हैं।इनका कहना है कि गैरहाजिर विधायकों में किसी मे इतना दम नहीं है कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को इस तरह से आंखे दिखा सकें। दरअसल,हालिया मन्त्रिमण्डल विस्तार में शामिल तीनो विधायकों पर जेपी नड्डा के वरदहस्त माना जा रहा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि नड्डा के खिलाफ कोई बोल नहीं सकता तो फिर यह सीधी चुनौती सीएम ठाकुर के लिए ही है।

खबरें यह भी हैं कि अब वरिष्ठ भाजपाइयों में यह भी रोष है कि न तो उनका पक्ष हाईकमान के आगे रखा गया और न ही उनका जिक्र तक किया गया। सबसे बड़ा बवाल सिर्फ दो बातों पर उठा हुआ है। पहली सबसे बड़ी वजह है जूनियर राजेन्द्र गर्ग की मन्त्रिमण्डल में एंट्री। दूसरी वजह है मंडी से खाली हुए मंत्रीपद को मंडी से न भरना। गर्ग की ताजपोशी को हर जिले में सीनियर लीडर्स के हक पर जबरन कब्जा माना जा रहा है। विस्तार के साथ ही विधायक दल की बैठक बड़े नेताओं की नाराजगी पर सवाल तो उठ ही गए हैं । बीते अढ़ाई सालों से ठसक के साथ राज कर रहे जयराम ठाकुर की लीडरशिप पर सवाल पहली बार खड़े हुए हैं। जेपी नड्डा के फैसले पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आजतक विधायकों की फौज को यह आस थी कि शायद मंत्री बनने की आस पूरी हो जाए। पर एक ही झटके में हाईकमान ने।यह लॉलीपाप भी जयराम ठाकुर की जेब से निकाल लिया। सियासत के बजुर्ग मीठे को तरसते रह गए और सियासी बाल्यकाल में गर्ग के हाथ मे यह चला गया। विवाद अभी और आगे बढ़ेगा। आज तो सिर्फ श्री गणेश ही हुआ है

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