स्वर्णरजत निर्मित बेशकीमती हिंडोले में तो विराजेंगे जन-जन के आराध्य
July 23rd, 2020 | Post by :- | 22 Views

वृन्दावन,मथुरा(राजकुमार गुप्ता) संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास जी के लड़ैते ठाकुर बांके बिहारी जी महाराज हरियाली तीज पर्व पर स्वर्णरजत निर्मित बेशकीमती हिंडोले में तो विराजेंगे लेकिन लाखों भक्त अपने आराध्य के इस अदभुत दृश्य को निहार नही पायेंगे।मन्दिर प्रबंधन द्वारा झूलनोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप प्रदान किया जा रहा है। जन जन के आराध्य ठाकुर बांके बिहारीलाल वर्ष में केवल एक बार श्रावण मास शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि पर स्वर्णरजत निर्मित अमूल्य हिंडोले पर विराजित होकर अपने भक्तों को कृतार्थ करते है। जिसकी एक झलक पाने के लिए देश भर के दूरदराज इलाको से लाखों की संख्या में भक्त वृन्दावन आते है।लेकिन इस वर्ष वैश्विक कोरोना महामारी ने भक्तो की इस अभिलाषा पर प्रतिबंध लगा दिया है। भक्तजन अपने आराध्य की इस अद्भुत छवि को निहार नही पायेंगे। जबकि ठाकुर जी तो अपने पूर्ण वैभव के साथ हिंडोले में विराजेंगे। ठाकुर जी यह बेशकीमती झूला अपने आप मे कई खासियत समेटे हुए है। देश की आजादी की लड़ाई के साथ ही इस झूले के निर्माण की प्रक्रिया भी चल रही थी। सन 1946 में ठाकुर जी के अनन्य भक्त सेठ हरगुलाल बेरीबाल परिवार ने बनारस के बेहतरीन कारीगर लल्लू को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। पूर्वी उत्तरप्रदेश में कनकपुर के जंगलों को लीज पर लेकर विशेष रूप से लकड़ी मंगवाई गयी। लकड़ी पर नक्काशी उकेरने के बाद एक हजार तोला सोना व दो हजार तोला चांदी के पतरो से झूले को अंतिम रूप दिया गया। देश की आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को ठाकुर जी प्रथम बार इस दिव्याकर्षक हिंडोले पर विराजित हुए। संयोगवश यह हरियाली तीज का दिन था। लगभग 70 वर्षो के इस इतिहास में इस हिंडोले का आकर्षण आज भी वैसा ही बना हुआ है। हिंडोले के ऊपरी हिस्से पर की पच्चीकारी अपने आप मे अद्भुत है। हिंडोले के दोनों और आदमकद सखियों की प्रतिमाएं बरबस ही भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है। हिंडोले पर विराजमान ठाकुर जी के श्रीविग्रह को सुगन्धित इत्रों की मालिश कर रेशम की कढ़ाई कर हरे रंग के वस्त्र धारण कराये जाते है। मन्दिर प्रबंधन द्वारा तैयारियों को अंतिम रूप प्रदान किया जा रहा है। प्रबन्धक मुनीश शर्मा ने बताया कि कोरोना की बंदिश के कारण इस वर्ष भक्तो को दर्शन सुलभ नही हो पायेंगे।

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