आत्मा की शुद्धि के लिए शरीर की तपस्या करना भी जरुरी है, वही उत्तम तप धर्म – मुनि विभंजन सागर
September 9th, 2019 | Post by :- | 122 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । मानसरोवर स्थित वरुण पथ दिगम्बर जैन मंदिर पर चल रहे मुनि विश्वास सागर एवं मुनि विभंजन सागर महाराज के मंगल चातुर्मास के दौरान दशलक्षण पर्व के सातवें दिन “उत्तम तप धर्म” श्रद्धा-भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस दौरान मूलनायक महावीर भगवान सहित जिनालय में विराजमान सभी तीर्थंकर भगवानों की जिन बिम्ब प्रतिमाओं के स्वर्ण कलशों से कलशाभिषेक एवं रजत कलशों से वृहद शांतिधारा का भव्य आयोजन हुआ। जिसमें श्रद्धालुओ की आस्था का जन सैलाब देखते ही बनता था। सोमवार को उत्तम तप धर्म के सौधर्म इंद्र और इंद्राणी बनने का सौभाग्य समिति सदस्य सुनील सुनीता गोधा को प्राप्त हुआ। सोमवार को “उत्तम तप धर्म” के दौरान मुनि विश्वास सागर महाराज एवं मुनि विभंजन सागर महाराज के मंगल निर्देशन में “उत्तम तप धर्म” पर पूजन किया। और श्रीजी के सम्मुख पूजन अर्घ चढ़ाये। इस दौरान प्रातः 8 बजे विभंजन सागर महाराज ने अपने उपदेश में “उत्तम तप धर्म” का महत्व बताते हुए कहा की (कर्म क्षयार्थे तपयते इति तप:) कर्मो के क्षय के लिए जो तपा जाय उसे तप कहते हैं। तप 12 प्रकार के होते है। 6 अन्तरंग और 6बाहा इच्छा का निरोध करना भी तप कहलाता है। कुवासनाओं के संस्कारो मन को परिभुक्त हो जाने का नाम भी तप होता है। अनशन,अवमोदर्य,व्रति परिसंख्यान,रस परित्याग,काय कलेश,विकित शच्यासन से 6 बाहय तप कहलाते है। और प्रायश्चित,विनय,वैयावृत्त,स्वाध्याय,व्यूतसर्ग और ध्यान ये 6 अन्तरंग तप कहलाते है। तप शारीरिक शक्ति अनुसार होता है। तप के प्रभाव में आने वाले कर्म भी रुकते है तथा पूर्व के संचित कर्म भी नष्ट होते है। मुक्ति का वरण करने के लिए तपना जरुरी है। जिस प्रकार दूध को गरम करने के लिए बर्तन का गरम होना बहुत जरुरी है उसी प्रकार आत्मा को शुद्ध करने के लिए शरीर की तपस्या भी बहुत जरुरी है। तभी आत्मा प्रकाशित और प्रवज्जलित होगी। क्योकि तप ध्यान में भी कारण है अतः तप के द्वारा कर्म क्षय करना चाहिए। अध्यक्ष एमपी जैन ने बताया की मंगलवार को “उत्तम त्याग धर्म” मनाया जायेगा। इस दौरान मंगलवार को श्रीजी के कलशाभिषेक,शांतिधारा के साथ विधानपूजन किया जायेगा। सायंकालीन 6.30 बजे से श्रीजी की मंगल आरती, गुरु भक्ति, सांस्कृतिक कार्यक्रम किये जायेंगे। सोमवार को दोपहर में दशलक्षण पर्व के अवसर पर दशलक्षण पर्व के उपवास करने वाली श्रीमती आशा गोधा की साधना के अवसर पर “विनतियों”(भजन -भक्ति संध्या) का आयोजन किया गया। मुनि विश्वास सागर और मुनि विभंजन सागर महाराज के सानिध्य में गिरीश जैन (मोंटी) और श्रीमती आशा गोधा दशलक्षण पर्व के दस निर्जल उपवास कर रहे है।

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