राजनैतिक द्वेष के कारण पिक एंड चूज नीति से की जा रही विरोधियों पर कार्रवाई : चित्रा सरवारा
July 11th, 2020 | Post by :- | 30 Views

अम्बाला छावनी ( गौरव शर्मा )    :      हरियाणा डैमोक्रेटिक फ्रंट की नेत्री चित्रा सरवारा ने अम्बाला छावनी में अंग्रेजों के जमाने की बी.डी फ्लोर मिल पर नगर परिषद की ओर से की गई सीलिंग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनैतिक द्वेष के कारण पिक एंड चूज नीति अपनाकर विरोधियों के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने कहा कि उपायुक्त अम्बाला ने 8 जुलाई को आदेश पारित किया कि 5 दिन में बनारसी दास मिल का कब्जा लिया जाए जबकि प्रशासन सैंकड़ों पुलिस कर्मियों की फ़ौज लेकर आदेश प्राप्त करते ही सीधे मौके पर पहुंच गया। यहां तक कि मौजूद पक्षो को आदेश की प्रतिलिपि तक नही दी गयी जो कि काफी तकरार के पश्चात सिर्फ दिखाई गई। प्रश्न यह उठना स्वभाविक है कि इतनी फ़ोर्स व सरकारी अमला क्या पहले से ही तैयार था ? उन्हें मालूम था कि ऐसा आदेश उपायुक्त अम्बाला देने वाले हैं ? स्पष्ट है कि निर्देश कहीं और के थे, उपायुक्त अम्बाला तो पूरी स्क्रिप्ट में एक कड़ी बने। प्रशासन जिन नियमों के उल्लंघन का हवाला देकर इस कार्रवाई को उचित ठहरा रहा है उन्हीं नियमों का उल्लंघन अम्बाला छावनी में अनेक स्थानों पर हो रखा है क्योंकि पूरा अम्बाला छावनी क्षेत्र ही लीज पर है और इसमे बी 3 टाइप की व्यवसायिक भूमि बहुत अधिक है। इन्हीं नियमों को देखा जाए तो छावनी के अनेक संस्थानों पर भी कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए। लेकिन ऐसा न हो पाना ही प्रदेश सरकार और नगर परिषद की ईमानदारी पर संदेह उत्पन्न कर रहा है।

चित्रा सरवारा ने कहा कि अंग्रेजों ने बी.डी फ्लोर मिल के मालिकाें को यह जमीन दी थी। लेकिन कालांतर में मिल में आग लग जाने के बाद इस परिसर में बरसों से अनेक परिवार रह रहे थे। इसी प्रकार कई अन्य सम्पत्तियां भी अम्बाला छावनी में मौजूद है जो अंग्रेजो के जमाने से लीज पर है और जिन पर सैंकड़ों परिवार रह रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना भी लाजमी है कि यदि सीलिंग की कार्रवाई के लिए बी.डी फ्लोर मिल पर होने से वहां रह रहे परिवार उजड़ रहे हैं तो निकट भविष्य में जब नगर परिषद सीलिंग की कार्रवाई करेगा तो हजारों परिवार सड़कों पर आ जाएंगे।
चित्रा सरवारा ने कहा कि अम्बाला छावनी में ओल्ड ग्रांट की अनगिनत जमीनें हैं जिन पर व्यवसायिक संस्थान और आवासीय कॉलोनियां बनी हुई है। नगर परिषद यदि बी.डी फ्लोर मिल पर की गई सीलिंग की कार्रवाई की वजह चेंज ऑफ लैंड यूज को बता रहा है तो ऐसी अनेक जमीनें हैं जो कि इसी दायरे में आती हैं।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार और नगर परिषद सीलिंग की कार्रवाई को किसी भी तरीके से न्यायोचित नही कहा जा सकता क्योंकि अपील व दलील का अधिकार प्राकृतिक न्याय के नियम के तहत सभी को प्राप्त है। यदि यह न्यायोचित भी मान लिया जाए तो वहां वर्षों से रहने वाले लोगों के लिए पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि लोगों को खुले आसमान के नीचे सड़कों पर रहने को मजबूर न होना पड़े।

चित्रा सरवारा ने कहा कि एक ओर तो बेकसूर लोगों को नगर परिषद की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है दूसरी ओर प्रदेश शासित भाजपा के अनेक पदाधिकारी अम्बाला छावनी में लोगों की कीमती संपत्तियों और सरकारी जमीनों पर धड़ल्ले से कब्जा कर रहे हैं और नगर परिषद के अधिकारी सत्ता के दबाव में मूक दर्शक बने हुए हैं। उन्होंने चेतावनीपूर्ण शब्दों में कहा कि सत्तारूढ़ नेताओं के दबाव में आकर जो अधिकारी लोगों पर जुल्म ज्यादतियां कर रहे हैं उनका खामियाजा उन्हें स्वयं ही सत्ता बदलते ही भुगतना पड़ेगा। हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट जनता के साथ किए गए किसी भी अन्याय की घोर निंदा करता है और जनता की आवाज के साथ आवाज बुलंद करते हुए हरदम जनता के साथ है।

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