मधाला पंचायत के केंबावाला गांव के लोग अपने ही क्षेत्र में आने से वंचित
July 10th, 2020 | Post by :- | 428 Views
हरियाणा की पचास मीटर जमीन  बनी बाधा
लाक डाऊन में लोग .बेवजह भुगत रहे सजा
बद्दी ! मधाला पंचायत के केंबावाला वार्ड के लोग इन दिनों अपने हिमाचल में आने के लिए बेबस है। इस वार्ड के साथ हरियाणा राज्य का कुछ हिस्सा आने से अपने ही राज्य में वाहन संचालकों को रोका जा रहा है। जिससे यहां के लोगों का कामकाज ठप हो गया है। पंचायत प्रतिनिधि इस मामले में एसपी व स्थानीय विधायक से भी मिले है लेकिन अभी तक इस समस्या का कोई हल नहीं निकला है। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर उनके वाहनों को रोका गया तो उन्हें मजबूर हो कर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
मधाला पंचायत के केंबावाला गांव में पांच सौ की आबादी है। यह गांव हरियाणा की सीमा से सटा हुआ। गांव के चारों ओर हरियाणा की जमीन पड़ती है। हिमाचल के बरोटीवाला में आने के लिए हरियाणा की पचास मीटर जमीन बीच में लगती है। इसी जमीन पर सड़क बनी हुई है। लाकडाउन के दौरान  पुलिस ने बरोटीवाला में नाका लगा रखा है और इस सड़क से आने वाले किसी भी वाहन को आने नहीं दिया जाता है।  इससे पहले लोग नदी से कच्चे रास्ते सेपार करके बरोटीवाला अपने वाहन पहुंचा रहे थे लेकिन अब नदी में पानी व दलदल होने से लोग अपने ही घर में कैद हो कर रह गए है।
पंचायत के उपप्रधान भाग चंद शर्मा ने बताया कि यहां लोगों ने अपने स्वरोजगार के लिए ट्रक, टेंपू, 407 व थ्री व्हीलर चला रखे है लेकिन पुलिस नाका होने से वर्तमान में अपने घर में ही शौ पीस  बने हुए है। ग्रामीण इस संबंध में एसपी बद्दी से मिले थे। ग्रामीणों ने एसपी को सुझाव दिया था कि जो वाहन संचालक अपने आधार कार्ड दिखाएगा उसे आने की अनुमति दी जाए। लेकिन एसपी की ओर से अभीतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पंचायत प्रतिनिधियों ने दून के विधायक परमजीत सिंह प मी को भी इस समस्या से अवगत कराया गया लेकिन उन्होंने भी खाली आश्वासन दिया। जिससे लोगों को रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि अपने ही क्षेत्र में आने के लिए जब कोई दूसरा रास्ता नहीं है तो लोगों को हरियाणा के  रास्ते से परमिशन दी जाए। पंचायत ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित करके डीसी सोलन को भी भेजा है। जिसमें हिमाचल के इस गांव के लोगों को हिमाचल में आने की अनुमति दी जाए। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर उनके साथ न्याय नहीं किया तो उन्हें मजबूर हो कर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

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