बद्दी का पशु अस्पताल भवन जर्जर, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
July 9th, 2020 | Post by :- | 38 Views

– पशु अस्पताल को खुद इलाज की जरूरत : कौशल

– अंदर बैठने से डरते हैं पशु चिकित्सक और पशु पालक

बददी ! जहां एक ओर गोरक्षा के नाम पर जगह-जगह आंदोलन हो रहे हैँ, वहीं इन पशुओं को बीमारियों से बचाने और नस्ल सुधार के लिए स्थित पशु अस्पतालों का हाल यह है कि बिल्डिंग खस्ताहाल में है। औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में विकास के दावे तो हो रहे हैं, लेकिन पशु चिकित्सालय केंद्र मात्र कागजों में ही उपाधि लेकर बैठा है, जबकि धरातल पर कुछ भी नहीं हो पाया है। पशु अस्पताल पूरी तरह से जर्जर हो चुका है जिसके कारण यहां पर आने वाले पशुपालकों तथा तैनात कर्मियों को हादसे की आशंका बनी रहती है। कई दशक से यहां पर पशु अस्पताल चल रहा है। मरम्मत के अभाव में भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है जिससे अनहोनी की आशंका बनी रहती है। दीवार के प्लास्टर तक उखड़ गए है तथा जगह- जगह छत भी क्षतिग्रस्त हो चुका है। इमारत ऐसी है कि पता नही कब गिर जाए। दीवारों पर सीलन, जगह जगह दरारें, दीवारों ब छत पर उगी घास, बूटी, पौधे इस की शोभा बढ़ा रहे है।
ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि कर्मियों की क्या स्थिति होगी। पर उनकी विवशता है कि अपने कर्तव्यों का निर्वह्न करने के लिए यहां रहना ही पड़ता है। लेकिन अस्पताल के मरम्मत की सुध विभाग नहीं ले रहा है। ग्रामीण क्षेत्र की एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतें ऐसी है जहां पर बेजुबानों के इलाज की किसी भी तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जिसके चलते सैकडों गांव के पशुपालक यहां पर पशुओं का उपचार कराने के लिए पहुंचते है लेकिन अस्पताल की हालत देखकर उनको डर लगता है। पशुपालकों का कहना है की अस्पताल में उपचार की हर सुविधा मौजूद है लेकिन जर्जर भवन से कर्मियों को ही खतरा बना रहता है जिसके कारण रात्रि विश्राम करने से कतराते है। इसे क्या कहा जाय। व्यवस्था का दोष या फिर सुविधाओं का टोटा।

उधर, बद्दी समाज सुधारक सभा के अध्यक्ष संजीव कौशल के कहा कि गांव की करीब 40 प्रतिशत आबादी पशु पालन पर निर्भर हैं। गांव के लोगों का कृषि के बाद पशुपालन दूसरा मुख्य व्यवसाय है। इस क्षेत्र में ज्यादातर बकरी, भैंस, गाय एयर कुते व खच्चर पालन करने वाले लोग अपने पशुओं को इलाज के लिए पशु चिकित्सालय बद्दी आते है। विडंबना है कि पशु अस्पताल पशु पालकों की सुविधाओं से दूर हो चुका है। अस्पताल का भवन देखकर नहीं कहा जा सकता है कि यह पशु अस्पताल होगा। यह इतना जर्जर हो गया है कि इसमें बैठना खतरे से खाली नहीं है। यहां तक कि स्टाफ के बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सी तक नहीं है। कुछ पुरानी कुर्सियां अस्पताल की शोभा बढ़ा रही है। पशु अस्पताल भवन की हालत इतनी खराब है कि वह कभी भी गिर सकता है। मौत के साए में डॉक्टर यहां पर पशुओं का इलाज कर रहे हैं। इस इमारत की छत थोड़ी से बरसात में भी टपकने लग जाती है, अभी तो मानसून आना बाकी है। बरसात में छत का टुकड़ा गिरने का खतरा बना रहता है। ऐसे में छत का टुकड़ा टूट कर अगर किसी पशु पालक या पशु चिकित्सक व अन्य कर्मी ऊपर गिरा तो बड़े हादसे को टाला नहीं जा सकेगा।

कौशक ने कहा कि एक दर्जन से अधिक पंचायतों के हजारों गांव के पशु पालक इस पशु चिकत्सल्य पर निर्भर है। इन गांव के ग्रामीणों को पशु उपचार के आते है पर उनके पशुओं के लिए कोई शेड तक उपलब्ध नही है और बरसात के मौसम में उनको बाहर बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता है। पशु अस्पताल के पास 18 बिस्वे जमीन होने के बाद भी इसका निर्माण नही हो पा रहा है और ना ही निर्माणित इमारत की रिपेयर का कार्य करवा जा रहा है। उन्होंने उच्चाधिकारियों को आग्रह किया है कि जल्द ही इस पशु अस्पताल का निर्माण किया जाए।

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