बच्चों को सूखे राशन की किट घर पर उपलब्ध करवाई : जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
July 7th, 2020 | Post by :- | 31 Views

नूंह मेवात , ( लियाकत अली )  ।जिले में हर स्कूल के अध्यापक के अलावा मुख्य अध्यापक इत्यादि की ड्यूटी कोरोना के दौरान बच्चों को मिड डे मील का राशन सूखा वितरण करने की जिम्मेवारी लगाई गई थी। नूंह जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कपिल पुनिया  ने कहा की  जिन बच्चों तक किसी वजह से कोई सामान नहीं पहुंच पाया था । उनको हर माह तकरीबन 800 रुपये की आर्थिक मदद दी गई। अगर बात हम इम्यूनिटी बढ़ाने की करें तो बच्चों को शिक्षा विभाग की तरफ से सूखा दूध भी वितरित किया गया । जब स्कूल मैनेजमेंट कमेटी चेयरमैन से बात की गई तो उन्होंने भी मिड डे मील के राशन का सही तरीके से वितरण करने की बात कही । इसके अलावा स्कूल के अध्यापक ने भी कहा कि उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपनी ड्यूटी का सही तरीके से निर्वहन करते हुए बच्चों को सूखे राशन की किट घर पर उपलब्ध करवाई । इतना ही नहीं जब योजना के लाभार्थी अभिभावक व छात्रों से बातचीत की गई तो उन्होंने भी कहा कि उन्हें समय पर सूखा राशन मिला । जिसे उन्होंने अपने घर पर पकाकर खाया । कोरोना महामारी में उन्हें किसी प्रकार की कोई दिक्कत मिड डे मील राशन को लेकर नहीं हुई। इसके अलावा उन्होंने यह भी माना कि विभाग ने न केवल दूध के पैकेट घर पर भिजवाए बल्कि खातों में रकम भी डलवाई । कुल मिलाकर कोरोना काल में भले ही छात्रों को पका हुआ भोजन शिक्षा विभाग को उपलब्ध नहीं करा पाया हो , लेकिन सूखा राशन घर -घर पहुंचा कर गरीब परिवार के बच्चों को किसी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं होने दी। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कपिल पूनिया ने पत्रकारों को बताया कि छुट्टियों की वजह से जिन बच्चों को मिड डे मील का राशन घर पर दिया गया है । उनको छुट्टियां खत्म होने तथा स्कूल खुलने के बाद फिर से स्कूल से जोड़ा जाएगा । इसमें किसी प्रकार की दिक्कत शिक्षा विभाग को सामने नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी की वजह से पका हुआ भोजन वितरण नहीं किया जा सका , जिसकी वजह से जो नियम बनता था। उसी हिसाब से सूखा राशन हर लाभ पात्र तक पहुंचाने की शिक्षा विभाग ने रणनीति बनाकर अध्यापकों की ड्यूटिया लगाई। जिसमें पूरी तरह से उनके अध्यापक सफल रहे । डीईईओ ने यह कहा की किसी भी प्रकार की शिकायत कोरोना कॉल के दौरान अभिभावकों / छात्रों ने मिड डे मील के राशन को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से नहीं की।

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