भारत तिब्बत सहयोग मंच चंडीगढ़ ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि,चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का पुतला फूंका और चीन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की 
June 26th, 2020 | Post by :- | 72 Views

चंडीगढ़( मनोज शर्मा) भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी पर हुए खूनी संघर्ष में हमारी सेना के वो 20 योद्धा जिन्होंने अपने प्राणों को न्योछावर  कर चीनी सेना के 50 के करीब सैनिकों को मौत के घाट उतार कर शहीदी प्राप्त की थी , इन वीर सपूतों की याद में गुरुवार को भारत तिब्बत सहयोग मंच चंडीगढ़ प्रांत द्वारा ई डब्लू एस धनास में श्रधान्जली समारोह का आयोजन हुआ \ इस कार्यक्रम में मंच के राष्ट्रीय मंत्री विजय शर्मा, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य राजेन्द्र शर्मा, प्रांत प्रमुख अश्वनी पराशर, प्रांत प्रचार प्रमुख रविन्द्र पठानिया, सह प्रचार प्रमुख रवि रावत और रविंदर सिंह ठाकर, कार्यक्रम संयोजक स्वराज उपाध्याय, ललित कंसल और भरत यादव, वैभव पराशर, सुरेश गुप्ता, सोनू गुप्ता, सुखविंदर सिंह, ललित चौहान सहित सैंकड़ों मंच के समर्थकों ने इसमें भाग लिया और शहीदों को पुष्प सुमन अर्पित कर उन्हें श्रधान्जली अर्पित की \

कार्यक्रम की जानकारी प्रदान करते हुए प्रचार प्रमुख रविन्द्र पठानिया ने बताया कि इस मौके पर मंच के लोगों ने शहीदों के चित्र पर पुष्पसुमन अर्पित किये और मोमबत्ती जला कर दौ मिनट का मौनव्रत रखा इसके उपरान्त चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का पुतला फूंका और चीन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की \
इस घटना से जुड़े तथ्यों पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जैसा कि सभी को विधित है कि चीन कहता कुछ है और करता कुछ है \ गलवान घाटी में भी उसने अपने रंग दिखाए और पहले विवादित स्थल से जाने की बात से मुकर कर हमारे निहत्थे सैनिकों पर सुनियोजित ढंग से वार कर उनको घायल किया \ बाद में हमारे सैनिकों ने चीनी सेना के सैनिकों को चुन चुन कर मारा और हमारे शहीद हुए 20 सैनिकों के बदले 50 से भी अधिक चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार कर उनकी शहादत का बदला लिया \ देश के सभी नागरिक उनकी इस शहादत को कभी भूल नहीं पाएंगे \
इस अवसर पर प्रान्त प्रमुख अश्वनी पराशर और प्रचार प्रमुख रविन्द्र पठानिया ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि चीन ने भारत की पीठ के पीछे खंजर घोंपा हो \ विस्तारवादी नीति के पक्षधर चीन को अब समझ आ जाना चाहिए कि ये मोदी सरकार है जो न केवल मुहतोड़ जवाब देती है बल्कि दुश्मन की ईंट से ईंट बजाने में भी गुरेज नहीं करती \ आज चीन जितनी मर्जी झूठी दलील विश्व के सामने रखे परन्तु उसके इस प्रपंच से सभी देश वाकिफ हैं और कोई भी नहीं चाहता कि चीन भारत को युद्ध के लिए न उकसाए \ यदि युद्ध होता है तो 1962 की हार का बदला लेने के लिए हमारे देश की फ़ौज काफी आतुर है \ चीन की खोखली धमकी से कुछ नहीं होने वाला \ इस बार यदि चीन ने गलती से भी युद्ध को छेड़ा फिर चीन को इसकी भारी कीमत चुकानी पढ़ सकती है \ इसलिए चीन को अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए और अपने नापाक इरादों के बजाये विश्व कल्याण के बारे में सोचना चाहिए ।

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