पर्यावरण संरक्ष्ण की एक नई मिसाल, वटवृक्ष का मनाया गया जन्मदिन |
September 7th, 2019 | Post by :- | 237 Views

बरगद के जन्मदिन पर पूजा अर्चना और भंडारा

हसनपुर पलवल (मुकेश वशिष्ट/चौ0 सतपाल) :-  हसनपुर बस स्टैंड मार्किट के दुकानदार पर्यावरण संरक्ष्ण की मिसाल बन रहे हैं | यहा के दुकानदार मार्किट में लगे बरगद के वृक्ष की रख-रखाव तो करते ही है अपने घर के सदस्य की तरह से इसका जन्मोत्सव भी मनाते हैं यह सिलसिला लगातार 15 वर्षो से चला आ रहा हैं | शुक्रवार को बस स्टैंड दुकानदारों ने व सभी पर्यावरण प्रेमीयों के सहयोग से 15वां जन्मदिन भी विधिवत पूजा अर्चना कर व भंडारे का आयोजन कर धूमधाम से मनाया|

इस आयोजन का बरगद के वृक्ष के प्रति किसी अन्धविश्वास को लेकर नही अपितु वृक्षों के प्रति आने वाली पीढी को जागरूक करने का प्रयास भी हैं | इस वृक्ष को दुकानदारों ने 7 सितम्बर को ही रोपा था इसलिए हर वर्ष इसी दिन को इसका जन्मोत्सव मनाया जाने लगा | तभी से 15 सालों से हर साल उसका जन्मदिन मनाया जाने लगा | भण्डारे का आयोजन भी किया गया|

बरगद के पेड़ का धार्मिक आधार औऱ महत्व

हिंदु धर्म परंपराओं के अनुसार बरगद के पेड़ का बड़ा महत्व बताया गया है। इस पेड़ के मूल मे ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्रभाग में भगवान शिव का वास माना जाता है। इस पेड़ की ये विशेषता है की यह लंबे समय तक अक्षय रह सकता है। इसलिए इसे अक्षय वट भी कहा जाता है। हिंदु धर्म कथाओं के अनुसार जिस वक्त भगवान विष्णु की नाभि से कमल उत्पन्न हुआ था उसी वक्त यक्षो के राजा मणिभद्र से वट वृक्ष उत्पन्न हुआ था। यक्ष के नाम से ही वट वृक्ष यानि बरगद के पेड़ को यक्षवास, यक्षतरु और यक्ष वारुक आदि नामों से जाना जाता है। कहा जाता है की प्रलय के अंत में भगवान श्री कृष्ण नें इसी वृक्ष के पत्ते पर ही मार्कण्डेय को दर्शन दिए थे। देवी सावित्रि भी वट वृक्ष में निवास करती है। इसी वृक्ष के नीचे ही देवी सावित्री नें अपने पति को पुनर्जीवित किया था।

अधिक आक्सीजन देता है वट वृक्ष :

वैज्ञानिक शौधों के अनुसार कुछ विशेष पेड़ो की पत्तियां आक्सीजन देने का कार्य करती है। जिन पेड़ों में पत्तियां ज्यादा होती है वे उतनी ही ज्यादा आक्सीजन देती है। बरगद के पेड़ काफी विशालकायी होते हैं इस प्रकार ये अन्य कई पेड़ों से ज्यादा आक्सीजन देते हैं। कहा जाता है की बरगद का पेड़ 20 घंटो से भी ज्यादा समय तक आक्सीजन देता है। अपनी इसी विशेषता के कारण बरगद का पेड़ प्रयावरण को शुद्ध करनें में सहायक होता है। इसलिए भी बरगद के पेड़ का महत्व बढ जाता है। चिकित्सीय महत्व : आयुर्वेद के अनुसार बरगद का पेड़ अनेक बिमारियों को दूर करनें में सहायक होता है। इसके फल, जड़, छाल, पत्ती, आदि सभी भागों के बनी औषधियां कई प्रकार के रोगो को काटती है। मघा नक्षत्र का प्रतीक : भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बरगद के पेड़ को मघा नक्षत्र का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में पैदा होने वाले जातकों को घर में बरगद का पेड़ लगाना जरुरी होता है और साथ ही बरगद की देखभाल एवं पूजा करने से लाभकारी परिणाम मिलते हैं।

इस मौके पर लाला सैंकी, प० अमर चन्द शर्मा, त्रिलोक चन्द पेंटर, आस मोहम्मद, चौ० चतरसिंह, मा० विक्रमसिंह यात्री, विष्णु सैनी, कुमरपाल शर्मा, सोनू तेवतिया, जगपाल आदि काफी संख्या में दूकानदार व श्रद्धालू व पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहें|

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