शिक्षा को केवल थ्री आर, रीडिंग, राइटिंग, अर्थमैटिक तक सीमित न रखें बल्कि शिक्षा को संस्कारपरक और रोजगार परक बनाएं : मनोहर लाल
June 22nd, 2020 | Post by :- | 24 Views

चंडीगढ़, ( महिन्द्र पाल सिंहमार )     ।     आत्मनिर्भर भारत में शिक्षकों की भूमिका की महत्ता को बताते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने शिक्षकों से आह्वान किया कि शिक्षा को केवल थ्री आर, रीडिंग, राइटिंग, अर्थमैटिक तक सीमित न रखें बल्कि शिक्षा को संस्कारपरक और रोजगार परक बनाएं ताकि विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करके संस्कारवान और आत्मनिर्भर बन सकें।

मुख्यमंत्री आज इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी द्वारा आयोजित मूक्स और मूडल आधारित लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम-फैकल्टी विकास कार्यक्रम के समापन समारोह में डिजिटल माध्यम से बतौर मुख्य अतिथि आत्मनिर्भर भारत में शिक्षकों की भूमिका विषय पर फैकल्टी को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद सभी की दिनचर्या में बहुत बदलाव आया और इससे विद्यार्थी और शिक्षक भी प्रभावित हुए, परंतु यह बहुत गर्व की बात है कि इस संकट के प्रतिकूल प्रभाव को अलग रखते हुए शिक्षकों ने विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से यह सुनिश्चित किया कि छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया कोरोना वायरस के कारण अभूतपूर्व और स्वास्थ्य आपातकाल के समय को देख रही है और अब शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए छात्रों को राष्ट्र निर्माता के रूप में तैयार करने में अपना योगदान देने के लिए आगे आएं। उन्होंने शिक्षकों से निवेदन किया कि शिक्षा को केवल थ्री आर रीडिंग, राइटिंग, अर्थमैटिक तक सीमित न रखें बल्कि शिक्षा में सद्गुणों का प्रचार और संस्कारपरक पद्धति भी जरूर विकसित करें ताकि हम अपने विद्यार्थीयो को एक अच्छी शिक्षा दे सकें।

उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत की जो बात कही है, उसका अर्थ यही है कि प्रत्येक नागरिक इस देश के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का यह दायित्व है कि वे अच्छे नागरिक तैयार करें जो देश भक्ति से परिपूर्ण हो । इस कार्यक्रम के माध्यम से इसी संकल्प को लेकर आगे बढ़े कि अपने देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जितना ज्यादा संस्कारित होगा, उतना ही समाज और देश आगे बढ़ेंगे।

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