सूर्यग्रहण पर भारी रहा कोरोना वायरस ना तो विज्ञान शालाओं में दर्शक आए और ना ही पवित्र नदियों पर नहाने श्रद्धालु
June 21st, 2020 | Post by :- | 21 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । आज 500 वर्ष बाद भारत के गृह नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग देखने को मिला। ज्योतिष के अनुसार इसे सूर्य पर ग्रहण मानते हैं तो खगोल वैज्ञानिकों का मानना है कि जब पृथ्वी और सूर्य के बीच कुछ देर के लिए चन्द्रमा आ जाता है,तब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर आने से रुक जाता है। ज्योतिषाचार्यों और खगोल वैज्ञानिकों के अपने अपने तर्क हो सकते हैं,लेकिन आम आदमी तो यही मानता है कि 21 जून को सूर्य ग्रहण पर कोरोना वायरस भारी रहा है। सूर्य पर चन्द्र ग्रहण के समय देश भर की विज्ञान शालाओं में दर्शकों की भीड़ होती रही है। ग्रहण के दृश्यों को दूरबीन या अन्य साधनों से देखने के लिए हजारों लोग एकत्रित होते हैं, लेकिन कोरोना वायरस की दहशत के चलते इस बार ऐसा नहीं हुआ। दर्शकों ने टीवी चैनलों पर ही सूर्यग्रहण को देखा। इसे कोरोना का डर ही तो कहा जाएगा कि कोई भी श्रद्धालु ग्रहण के बाद देश की पवित्र नदियों एवं सरोवरों में स्नान के लिए नहीं गया, जबकि पूर्व के ग्रहणों के समय लाखों श्रद्धालु पहले ही पवित्र स्थानों पर पहुंच जाते थे। इसलिये कहा जा सकता है कि इस बार के सूर्यग्रहण पर कोरोना वायरस भारी रहा है। कोरोना ने सूर्य ग्रहण के दौरान और बाद की सभी गतिविधियों को रोक दिया। जबकि 21 जून की खगोलिय घटना 500 वर्ष बाद हुई है। इससे इसके महत्व अंदाजा लगाया जा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस तरह की घटना अब भारत में वर्ष 2039 में देखने को मिलेगी।
*क्या सूर्य को ग्रहण लग सकता है?
न जाने कितने लाखों वर्षों से सूर्य ग्रहण इसी तरह आग उगल रहा है। ऐसे सूर्यग्रह पर कोई ग्रहण लग सकता है? धार्मिक आस्थावान लोग कुछ कहे, लेकिन सूर्य के रहस्यों को समझने में वैज्ञानिक भी विफल साबित हो रहे हैं। 21 जून को खगोलिय घटना में चन्द्रमा की वजह से सूर्य का प्रकाश कुछ समय के पृृथ्वी पर आने से रुक गया, लेकिन लम्बे समय तक सूर्य के सामने चन्द्रमा नहीं रह सकता है। अब यह वैज्ञानिक पता करेंगे कि जब चन्द्रमा ने सूर्य के प्रकाश को रोका, तब चन्द्रमा की स्थिति कैसी रही। चन्द्रमा को शीतलता का प्रतीक माना जाता है। जब आग उगलती सूर्य की किरणों को चन्द्रमा ने अपने ऊपर लिया तो गर्मी की कल्पना की जा सकती है। भारत में जब मई जून माह में सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर आती है,तो त्राहि त्राहि मच जाती है। लोगों का गर्मी से बुरा हाल होता है। सूर्य तो पृथ्वी से करोड़ों किलोमीटर दूर है, जबकि चन्द्रमा पृथ्वी के निकट है। वैज्ञानिकों के लिए चन्द्रमा की स्थिति का पता लगाना चुनौती पूर्ण कार्य है। वैज्ञानिकों के अनुसार 21 जून को चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच 5 घंटे 49 मिनट रहा। एक बार ऐसा भी अवसर आया, जब चन्द्रमा ने सूर्य को 98 प्रतिशत तक ढक लिया। लेकिन यह स्थिति कुछ मिनटों तक ही रही। देश के अलग अलग शहरों में सूर्य के ढकने के अलग अलग नजारे देखने को मिले। कुछ लोग खगोलिय घटना को लेकर देश दुनिया पर पडऩे वाले असर की भविष्यवाणियां भी कर रहे हैं। जिसे कोरी बकवास ही कहा जाएगा। जब पृथ्वी पर परमाणु बम बनाए जा रहे हों, तब विनाश तो होगा ही। चीन जैसा देश पृथ्वी का शक्तिशाली देश बनने के लिए सारे हथकंडे अपना रहा है, लेकिन पृथ्वी के थोड़ा हिल जाने मात्र से ही चीन और उसके राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सारी हेकड़ी निकल जाएगी। भारत के आध्यात्म में तो वो शक्ति है जो पूरे चीन का विनाश कर सकता है।

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