कोरोना काल में शिक्षा व्यवस्था का पूरी तरह से बंटाधार .ऑनलाइन शिक्षा की जमीनी हकीकत
June 17th, 2020 | Post by :- | 51 Views

नूंह मेवात , ( लियाकत अली )  । कोरोना काल में शिक्षा व्यवस्था का पूरी तरह से बंटाधार हो चुका है । कोरोना महामारी की वजह से पिछले कई महीनों से सरकारी तथा निजी स्कूलों में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा है। कोरोना बीमारी की वजह से वैसे तो पूरे प्रदेश तथा देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में शिक्षा व्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है , लेकिन शैक्षणिक एतवार से राज्य में सबसे पिछड़े नूह जिले के हालात बद से बदतर हैं । कहने को तो शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन पढ़ाई इन दिनों शुरू की हुई है , ताकि पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक छात्र-छात्राओं को इन दिनों कुछ ज्ञान हासिल हो सके । इसके लिए शिक्षा विभाग ने एजुसेट , केबल नेटवर्क , इंटरनेट , व्हाट्सएप ग्रुप इत्यादि के माध्यम बनाए हुए हैं ।कागजों में तो नूह जिले में 61 फ़ीसदी ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था का लाभ छात्र उठा रहे हैं , लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है । जिला हरियाणा का मुस्लिम बहुल जिला है। इस जिले में टीवी बहुत ही कम है । ज्यादातर जिला ग्रामीण क्षेत्र में आता है। इसी कोरोना काल में रमजान का पवित्र महीना भी बीता है । उस दौरान शायद ही किसी मुस्लिम परिवार के घर में टीवी चलाने की अनुमति दी जाती हो । आर्थिक स्थिति लोगों की बेहद कमजोर है। इसलिए एंड्रॉयड फोन भी कम मात्रा में है। कुछ परिवारों के पास तो फोन ही नहीं है । फोन है तो इंटरनेट महंगा होने के कारण रिचार्ज कराना मुश्किल है। कई बार तो बिजली नहीं आने की वजह से मोबाइल फोन की बैटरी तक चार्ज नहीं हो पाती है। कुल मिलाकर कठिनाइयां इस जिले में दूसरे जिलों के मुकाबले काफी ज्यादा है। ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर लेकर अलग – अलग कक्षाओं के छात्रों से बात की गई तथा उनके अभिभावकों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनका उज्जवल भविष्य पूरी तरह से अंधकार की तरफ जाता दिखाई दे रहा है । सरकार जल्द से जल्द स्कूलों में पढ़ाई शुरू करे , ताकि उनके बच्चों का भविष्य संवर सके । अगर कुछ महीने इसी तरह कोरोना की वजह से स्कूल – कॉलेज बंद रहे तो पहले से ही चरमरा ही इस जिले की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से बंटाधार हो सकता है। कुल मिलाकर नूह जिले में ऑनलाइन शिक्षा धरातल पर ना के बराबर है। जिला शिक्षा अधिकारी सूरजभान ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि ऑनलाइन शिक्षा के अच्छे नतीजे आ रहे हैं , जो ऑनलाइन पढ़ाई की जा रही है । उसको सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को उनके फोन पर भेज दिया जाता है । खंड शिक्षा अधिकारी प्रिंसिपल तथा मुख्याध्यापक के व्हाट्सएप पर उसे भेज देते हैं और जिले में सोशल मीडिया , केबल नेटवर्क , टीवी चैनल इत्यादि के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई की जा रही है । पिनगवां कस्बे के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के अध्यापक भी ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था के बेहतर होने का दावा कर रहे हैं । उन्होंने तो यहां तक कहा कि जिन बच्चों के पास टीवी या मोबाइल फोन नहीं है या व्हाट्सएप ग्रुप से नहीं जुड़े हुए हैं । उनके अभिभावकों को कॉल कर बच्चों की पढ़ाई के बारे में बताया जा रहा है , लेकिन  अभिभावकों ने ऐसी खबरों को पूरी तरह से निराधार बताया । कुल मिलाकर शिक्षा विभाग भले ही बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़ने के लिए प्रयास कर रहा हो , लेकिन यहां के बच्चों को यह बिल्कुल भी शायद रास नहीं आ रहा है । अगर कोरोना की वजह से 2020 इसी तरह गुजरा तो आंकड़ों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। शिक्षा में सबसे फिसड्डी यह जिला कभी भी उपर नही उठ पायेगा।

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