जिले में कोरोना मुक्ति के लिए चल रही अग्नि तपस्या का हुआ समापन|
June 13th, 2020 | Post by :- | 58 Views

41 दिन बाद हवन यज्ञ के साथ हुआ अग्नि तपस्या का समापन :- (सुन्दर कुंडु)

पलवल (मुकेश वशिष्ट हसनपुर) 13 जून :-  जिले के गाँव प्रह्लादपुर के मंदिर पर पिछली चार मई से चल रही अग्नि तपस्या का 41 दिन बाद समापन हो गया। इस दौरान अग्नि तपस्या कर रहे मंदिर के श्री महंत बाबा बालिकनाथ ने चारों तरफ गाय के उपलों में अग्नि प्रज्वलित कर उसके बीचों बीच बैठकर रोज की तरह सुबह तपस्या शुरू की और तपस्या के समापन के बाद हवन यज्ञ किया गया।

जिसमें मंदिर के महंत के अलावा मंदिर प्रांगण में सोशल डिस्टनसिंग के नियमों की पालना करते हुए हवन यज्ञ में प्रह्लादपुर के साथ साथ आसपास के ग्रामीणों ने आहुति डाली। गौरतलब है कि के यमुना किनारे बने प्राचीन शिव मंदिर के महंत बालिकनाथ ने कोरोना महामारी को खत्म करने के उद्देश्य से पिछले महीने अग्नि तपस्या शुरू की थी इस दौरान बालिकनाथ महाराज ने उपवास रखते हुए 41 दिन तक गाय के उपलों की धूनी लगाकर उसमे अपने चारों तरफ अग्नि प्रज्वलित कर तपस्या शुरू की थी। इस तपस्या के दौरान मंदिर के महंत बाबा बालिकनाथ चिलचिलाती धूप और तपती गर्मी में रोजाना सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक अग्नि तपस्या करते थे।

जब इस बारे में प्रह्लादपुर और आसपास के ग्रामीणों को पता चला तो ग्रामीण बाबा के दर्शन करने के लिए मंदिर प्रांगण में आने लगे लेकिन महाराज के निर्देशानुसार लॉक डाउन के नियमों को ध्यान में रखते हुए यहां भक्तों को एक साथ न आने के लिए निर्देश दिए गए और सोशल डिस्टनसिंग की पालना के साथ साथ यहां आने वाले हर भक्तजन को मास्क पहनकर ही मंदिर में आने दिया।

इस तपस्या के दौरान कई ऐसी घटनाएं सामने आई जिससे इलाके के लोग मन्दिर प्रांगण में बाबा बालिकनाथ के दर्शन करने के लिए ललायित हो उठे जिनमे सबसे विचित्र घटना थी नाग नागिन के जोड़े द्वारा मन्दिर प्रांगण में नृत्य करना। बाबा बालिक नाथ की तपस्या के दौरान कई बार एक नाग नागिन का जोड़ा महाराज की तपस्या शुरू होने के बाद यमुना की तरफ से मन्दिर में प्रवेश करता और मन्दिर प्रांगण में तब तक नृत्य करता जब तक महाराज की अग्नि तपस्या खत्म नही होती। जब इस घटना के बारे में ग्रामीणों को पता चला तो गांव से दूर यमुना किनारे स्थित प्राचीन शिव मंदिर पर आसपास के लोग इस दृश्य को देखने के लिए आने लगे। इस विचित्र घटना को देखने के बाद आने वाले ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें बाबा बालिकनाथ की तपस्या पर विश्वास है और जल्द ही बाबा की तपस्या का फल ग्रामीणों के साथ साथ इलाके को मिलेगा।

जब इस अग्नि तपस्या के बारे में मन्दिर के महंत और तपस्या करने वाले बाबा बालिक नाथ से पूछा तो उन्होंने बताया कि उनकी यह सातवीं अग्नि तपस्या है जो हर वर्ष मई जून में की जाती है। साथ ही उन्होंने बताया कि वो जनवरी माह में जल तपस्या भी करते है। उन्होंने बताया कि इस तपस्या को करने का उद्देश्य देश प्रदेश के साथ विश्व में फैल रही कोरोना नामक महामारी को खत्म करना और लोगों में आपसी प्रेम और शांति सद्भावना कायम करना है।

वहीं कटवारिया सराय दिल्ली से आये श्री महंत सरपंच नाथ ने बताया कि जिस तरह बाबा बालिक नाथ की अग्नि तपस्या के दौरान नर सांप और मादा सांप ने मंदिर में आकर नृत्य किया वो बाबा भोलेनाथ की कृप्या के शुभ संकेत है जिसका फल बाबा बालिक नाथ की तपस्या के कारण इलाके के लोगों को मिलेगा। और जो वैश्विक महामारी कोरोना आज चारों तरफ पैर पसारे हुए है वो जल्द खत्म होगी। और इलाके में सुख समृद्धि व शांति आएगी।

वहीं इस तपस्या के बारे में गांव प्रह्लादपुर के ग्रामीण श्याम सुंदर ने बताया कि बाबा बालिक नाथ की यह सातवीं तपस्या है। जो आज 41 वें दिन हवन यज्ञ के साथ समाप्त हुई है। इस तपस्या के दौरान प्रह्लादपुर,राजुपुर खादर, दोषपुर,सोलड़ा, भोलडा और गुरवाड़ी के लोगों ने बाबा की तपस्या के दौरान अपना श्रमदान कर या फिर अन्य किसी और प्रकार से अपना योगदान कर पुण्य लाभ अर्जित किया है।

उन्होंने बताया कि इस तरह का आयोजन इस मौसम में हर वर्ष यहां होता है चाहे वो अग्नि तपस्या हो या फिर भागवत गीता का पाठ हो और उसके बाद एक विशाल भन्डारे का आयोजन होता है। जिसमें हजारों लोग प्रशाद ग्रहण करते है लेकिन इस बार कोविड 19  महामारी के चलते लॉकडाउन और सोशल डिस्टनसिंग के नियमों को ध्यान में रखते हुए भन्डारे का आयोजन नही किया जा रहा। लॉक डाउन के नियमों को ध्यान में रखकर प्रशाद वितरण किया जाएगा। बाबा बालिक नाथ की अग्नि तपस्या के दौरान ग्रामीण सुरेशचंद, गोपाल शर्मा, महेश, मनोज ब्लॉक समिति मेम्बर आदि ने विशेष योगदान दिया।

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