कोरोनाकाल में भी अनवरत जारी है महिला बाल विकास विभाग की योजनाऐं नन्हें बच्चों एवं माताओं को मिली घर पहुंच पोषण सुविधा
June 12th, 2020 | Post by :- | 73 Views

‘चकमक‘ अभियान एवं सजग कार्यक्रम से भी बच्चे पा रहे है शाला पूर्व षिक्षा

कोण्डागांव(नरेश जैन)— वर्तमान में जब कोरोना संक्रमण काल का खतरा बढ़ता ही जा रहा है और इससे शासन की कई लोकहितकारी कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावित होने की आषंका है ऐसे में शासन के कुछ विभाग मुस्तैदी से बदस्तुर अपनी योजनाओं का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों के जन-जीवन में पहुंचा रहे है। इस क्रम में महिला बाल विकास विभाग द्वारा इस प्रकार का सराहनीय कार्य किया जा रहा है। चूंकि पौष्टिक खाद्य एवं पोषण आहार वितरण से नन्हें बच्चो एवं माताओं को किसी भी स्थिति में वंचित नहीं किया जा सकता है। इसे देखते हुए कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा के मार्गदर्षन में विभाग द्वारा आंगनबाड़ी बंद होने की दषा में भी ग्रामीण क्षेत्रों में पौष्टिक आहार वितरण को घर पहुंच सेवा के माध्यम से सुनिष्चित किया जा रहा है। विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार विगत महीनो में छह माह से 3 वर्ष के जिले के 26 हजार 207 बच्चों को, 3 से 6 वर्ष के 28 हजार 907 बच्चे, 5 हजार 497 गर्भवती महिलाओं, 6 हजार 29 षिषुवती माताओं एवं 11 से 14 वर्ष के 320 शालात्यागी किषोरी बालिकाओं को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर पहुंच रेडी-टू-ईट के वितरण की सेवाऐं दी गई। इसके अलावा आंगनबार्ड़ी कार्यकर्ताओ द्वारा गर्भवती महिलाओं, षिषुवती माताओं एवं किषोरियों के स्वास्थ्य आंकलन हेतु निरंतर गृह भेंट भी किया जा रहा है। इसमें हितग्राहियों के स्वास्थ्य जांच एवं टीकाकरण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। आंगनबाड़ी केन्द्रो में बच्चों को दी जाने वाली शाला पूर्व षिक्षा के विकल्प के रुप में ‘चकमक‘ पुस्तिका और सजग वीडियो के माध्यम से बच्चों के घर जाकर उनके पालको को भी संदेष दिया जा रहा है। ज्ञात हो कि चकमक अभियान के अंतर्गत नन्हें बच्चों को खेलकूद, अठखेलियों, बाल कविताओं, चित्र के माध्यम से पशु-पक्षियों का परिचय वर्णमाला को रोचक तरीके से अवगत कराया जाता है जबकि सजग कार्यक्रम के द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मोबाईल पर आॅडियो मेसेज में बच्चों के सही परवरिष के सुझाव, कहानी गीत भेजे जाते है। आज जब कोरोना संक्रमण के चलते सभी आंगनबाड़ी केन्द्र बंद है ऐसे में बच्चों को घरो में ही पारिवारिक सदस्यों यथा दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता अथवा पालको के द्वारा उन्हें रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखने की महती आवष्यकता है।
ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा विगत् दिनो आंगनबाड़ी के बच्चों के समग्र विकास के लिए महिला बाल विकास विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से तैयार किए गए ‘चकमक अभियान‘ और ‘सजग कार्यक्रम‘ का शुभारंभ एवं हल्बी एवं गोंडी बोली के दो पुस्तिका ’पहिल डांहका’एवं ’मोद््दोल डाका’ (पहला कदम) का विमोचन किया गया था। इसके अलावा परियोजना अधिकारी इमरान अख्तर ने इस संबंध में यह भी बताया कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत 56 पंचायतो के लगभग 32 हजार 5 सौ कुपोषित बच्चों एवं एनीमिक महिलाओं को 15-15 दिन के अंतराल में सूखा राषन देने की भी व्यवस्था की गई है।

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