समाज के हर जरूरतमंद तक बेहतर कानूनी सेवाओं प्रदान कराने के लिए प्रारूप की पुस्तिका वेबिनार के माध्यम से जारी|
June 6th, 2020 | Post by :- | 64 Views

न्यायमूर्ति एन.वी. रमाना न्यायाधीश की अध्यक्षता में किया गया ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन|

डीएलएसए ने वैश्विक महामारी के दौरान गतिविधियों में नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाकर किया सराहनीय कार्य|

कमजोर वर्गों के हर व्यक्ति के अधिकारों को सुनिश्चित कर प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व प्रदान करना पुस्तिका का मुख्य उद्देश्य|

पलवल हसनपुर (मुकेश वशिष्ट) 06 जून :- मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एंव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पीयूष शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के तत्वावधान में एक ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन सर्वोच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति एन.वी. रमाना न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्षों, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के अध्यक्षों, राज्य प्राधिकरणों के सदस्य सचिवों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्षों और सचिवों की उपस्थिति में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में न्यायमूर्ति एन.वी. रमाना न्यायाधीश ने एक हैंडबुक ऑफ फॉरमेट्स (प्रारूप की पुस्तिका) प्रभावी कानूनी सेवाओं को सुनिश्चित करना जारी की। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि तीन महीने बीत जाने के वाबजूद भी स्थिति नियंत्रण में नहीं है। लॉकडाउन के उद्देश्य से हजारों लोग अपना जीवन और आजीविका खो चुके हैं। बड़े पैमाने पर प्रवास हुआ है। लॉकडाउन में स्वयं रचनात्मक मनोवैज्ञानिक मुद्दे और परिवारों के भीतर हिंसा है। महिलाओं पर कार्य का बोझ अधिक है।

बच्चे स्कूलों में जाने में असमर्थ हैं। घर से कामकाज करने से पारिवारिक जीवन पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि अब हमें बाधाओं के साथ कार्य करना होगा। ट्रायल कोर्ट में अभी तक सुचारू रूप से काम शुरू नहीं किया गया है। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कार्य किए जा रहे हैं। इसके बावजूद भी जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरणों ने वैश्विक महामारी के दौरान गतिविधियों में नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाकर सराहनीय कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि परिवार में हिंसा का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र उनके संज्ञान में आया है। बाल शोषण के मामलों में भी वृद्धि हुई है। ऐसे समय में जब पीडि़त हमारे पास नहीं पहुंच सकते तब हमारे लिए उन तक पहुंचना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। तत्कालीन स्थिति को स्वीकार करते हुए हमने प्रत्येक जिले में वन स्टॉप सेंटर स्थापित किए। महिला पैनल अधिवक्ताओं द्वारा टेलिसर्विसेज के माध्यम से कानूनी सहायता प्रदान की गई। अन्य मामलों में घरेलू हिंसा अधिनियम के अंतर्गत याचिकाएं दायर की गई।

उन्होंने कहा कि कानूनी सेवाएं प्राधिकरणों के लिए पूरे देश के अंदर जेलों में अति भीड़ को कम करने को सुनिश्चित करना एक और ध्यान देने योग्य क्षेत्र है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण उच्चाधिकार प्राप्त समितियों की सहायता से कैदियों, सजायाफ्ता बंदियों की सक्रिय रूप से पहचान करके उनकी रिहाई के लिए आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करें। यह समान रूप से अनिवार्य है कि कानूनी सहायता प्रदाता दस्तावेज और उनके हस्तक्षेप के लिए रिपोर्ट करें, जो आवश्यक हो।

विभिन्न नालसा योजनाओं और ढांचों को प्रभावित करते हुए प्रारूपों के उपयोग से एकरुपता लाना हैंडबुक (पुस्तिका) मानकीकरण की ओर पहला महत्वपूर्ण कदम है। यह पुस्तिका मानव संसाधन के प्रबंधन के लिए और भविष्य में प्रभावी उपकरण सभी के लिए न्याय का एहसास कराने में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इस महामारी ने हमारे सामने कई उभरते मुद्दों को प्रस्तुत किया है। सबसे प्रमुख एक रिवर्स माइग्रेशन है। रिवर्स माइग्रेशन से असमानता व भेदभाव और गरीबी में वृद्धि होगी। इस महामारी ने महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों व अन्य के अधिकारों को प्रभावित किया है। हम सभी को साथ मिलकर निरंतर लक्ष्य अभिविन्यास कार्य योजना को पूरा करना है। भविष्य के लक्ष्य को पूरा करने के लिए हम सभी साथ रहने के लिए प्रतिबद्ध रहें।

इसके अलावा माननीय न्यायमूर्ति ने यह भी कहा कि 58797 कैदियों में से 20972 कैदियों को पैरोल वगैरा, 9558 व्यक्तियों को रिमांड स्टेज के दौरान, 1559 मामले घरेलू हिंसा के, 16391 सजायाफ्ता, 1882 श्रमिकों, 310 किरायेदारों को कानूनी प्रतिनिधित्व के माध्यम से कानूनी सहायता प्रदान की गई तथा 15100 राष्ट्रीय कानूनी सहायता हेल्पलाइन के माध्यम से जरूरतमंदों को सहायता प्रदान की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों द्वारा सोशल मीडिया, सामुदायिक रेडियो, स्थानीय केबल, टी.वी. चैनलों की किफायती मशीनरी के माध्यम से सैंकड़ों ऑनलाइन वेबिनार आयोजित की गई। उन्होंने निष्कर्ष के तौर पर श्रोताओं को संदेश दिया कि इस चुनौतीपूर्ण समय को आप लकवाग्रस्त नहीं होने दें, सभी अंधेरी रातों की तरह यह भी अवश्य बीत जाएगी।

इसके अलावा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव अशोक कुमार, नालसा के पूर्व सदस्य सचिव आलोक अग्रवाल, नालसा निदेशक सुनील चौहान, प्रोग्राम हैड कुमारी मधुरिमा धानुका ने भी वेबिनार में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कार्यक्रम की विभिन्न औपचारिकताओं को पूरा किया। उन्होंने हैंडबुक (पुस्तिका) पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उक्त हैंडबुक नालसा (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) द्वारा तैयार करवाई गई, जिसमें सेवा प्रदाताओं के कार्यों और विधिक संस्थानों के बारे में जानकारी संजोई गई है।

हैंडबुक नालसा की प्राथमिकता को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया यह कदम निश्चित ही मील का पत्थर साबित होगा। पुस्तिका का मुख्य उद्देश्य कमजोर वर्गों के हर व्यक्ति के अधिकारों को सुनिश्चित करते हुए प्रदान की जाने वाली सेवाओं को प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व प्रदान करना है। वेबिनार में सभी सम्मानित अतिथियों ने एक रूप में हैंडबुक के महत्व को दोहराया। यह हैंडबुक कानूनी सेवाओं की गतिविधियों के प्रबंधन के लिए भविष्य में एक अत्यंत प्रभावी उपकरण साबित होगी।

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