जिले में स्कूल खोले जाए या नही,  इसे लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने बुलाई बैठक|
June 6th, 2020 | Post by :- | 51 Views

बैठक में मिली जुली प्रतिक्रिया आई, अभिभावक अपने बच्चो को स्कूल भेजेगे संशय बरकरार :- अजय प्रताप सिंह 

पलवल हसनपुर (मुकेश वशिष्ट) 06 जून :- हरियाणा में कोरोना संकट को देखते हुए स्कूल खोले जाए या नही इसे लेकर हरियाणा सरकार प्रत्येक जिले के लोगों से सलाह कर रही है। इसके लिए हर जिले में बैठके की जा रही है ताकि सरकार के पास फीड बैक पहुंच सके और सरकार निर्णय लेने में सक्षम हो सके।

पलवल में इस विषय पर आवश्यक बैठक जिला शिक्षा अधिकारी अशोक बघेल की अध्यक्षता में बुलाई गई। जिसमें प्राइवेट स्कूलो के संचालक, सरकारी स्कूलो के अध्यापक, अभिभावक, पत्रकार आदि को बुलाया गया। बघेल ने बैठक में बताया कि उनके पास सरकार के आदेश आए है जिसमें वे जनता से जानना चाहते है कि स्कूल खोले जाए या नही, अगर हां तो कौन सा समय व माह रखा जाए, बडी कक्षाओ के बच्चो को बुलाया जाए या छोटी बडी दोनो कक्षाओ को लगाया जाए, ओड ईवन फार्मूला चलेगा या हर कक्षा के आधे आधे बच्चो को बुलाया जाए। ऐसे दस बिन्दु सरकार ने हमारे पास भेजे है जिन पर आप सभी की राय लेनी है।

इस पर अपने सुझाव देते हुए प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन पलवल के अध्यक्ष सतबीर पटेल ने कहा कि सरकार पहले सुनिश्चित करे कि अगर स्कूल खुले और किसी बच्चे को कोरोना हुआ तो स्कूल पर कोई बात नही आएगी। सरकार सुनिश्चिचत करे कि स्कूल में किसी बच्चे को कोरोना होने पर स्कूल वाले को दोषी न ठहराया जाए तो हम स्कूल खोलने को तैयार है। प्राथमिक शिक्षक संघ पलवल के जिला अध्यक्ष अभिषेक डागर ने कहा कि सरकारी स्कूलो में प्राइमेरी कक्षा के एक बच्चे को प्रतिदिन एक मास्क, एक गलब्स, व कोरोना से बचाने के लिए अन्य सामान चाहिए। वो सामान बच्चो को सरकार मुहैया कराएगी या नही पहले ये बताया जाए।

अगर सरकार एक बच्चे पर सौ रूपए प्रतिदिन खर्च करे तो हम स्कूल खोलने को तैयार है। हरियाणा अध्यापक संघ के प्रदेश चेयरमैन मनोज सहरावत ने कहा कि जिस प्रकार तेजी से कोरोना बढ रहा है उसे देखते हुए स्कूल नही खोलने चाहिए , क्योकि जान है जो जहान है। सरकार अपने ऊपर कोई दोष नही लेना चाहती इसलिए हमें बेवकूफ बनाया जा रहा है ताकि कल को कोई कोरोना केस निकलता है तो सरकार की किरकिरी न हो।  प्रधानाचार्य महेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि लोगेां से सलाह लेकर स्कूल खोलना ये सरकार का मात्र एक ड्रामा है इससे ज्यादा कुछ नही है।

उन्होने कहा कि जब अध्यापको के डीए काटे गए, कोरोना रिलिफ फंड में पैसा काटा गया तब क्या सरकार ने हमसे पूछकर ये काम किए थे। इसलिए सरकार अपना बचाव कर रही है और हमें व आपके बच्चो को कोरोना टेस्ट किट समझती है। प्राध्यापक अशोक बाल्यान ने कहा कि स्कूल खुलने चाहिए और कक्षा 9 से 12 तक के बच्चो को बुलाया जाना चाहिए। अगर ये प्रयोग सफल होता है तो अन्य कक्षाओ को बुलाना चाहिए। प्राइमेरी कक्षा के बच्चो को अभी स्कूल न बुलाया जाए।

बाल्यान का समर्थन ज्यादातर स्कूल वालो ने किया। बैठक में पत्रकारो से पूछा गया कि आपकी क्या राय है तो पत्रकारो ने बताया कि पलवल की 92 प्रतिशत जनता अपने बच्चो को स्कूल में भेजने के लिए राजी नही है। ज्यादातर अभिभावको का कहना है कि ऐसी भयंकर बिमारी में सबसे पहले अपने बच्चो को बचाना प्राथमिकता है अगर बच्चे का एक वर्ष ड्रोप भी कराना पडे तो भी अभिभावक सहन करने को तैयार है। इसके इलावा स्कूल को हर तीसरे या पाचवे दिन सेनेटाइज करना भी बेहद मुश्किल काम है। स्कूल वाले सेनेटाइज के पैसे किसी न किसी रूप में अभिभावको से वसूलेगे जिससे अभिभावको पर एक और भार बढ जाएगा।

सभी के विचार लेने के बाद डीईओ अशोक बघेल ने कहा कि वे सभी की राय से शिक्षा विभाग पंचकूला को अवगत करा देगे और इस विषय में आगे जो भी सरकार से निर्देश मिलेगे उससे सबको अवगत करा दिया जाएगा। आज की बैठक में प्राइवेट स्कूलो की तरफ से सतबीर पटेल, सतीश कौशिष, रवि दत्त शर्मा, राजेन्द्र राणा, सुरेश भारद्वाज, पवन अग्रवाल, तथा शिक्षा विभाग की तरफ से अनिल शर्मा, सुखबीर सिंह, माम राज रावत, गुलशन गोयल, महेन्द्र सिंह रावत, अशोक बाल्यान, अभिषेक डागर, राजबीर जाखड, वेदपाल, मनोज सहरावत, हेतराम होडल सहित दर्जनो अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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