गंगथ का पुराना नाम गंग ” कांगड़ा का सबसे बड़ा दंगल होता है यहां “बाबा क्यालू जी महाराज नाम से प्रसिद्ध है ” दंगल
June 6th, 2020 | Post by :- | 357 Views

मुकेश सरमाल ( इंदौरा )

 

आज जहां हर ओर जलाभाव की स्थिति उत्पन्न हो रही है वही विधानसभा इंदौरा का   गंगथ कस्बा ऐसा स्थान है जहां पानी की समस्या से लोग कोसों दूर हैं इसका कारण साफ है,जब कभी भी उस क्षेत्र में लोगों की फसल वर्षा के अभाव से सूख रही होती है तो क्षेत्र के लोग वहां स्थापित शिवलिंग पर जल चढ़ाने वर से ही उक्त समस्या से निजात पा लेते हैं

 

विधानसभा इंदौरा के कस्बे में स्थापित शिवलिंग लोगों की श्रद्धा व आस्था का प्रतीक है !

गंगथ कस्बे को पंड्या वाला शहर भी कहा जाता है !

गंगथ का प्राचीन नाम गंग था पानी की बहुताय होने के कारण ही इसका नाम गंग पड़ा! गंग को देख सहज ही गंगा की अनुभूति होती है मान्यता के अनुसार यहां मांगी गई कोई भी मन्नत व्यर्थ नहीं जाती हर वर्ष यहां चार 5 जून को दो दिवसीय बाबा के क्या लू के नाम से मेले का आयोजन किया जाता था

 

लेकिन इस बार इस मेले को कोरोना महामारी के चलते रद्द करना पड़ा !

 

कोरोना महामारी के चलते गंगथ बाबा क्यालू महाराज छिजं मेला रद्द कांगड़ा का सबसे बड़ा दंगल होता है ये मेला

गंगथ का प्राचीन नाम गंग

शिवलिंग पर जल चढ़ाने से होती है वर्षा”

मेले में दंगल का विशाल आयोजन भी किया जाता है पूरे जिले में यह दंगल सबसे बड़े दंगल के रूप में माना जाता है इस कस्बे में बाबा क्यालू का दिव्य मंदिर भी है यहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मन्नतें को पूरा होने की भावना से आते हैं!

 

जहां पर भगवान भोलेनाथ का प्राचीन मंदिर भी काफी लोकप्रिय है जहां हर मंदिर में श्याम रंग के शिवलिंग स्थापित किए जाते है वहीं जहां पर सफेद रंग का शिवलिंग स्थापित किया गया है मान्यता के अनुसार एक समय जमीन की खुदाई करते वक्त क्षेत्र के लोगों को यह शिवलिंग मिला था इस शिवलिंग पर खुदाई के दौरान ठोकर लग गई,ठोकर की वजह से शिवलिंग किस चीज से दूध की धारा बहने लगी इस चमत्कार को देख लोगों ने जमीन खोदकर शिवलिंग को बाहर निकाला कहते हैं लोग इस शिवलिंग को उठाकर अपने गांव इंदपुर ले जाते हुए रास्ते में विश्राम करने के उद्देश्य से चाय पान करने के लिए बैठ गए!

 

कुछ देर विश्राम करने के पश्चात जब लोगों ने शिवलिंग को उठाने की कोशिश की तो शिवलिंग उनसे हिला तक नहीं उसी समय से यहां पर यह शिवलिंग स्थापित किया गया है इस मंदिर में होड़ खडड जल चढ़ाया जाता है!

 

शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल दोबारा खडड में मिलता है तो वर्षाहो जाती है!

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