बिजली संशोधन बिल 2020 के खिलाफ कर्मचारियों ने काली पट्टी बांध किया बिल के खिलाफ अपना रोष प्रकट|
June 1st, 2020 | Post by :- | 51 Views

पलवल हसनपुर (मुकेश वशिष्ट) :-  जिले के खण्ड हसनपुर में बिजली संशोधन बिल 2020 के खिलाफ बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियर की राष्ट्रीय समन्वय समिति के आह्वान पर आज बिजली कार्यालय पर शारीरिक दूरी का पालन करते हुए प्रदर्शन किया तथा कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर बिल के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया।  सब यूनिट प्रधान रणसिंह की अध्यक्षता में आयोजित प्रदर्शन का संचालन सचिव धर्मेन्द्र कुमार ने किया। बिल के विरोध मे आयोजित प्रदर्शन मे स्थानीय किसानों व रिटायर्ड कर्मचारियों ने भी हिस्सेदारी की।

प्रदर्शन में उपस्थित बिजली कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए आल हरियाणा पावर कारपोरेशन वर्कर्स यूनियन के प्रदेश उपमहासचिव रमेश चन्द व सर्व कर्मचारी संघ के ब्लाक प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि सरकार कोरोना की आड़ में बिजली विभाग का नीजिकरण करने पर आमदा है । जबकि देश के विकास में बिजली विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गांव-2 तक बिजली पहुँचने के बाद ही देश व प्रदेश में हरित क्रान्ति सम्भव हो पाई तथा औद्योगिक विकास हुआ। सरकार लाईन लॉस व राजस्व घाटे का बहाना बनाकर बिजली क्षेत्र को पूंजीपतियों के हवाले करना चाह रही है।

उन्होने आरोप लगाया कि बिजली के निजीकरण के बाद बिजली के रेट इतने बढ जाएंगे कि बिजली गरीब व आम उपभोक्ता के दायरे से बाहर हो जाएगी।  मुम्बई इसका उदाहरण है। जहां तक लाईन लॉस व राजस्व घाटे की बात है तो चंडीगढ़ मे केवल नौ प्रतिशत लाईन घाटा है तथा राजस्व घाटा बिल्कुल नहीं है।  केन्द्र सरकार ने कोरोना महामारी के बीच 17 अप्रैल 2020 को बिजली संशोधन बिल का मसौदा जारी करते हुए बिल पर  5 जून तक सभी राज्यों व अन्य स्टॉक होल्डर्स से सुझाव मांगे गए हैं। केन्द्र सरकार निजीकरण के इस बिल को संसद के मानसून सत्र में पारित कराने पर तुली हुई है।  उन्होनें बताया कि बिजली के नीजिकरण के बाद निजी कंपनियों को 16 प्रतिशत मुनाफा लेने का अधिकार होगा।

प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए किसान सभा के नेता चन्दन सिंह व बलजीत शास्त्री ने कहा कि कोरोना के इस संकट में भी बड़े पूंजीपतियों के हजारों करोड के कर्ज माफ किए जा रहे हैं,जबकि किसानों को उनके उत्पाद की लागत भी नही मिल पा रही है। उन्होनें बिजली संशोधन बिल का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि बिजली के निजीकरण के बाद कृषि उपयोग के लिए दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म कर दिया जायेगा। प्रदर्शन में यूनियन नेता योगेश शर्मा, अमरसिंह, सतीश कुमार, लक्ष्मण सिंह, कमरुद्दीन, संजय बंसल, नरेशकुमार व गजेन्दर सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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