सीएलपी के डिप्टी लीडर आफताब अहमद ने किया तावडू अनाज मंडी का दौरा
May 31st, 2020 | Post by :- | 95 Views
नूंह मेवात , ( लियाकत अली )  ।  हरियाणा कांग्रेस विधायक दल के उप नेता व नूह विधायक चौधरी आफताब अहमद ने रविवार को तावडू अनाज मंडी का दौरा किया और वहां के किसानों, आड़तीयों से बात की। तावडू अनाज मंडी के हालात देखकर व किसान व आड़तीयों की समस्या सुनकर आफताब अहमद ने बीजेपी की प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य सरकार किसान विरोधी सरकार है और पूरी तरह से विफल साबित हो चुकी है।
सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किसानों ने उन्हें बताया कि उन्हें अपनी गेंहू, सरसों की फसल औने पौने दामों पर बेचनी पड़ी है। जिस सरसों की फसल में थोड़ी बहुत नमी रह गई थी उसे सरकार ने खरीदा तक नहीं और वो फसल किसानों को निजी लोगों को सस्ते दामों पर बेचनी पड़ी।
आफताब अहमद ने कहा कि 72 घंटे में राज्य सरकार ने किसान को भुगतान का वायदा किया था लेकिन एक महीने में गेंहू, 15 दिन में सरसों की फसल का भुगतान ना होना सरासर ग़लत है। किसान अपनी फसल बेच कर भी बेबस बैठा है

सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने राज्य सरकार को कटघरे में खड़े करते हुए कहा कि किसानों की बिना इच्छा के कोरोना शुल्क काटा गया और किसानों को बताया कि वो मुख्यमंत्री रिलीफ़ फंड में भेज दिया  है। आफताब अहमद ने कहा कि कम से कम किसानों की अनुमति तो लेनी चाहिए थी।
आफताब अहमद ने कहा कि किसानों की अनदेखी करना राज्य सरकार की प्राथमिकता और मानसिकता दोनों को दर्शाता है।
आफताब अहमद ने कहा कि बरसात हो रही है, लेकिन अनाज को सही से ढकने तक का इंतजाम सरकार ने नहीं किया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
पत्रकारों ने सीएलपी डिप्टी लीडर आफताब अहमद से पूछा कि तावडू में लघु सचिवालय व बस अड्डे पर उनकी क्या राय है तो आफताब अहमद ने कहा कि लघु सचिवालय के लिए जगह सब कुछ कांग्रेस ने कर दिया था लेकिन बीजेपी सरकार के उदासीन रवैए व बीजेपी नेताओं के निजी लालच में मामला अटका रखा है, जब शहर में हमने लघु सचिवालय के लिए जमीन सहित सब कुछ मुहैय्या करा दिया था तो अब छह किलोमीटर दूर ले जाने की क्या आवश्यकता है। वहीं उन्होंने कहा कि परिवहन मंत्री रहते हुए उन्होंने नूह, सोहना, पुनहाना, झिरका, तावडू में बस अड्डे दिए थे लेकिन
बीजेपी सरकार तावडू बस अड्डे को सही से चला नहीं पाई, जो भी हुआ हमारे समय की ही परियोजना हैं।

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