मनुष्य अपने लालच के लिये धीरे धीरे पर्यावरण को खत्म कर रहा है, जो भविष्य जीवन मे जहर घोलता जा रहा है : कमल अग्रवाल
May 30th, 2020 | Post by :- | 50 Views

रायपुर रानी, लोकहित एक्सप्रैस  (अंकित)

पर्यावरण को नष्ट करते हुए, भौतिक विकास के पीछे गलत तरीके से दौड़ रही दुनिया को गलत बताते हुए, मेडिकल एसोसिएशन के मेंबर कमल अग्रवाल ने बताया कि मनुष्य अपने लालच के लिए धीरे धीरे पर्यावरण को खत्म कर रहा है, जो कि हमारे भविष्य जीवन में जहर घोलता जा रहा है। सनातन धर्म मे प्राकृति पूजन को प्रकृति संरक्षण मानते हुए अग्रवाल ने बताया कि हिन्दू संस्कृति में पर्यावरण को देवतुल्य स्थान दिया गया है। यही कारण है कि पर्यावरण के सभी अंगों को जैसे जल, वायु, भूमि, को देवताओं से जोड़कर देवता ही माना है। मनुष्य पांच तत्वों जैसे जल, अग्नि, आकाश, पृथ्वी और वायु से मिलकर बना है। इन तत्वों को देवता मानते हुए वेदों के छठे अंग ज्योतिष कि बात करें तो ज्योतिष के मूल आधार नक्षत्र, राशि और ग्रहो को भी पर्यावरण से जोड़ा गया है। “गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि”- “अश्वत्थ: सर्व वृक्षा वृक्षाणां अर्थात् वृक्षों में पीपल मैं हूं…”। युवा समाज सेवक व अग्रवाल मेडिकल स्टोर रायपुर रानी के संचालक कमल अग्रवाल ने जनता से अपील करते हुए कहा कि ग्रह पृथ्वी के सुरक्षित भविष्य के लिए पर्यावरण को बचाने के लिए सकारात्मक प्रयास बहुत ज़रूरी है। इसके अतिरिक्त अग्रवाल ने यह भी बताया कि प्राचीन समय मे लोग पीपल के पेड़ काफी मात्रा में लगाया करते थे, जिनसे वातावरण बहुत ही शुद्ध रहता था, वही बकायन नीम के फायदों से भला कौन परिचित नही है?पुराने समय मे हमारे पूर्वज नीम के पत्तो को उबाल कर स्नान किया करते थे, इसीलिए बहुत ही बीमारियों से निरोग भी रहते थे। इसके इलावा पर्यावरण ने हमें जड़ी बूटियों के माध्यम से बहुत से उपहार भी दिए है जैसे सौंदर्य के लिए एलोवेरा, विटामिन सी का स्तोत्र आंवला, बहुत से अन्दरूनी रोगों के लिए तुलसी व अजवाइन, पाचन शक्ति के लिए सोआ, दिमाग के विकास व यादाश्त तेज़ रखने के लिए ब्राह्मी और शारीरिक व मानसिक शक्ति के लिए अश्वगंधा मनुष्य जीवन को निरोग रखने में प्राचीन काल से उपयोग किये जा रहे है।

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