पिनगवा का गर्ल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पिछले 2 साल से लड़कियों के लिए परेशानीयो का अम्बार ।
September 5th, 2019 | Post by :- | 122 Views
मेवात (सद्दाम हुसैन  मेवात के कस्बा पिनगवा का गर्ल सीनियर सेकेंडरी स्कूल पिछले 2 साल से लड़कियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। स्कूल में लड़कियों के लिए जहां बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है वही पीने के पानी की भी समस्या आम हो रही है। स्कूल में लगभग बारह सौ छात्राएं हैं ,और मात्र छह कमरे बैठने के लिए छात्राओं को ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहे हैं। जिससे इन कमरों में छात्राओं को पढ़ना तो दूर की बात है ,बल्कि सांस लेने में भी दिक्कत आ रही है।
छात्राओं ने बताया कि अगर जल्द ही उनके स्कूल का निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वह जल्द ही अपने हकों की लड़ाई के लिए सड़क पर उतर कर सरकार और विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करेंगी। आपको बता दें कि लगभग 2 साल पहले पिनगवा के गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की बिल्डिंग जर्जर अवस्था में होने के कारण उसे नई बनाने के लिए तोड़ दिया गया था, और सीनियर सेकेंडरी की स्कूल की छात्राओं को छठी कक्षा से लेकर बारहवीं तक प्राइमरी स्कूल की बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया था। लेकिन जहां प्राइमरी स्कूल पहले ही अपनी छात्राओं के लिए कम था, वही सीनियर सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्राओं के आ जाने से यह भवन काफी छोटा पड़ गया ,और छात्राओं को एक एक कमरे में लगभग डेढ़ सौ- डेढ़ सौ की संख्या में बैठा कर अध्यापक पढ़ाने के लिए मजबूर हो गए । इतना ही नहीं बैठने के लिए उचित व्यवस्था न होने के कारण ही लड़कियों को मिट्टी में बैठकर पढ़ाने के लिए भी अध्यापक मजबूर हैं। जिनका कहना है कि उन्होंने कई बार अपने विभाग और प्रशासन से इस बात से अवगत कराया है, कि स्कूल में कमरों की संख्या कम होने के कारण लड़कियों को एक साथ में 3-3 सेक्शन बैठाकर पढ़ाया जाता है ।
जिससे छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । इतना ही नहीं छात्राओं ने भी अपना दुखड़ा रोते हुए बताया कि वह पिछले 2 साल से स्कूल में बैठने के लिए बहुत ही परेशानी का सामना कर रही हैं । इतना ही नहीं 3–3 सेक्शन की छात्राओं को एक साथ बैठा कर अध्यापकों द्वारा उन्हें पढ़ाया जा रहा है। काफी समय से उन्हें पढ़ाई में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। 10वीं –12वीं छात्रा मनीषा, पुष्पा ,नंदिनी ,वर्षा, गुलबसा साहिला आदि ने बताया कि 2 साल पहले उनके स्कूल की बिल्डिंग जर्जर होने के कारण तोड़ दी गई थी, और उन्हें इस प्राइमरी स्कूल के भवन में शिफ्ट करा दिया गया था। लेकिन आज उन्हें कमरों की कमी के चलते काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है इतना ही नहीं एक -एक कमरे में डेढ़ सौ छात्राओं को बैठाकर अध्यापक गण पढ़ाने को मजबूर है। कमरों में पढ़ाई तो दूर की बात है छात्राओं को सांस लेने में भी भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। छात्राओं ने बताया कि भरी गर्मी में उन्हें काफी समस्या हो रही है। इतना ही नहीं कई बार तो कमरों में दूसरी क्लास के बच्चों को पढ़ाने के लिए दूसरी क्लास की छात्राओं को कमरों के बाहर धूप में खड़ा होना पड़ता है, जिससे उन्हें कई बार बीमार होने का भी डर सता रहा है।
क्या कहते हैं स्कूल के अध्यापक……
स्कूल के अध्यापक मुकेश कुमार सहित अन्य अध्यापकों का कहना है स्कूल में छात्राओं के बैठने के लिए कोई उचित संसाधन नहीं है। स्कूल की छात्राओं को भवन की कमी के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है । उन्होंने अपने उच्च अधिकारियों व प्रशासन को इस बात से अवगत कराया है , लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
जल्द ही कमरों का निर्माण नहीं हुआ तो सड़क पर उतर सकती है छात्राएं।
स्कूल की छात्राओं ने बताया कि पिछले काफी समय से उन्हें बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है ।अगर जल्द ही विभाग और सरकार ने उनके स्कूल के कमरों का निर्माण नहीं किया तो उन्हें मजबूर होकर सरकार और विभाग के खिलाफ अपने हकों के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा।
क्या कहते हैं गांव के सरपंच……
गांव के सरपंच संजय सिंगला का कहना है कि पिछले 2 साल से उनके कस्बे की छात्राओं को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। लड़कियों को बैठने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। जिससे छात्राओं का कमरों में दम घुटता है। इतना ही नहीं कई बार छात्राएं गर्मी की वजह से बीमार भी हो चुकी हैं उन्होंने कई बार उच्च अधिकारियों से इस बारे में बात भी की है ।लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।
सरपच संजय सिंगला

क्या कहते हैं कस्बे के पूर्व मार्केट कमेटी के वाइस चेयरमैन।
कस्बा पिनगवा के पूर्व मार्केट कमेटी के वाईस चेयरमैन यादराम गर्ग का कहना है कि उनके कस्बे की छात्राओं को पिछले 2 साल से जो समस्या का सामना करना पड़ रहा है वह भारी समस्या है । एक तरफ जहां सरकार बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा दे रही है । तो दूसरी तरफ पिनगवा में पढ़ने वाली 1200 सौ छात्राओं की सरकार कोई सुध नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि कस्बे की लड़कियों को जो परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ,वह विभाग और सरकार की लापरवाही है । अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह इसको लेकर जल्द ही आगे का फैसला लेंगे ।जिससे उनके कस्बे में पढ़ने वाली लड़कियों को किसी समस्या का सामना ना करना पड़े।
क्या कहते हैं खंड शिक्षा अधिकारी……..
खंड शिक्षा अधिकारी सद्दीक अहमद का कहना है कि उन्होंने लगातार उच्च अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया है बिल्डिंग कार्य का निर्माण एमडीए के मार्फत होना है। जिसकी वजह से फाइल विभाग के पास ना होकर एमडीए के पास है। वह जल्द ही दोबारा जाकर इस मामले में और बेहतर प्रयास करेंगे ताकि छात्राओं को हो रही परेशानी से निजात मिल सके।

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