कोरोना से न डरें और न लोगों को डराएं – सिविल सर्जन|
May 28th, 2020 | Post by :- | 97 Views

जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम घर-घर जाकर कर रहे है लोगो की मनोसामाजिक परामर्श

हसनपुर पलवल (मुकेश वशिष्ट) :-  देश में लगातार कोरोना पॉजिटिव केसों की संख्या में बढ़ोत्तरी के बाद अब एक डर का माहौल बन गया है। लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आ रहे है। हर किसी के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि कहीं मैं भी कोरोना वायरस का शिकार तो नहीं? ऐसे में पलवल सीएमओ डा. ब्रहमदीप, जोकि स्वयं एक मनोचिकित्सक है इसलिए ऐसे समय में लोगो मानसिक डर और चिंता को समझते है, इसलिए लोगो को मनोसामाजिक समर्थन प्रदान करने के लिए उनके निर्देश पर जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत टीम लोगों के मन से न केवल कोरोना का भय निकालने के बारे में उन्हें जागरूक कर रही हैं, अपितु इसके लिए वो लोगों को मानसिक व शारीरिक रूप से बेहतर बनाने के लिए कुछ आसान टिप्स भी दे रहे हैं।

कोरोना से लडऩे के लिए लोगों को मानसिक रूप से कैसे तैयार किया जाए, इसे लेकर पलवल जिले में डॉक्टरों की टीम दिन रात कार्य कर रही है। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम टीम न केवल कोरोना मरीजों से सवाल करके उनकी मनोदशा को जान रहे हैं, अपितु उन्हें टिप्स देकर मानिसक रूप से मजबूत भी कर रहे हैं। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम में मनोविज्ञानी मधु डागर के अलावा प्रियंका कम्म्युनिटी हेल्थ नर्स, प्रभूदयाल साइकाइट्री नर्स भी शामिल हैं, जिनका कहना है कि हमें कोरोना को लेकर किसी भी तरह ना तो स्वयं घबराने की जरुरत है और न ही किसी तरह की पैनिक कंडीशन पैदा करेंने की आवश्यकता है।
भ्रामक प्रचार से बचें और न ही इसे फैलाने में सहयोग करें
कोरोना वायरस को लेकर वायरल होने वाले भ्रामक संदेश पर ध्यान न दें। सबसे पहले जरूरी है कि कोरोना को लेकर जो भी जानकारी लें वह अधिकृत डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट, स्वास्थ्य विभाग से उपलब्ध जानकारी पर ही भरोसा करें।
जो व्यक्ति कोविड पॉजिटिव पाया जाता है उसकी न तो आलोचना करें और न ही उसकी फैमली के बारे में कुछ टिप्पणी करें। सिविल सर्जन डा. ब्रह्मïदीप सिंह ने लोगों से अपील की है कि सोशल डिस्टन्सिंग का सही अर्थ जाने, सोशल डिस्टन्सिंग को सोशल भेदभाव में न बदले। सोशल डिस्क्रिमिनेशन या भेदभाव कोविड पॉजीटिव व्यक्ति को ठीक होने के बाद भी ठीक नहीं होने देता है और वो मन ही मन में टूट जाता है।
कोरोना वायरस से जुड़ी चर्चा व अफवाहों के चलते लोगों में डिप्रेशन और चिंता बढ़ रही है। लोग मेंटल डिसऑर्डर से गुजर रहे हैं। यहीं नहीं, डिप्रेशन के पुराने मरीजों का मर्ज बढ़ गया है। वे हर वक्त कोरोना वायरस से अनहोनी की आशंका में जी रहे हैं। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की मनोविज्ञानी मधु डागर का कहना है कि ऐसे में लोग घबराएं नहीं, अगर मन में किसी प्रकार की कोई शंका है या फिर नींद नहीं आती है, घबराहट, बेचैनी या किसी काम में मन नहीं लगता हो और हमेशा नकारत्मक विचार आते हो तो वे व्यक्ति तुरंत पलवल के नागरिक अस्पताल में मनोचिकित्सा परामर्श ले सकते है। अगर किसी व्यक्ति का पहले से ही किसी मानसिक बीमारी का इलाज चल रहा है तो वे भी मनोचिकित्सक से सम्पर्क करें।
कोरोना वायरस के डर से बचने के लिए करें योग
मनोविज्ञानी मधु डागर ने कहा कि कोरोना वायरस के चलते लोगों को अफवाहों से दूर रहना चाहिए। बार-बार एक ही टॉपिक को देखने और सुनने पर लोगों के दिमाग पर असर हो रहा है। ऐसे में साधारण खांसी होने पर लोग कोरोना से जोड रहे है। वायरस एक शारीरिक बीमारी है, लेकिन लगातार हो रही चर्चाएं इसे मानसिक बीमारी भी बना रही हैं। लोगों को लग रहा है कि उन्हें और उनके परिवार को कुछ हो न जाएं। ऐसे में वे लोगों को यही सलाह दी जा रही है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। किताबें पढ़ें, योग और मेडिटेशन व प्राणायाम करें, संगीत सुनें। हमें सोच सकारात्मक रखनी होगी, तभी हम कोरोना को हरा सकते हैं, अगर मन में नकारात्मक विचार रहेंगे तो इससे शरीर का इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होगा। इम्युनिटी कमजोरी हुई, तो बीमारियों से लडऩा मुश्किल होगा।
कोरोना को सोचना छोड़ें,  सावधानी बरतें और परिवार के साथ समय बिताएं
सीएमओ डा. ब्रह्मदीप ने बताया कि वे खुद मनोचिकित्सक हैं। ऐसे में वे भलीभांति जानते हैं कि कोरोना को लेकर इस समय हरेक व्यक्ति एक गंभीर मनोदशा से गुजर रहा है। कोरोना के बढते संक्रमण के बारे में जानकर लोगों के मन में डर बढ़ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की टीम सीएमओ के निर्देश पर लोगों को यही सलाह दे रही हैं कि कोरोना के बारे में सभी सब कुछ जान चुके हैं। अब सोचना छोड़ें और घर पर रहकर अपनी पसंद की किताब पढ़ें। घरवालों के नजदीक रहें। अभिभावकों को समय दें। प्रार्थना करें, जिन दोस्त रिश्तेदारों को भूल चुके हैं, उनसे फोन पर बात करें। पुरानी यादों को रिवाइज करें। जिंदगी से जुड़े किस्से और अनुभव परिवार के साथ बांटने का यह यही समय है। बुजुर्गों के साथ समय बिताएं। ऐसा करके हम सब कोरोना को हराने में अवश्य कामयाब होंगे।

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