विश्व का सबसे महान कार्य है अध्यापन के माध्यम से समाज को शिक्षित करना : फुलिया
September 5th, 2019 | Post by :- | 292 Views

कुरुक्षेत्र, ( सुरेश पाल सिंहमार )    ।        उपायुक्त डा. एसएस फुलिया ने कहा कि दुनिया में एक शिक्षक या अध्यापक बनने से बड़ा और कोई कार्य नहीं। यह विश्व का सबसे महान पेशा या व्यवसाय है, जिसके माध्यम से एक शिक्षक समाज को शिक्षित करने का काम करता है। हर वर्ष 5 सितम्बर को पुरे भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है और शिक्षकों को सम्मान दिया जाता है। यह हर साल पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के दिन मनाया जाता और उन्हें याद किया जाता है।

वे वीरवार को महिला महाविद्यालय पलवल में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इससे पहले उपायुक्त डा. एसएस फुलिया व मुख्यमंत्री के सुशासन सहयोगी कर्णदीप शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर व रिब्बन काटकर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस शिक्षकों और छात्रों के रिश्तों को और भी अच्छा बनाने का एक महान अवसर होता है, इसलिए इस दिवस को हमें खुशी के साथ मनाना चाहिए। आज के इस आधुनिक युग में शिक्षक दिवस का स्टाईल और स्तर बहुत ही बदल चूका है। विद्यार्थी अपने शिक्षकों को बधाई देने के लिए तरह-तरह की योजना बनाते हैं। कुछ छात्र अपने पसंदीदा शिक्षकों को तौहफा, ग्रीटिंग कार्ड, पेन, डायरी, इत्यादि दे कर बधाई देते हैं तो कुछ छात्र ऑडियो मेसेज, ईमेल, वीडियो मेसेज, ऑनलाइन चेट या सोशल मीडिया के माध्यम से बधाई देते हैं, परंतु हमें चाहिए की आज के दिन अगर सम्भव हो तो हमें अपने शिक्षकों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए, तभी सही मायनों में शिक्षक दिवस को मनाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने छात्रों को ध्यानपूर्वक और ईमानदारी से अपने बच्चो के जैसे शिक्षा प्रदान करते हैं। शिक्षक का स्थान माता-पिता से भी बढ़ कर होता है। माता-पिता बच्चों को जन्म देते हैं और शिक्षक उन्हें सही ढांचे में डाल कर उनका भविष्य उज्जवल बनाते हैं। हमें कभी भी अपने शिक्षकों को नहीं भूलना चाहिए। हमें उन्हें हमेशा उनका सम्मान करना चाहिए। सीएमजीजए कर्णदीप शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार हमारे माता-पिता हमें प्यार करते और हमारी अच्छे से देखभाल करते हैं, उसी प्रकार शिक्षक हमें सफलता के रास्ते पर भेजने की हर के कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह जीने के लिए हमारे शरीर को भोजन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार जीवन में आगे बढऩे और आने वाली कठिनाइयों का सामना करने के लिए एक शिक्षक का होना अति आवश्यक है। जिस प्रकार एक शिल्पकार बेकार पत्थरों को अपनी निष्ठा और मेहनत से छीनी और हटौड़ी की चोट से एक सुंदर मूर्ति का रूप देता है उसी प्रकार शिक्षक भी हमारे अंदर के बुराइयों को अलग कर हमें एक बेहतर इंसान बनाता है। उपायुक्त सभी छात्राओं को अधिक से अधिक पेड़ लगाने तथा जल सरंक्षण की संदेश भी दिया।
महिला महाविद्यालय पलवल की प्रिंसीपल जसबीर कौर ने सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि एक शिक्षक समाज की समस्याओं के समाधान के लिए एक सागर के समान है, जिससे छात्र जीवन के समस्त समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। हमें अपनी समस्त समस्याओं को अपने शिक्षक से साझा अवश्य करना चाहिए, जिससे कि वह हमें उचित राय दे सके और हमें उस समस्या से निजात मिल सके। शिक्षक समाज के रीढ़ की हड्डी के समान है जो समस्त समाज के आधार का कार्य करता है और जिसके बिना एक बेहतर समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती है और शिक्षक हमें जब कभी डांटे तो हमें नाराज नहीं होना चाहिए क्योंकि उनकी यह डांट हमारे भविष्य को संवारने के लिए होती है जबकि अंदर से वह हमसे उतना ही प्यार करते हैं जितना कि हमारे माता पिता। उनका हमारे प्रति ये सख्त रवय्या हमारे अंदर की बुराइयों को समाप्त करने के लिए होता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी मेहमानों का एक-एक पौधा व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों की भी प्रस्तुती देकर अपने शिक्षकों को सम्मान किया। उपायुक्त डा. एसएस फुलिया द्वारा छात्रओं को सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर शिक्षक मीनाक्षी सहित कालेज के अन्य शिक्षक व छात्राएं मौजूद थी।

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