घर से पढ़ाओ अभियान में गतिविधि आधारित शिक्षण कार्य को अंजाम तक पहुंचाया : डॉ. सोनिका
May 29th, 2020 | Post by :- | 41 Views

हरियाणा लोकहित एक्सप्रेस ब्यूरो चीफ (गौरव शर्मा)
वैश्विक महामारी कोरोना के कारण सम्पूर्ण विश्व में निरंतर विभिन्न परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। ऐसे ही क्रांतिकारी परिवर्तनों से रू – ब – रू हुआ हरियाणा का शिक्षा जगत। लॉक डाउन के दौर में शिक्षा विभाग ने सोशल मीडिया, फोन, एसएमएस, टेलीविज़न, एजूसेट जैसे माध्यमों से विद्यालयों की पढ़ाई को जारी रखा हुआ है। अध्यापकों ओर अभिभावकों के सामने चुनौतियां कम नहीं थी कि इन विकट स्थिति में शिक्षण कार्य को सुचारू रूप से कैसे चलाएं पंरतु जब इंसान ठान ले और कदम बढ़ा ले तो मंज़िल दूर भी नहीं होती। ऐसे ही जज़्बे के साथ लाॅकडाऊन में शिक्षण कार्य को पूरा कर दिखाया अंबाला छावनी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मेन ब्रांच की हिंदी प्राध्यापिका डॉ. सोनिका ने। उन्होंने बताया कि वह वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से वह बच्चों को 2016-17 से ही पढ़ा रही हैं। परन्तु तब बच्चे स्कूल आते थे और गृहकार्य, परीक्षा की तैयारी एवं पाठ्य सहगामी क्रियाओं को छुट्टियों में भी सुचारू संचालन हेतु वॉट्सएप ग्रुप बनाए गए थे। लेकिन लाॅकडाऊन के दौरान शिक्षण कार्य को जारी रखने के लिए जो वाट्स अप ग्रुप बनाए गए वे किसी वरदान से कम साबित नहीं हुए। खास बात यह रही कि विद्यालय बन्द हों और तनावरहित शिक्षा पाठ्य सहगामी क्रियाओं के साथ भी पूर्ववत जारी हो, यह चुनौती भी डॉ. सोनिका और उनके नवम कक्षा से बारहवीं कक्षा के बच्चे पार कर गए। सोनिका ने बताया कि आरंभ में तो अभिभावकों के मन से बच्चों द्वारा फोन के प्रयोग के प्रति नकारात्मक सोच को निकालना ही बड़ा मुश्किल काम था, खास कर बेटियों की शिक्षा के संदर्भ में और एक ही घर में चार बच्चों की पढ़ाई में फोन का लड़ाई की जड़ बनने पर काउंसलिंग व मार्गदर्शन करना भी जरूरी था। स्कूल बन्द हैं तो बच्चों के लापरवाह रवैये को पढ़ाई के लिए ज़िम्मेदारी में बदलना एक चुनौती से कम नहीं था। कोरोना के प्रति जनजागृति के लिए भी समय समय पर डॉ. सोनिका ने फोन कॉल, वॉट्सएप ग्रुप, ब्रॉडकास्ट ग्रुप के जरिए बेहतरीन प्रयास किए। पंरतु बच्चे इस दौरान घर में स्वयं को कैद अनुभव न करें तथा मानसिक तनाव से दूर रहकर शिक्षण कार्य को पूरा करने के लिए उत्साहित रहें इसके लिए गतिविधि आधारित शिक्षण को विद्यालय की तरह ही जारी रखा गया। पढ़ाई के साथ – साथ प्रकृति के सूक्ष्म निरीक्षण, अर्थ -डे, मातृ दिवस, कारोना पर स्लोगन लेखन, कविता लिखना, पोस्टर मेकिंग, नए व्यंजन बनाना सीखना, वेस्ट मटेरियल के रीयूज एक्टिविटीज से सजावटी समान बनाना, कक्षा तत्परता, कैच अप कार्यक्रम, टी. एल. एम. बनाना आदि विविध गतिविधियों ने न केवल बच्चों को व्यस्त रखा बल्कि खुद अपने हाथों से कुछ बनाने का आत्मविश्वास भी पैदा किया। यह सभी कार्य अभिभावकों के चेहरों पर भी मुस्कान दे गए, अभिभावकों से दूरियां कम करने में सहायक भी साबित हुए।

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