ईद नमाज कैसे पढ़ें , इमाम के पीछे इस बार ईद की नमाज अदा नहीं कर सकेंगे
May 23rd, 2020 | Post by :- | 50 Views

नूंह मेवात , ( लियाकत अली )  ।ईद उल फितर का त्यौहार मुसलमानों का सबसे बड़ा पर्व है। ईद उल फितर की नमाज पढ़ने के लिए इस बार ईदगाह तथा मस्जिदों में भीड़भाड़ नहीं मिलेगी। इसके अलावा सभी लोग इमाम के पीछे इस बार ईद की नमाज अदा नहीं कर सकेंगे , क्योंकि भीड़ कहीं कहीं भी नहीं करनी है , ताकि कोरोना का संक्रमण नहीं फैल सके । कुल मिलाकर इस बार उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा दिक्कत है , जो उर्दू , अरबी , हिंदी इत्यादि पढ़े लिखे नहीं हैं । ऐसे लोगों को नियत बांधने से ईद की नमाज अदा करने तक में दिक्कत आ सकती है । हमने ईद उल फितर की नमाज को लेकर बड़ा मदरसा नूह संचालक मुफ्ती जाहिद हुसैन से खास बातचीत की । मुफ्ती जाहिद हुसैन ने कहा कि ईद की नमाज में भीड़ नहीं करनी है । सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखना है । मुफ़्ती जाहिद हुसैन ने कहा कि ईद और जुमे की नमाज में फर्क है । ईद की नमाज मैं खुतबा नमाज के बाद पढ़ा जाता है और खुतबा सुनना फर्ज है । जुमे की नमाज में खुतबा नमाज से पहले पढ़ा जाता है । मुफ्ती जाहिद हुसैन ने कहा कि इस बार जो लोग पार्क , बैठक , अपने घर इत्यादि पर ईद उल फितर की नमाज बिना इमाम अकेले अदा करेंगे । उनको नियत बांधते समय नमाज ईद उल फितर 2 रकात नमाज वाजिब जायज 6 तकबीरों के साथ नियत बांधनी है। उन्होंने कहा कि पहली तकबीर में तीन बार हाथ कानों तक उठाकर वापस छोड़ दिए जाएंगे और फिर रकात पढ़ने के बाद रुकू , सजदा मैं जाया जाएगा । दूसरी रकात में फिर हाथ बांधकर सूरत पढ़ी जाएगी और उसके बाद तीन बार हाथ कानों तक उठाकर छोड़ दिए जाएंगे और तीसरी बार सीधा रुकू में जाना है। उसके बाद आयतल कुर्सी इत्यादि रकात पढ़ने के बाद सलाम करना है । मुफ्ती जाहिद हुसैन ने कहा कि लोगों को नमाज के बाद पूरे विश्व में इस बीमारी से निपटने की दुआ करनी है । इसके अलावा जो लोग तनहाई में , अकेले में नमाज पढ़ रहे हैं । उनको भी दुआ करनी हैं कि अल्लाह इस बीमारी से हमारे इलाके , प्रदेश , देश व पूरी दुनिया को महफूज फ़रमा। कुल मिलाकर दुआओं में बड़ा असर होता है । साथ ही यह भी दुआ करने हैं कि जिन लोगों को कोरोना बीमारी हुई है ।उनको जल्द से जल्द स्वस्थ होकर घर लौटने का मौका मिले तथा जिन लोगों को अभी तक कोरोना बीमारी नहीं हुई है । वह इस बीमारी से पूरी तरह बचे रहें । कुल मिलाकर उन लोगों को भी घबराने की जरूरत नहीं है , जिनको ईद उल फितर इत्यादि की नमाज की नियत तथा सूरत पढ़नी नहीं आती । ऐसे में लोगों को मुफ्ती जाहिद हुसैन की बात पर गौर व फिक्र करने की जरूरत है ताकि साल में एक बार आने वाला मुसलमानों का यह बड़ा पर्व सबके जीवन में खुशियां ला सके।

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