ईद उल फितर के अवसर पर इस बार शॉपिंग में फिजूलखर्ची करने से बचें और गरीबों , यतीमो , बेसहारों की मदद करें
May 23rd, 2020 | Post by :- | 49 Views

नूंह मेवात , ( लियाकत अली )  ।  ईद उल फितर के अवसर पर इस बार शॉपिंग में फिजूलखर्ची करने से बचें और गरीबों , यतीमो , बेसहारों की मदद करें । जान है तो , जहान है । अगर जीवित रहेंगे तो फिर अगले साल ईद आ जाएगी , लेकिन इस बार ईद पर किसी गरीब को परेशान या दुखी ना रहने दें। भले ही वह हिंदू , मुस्लिम , सिख , इसाई किसी भी मजहब से संबंध रखता हो। बड़ा मदरसा नूह संचालक मुफ्ती जाहिद हुसैन ने कहा कि इस्लाम धर्म यही सिखाता है कि गरीबों , बेसहारा यतीमों की मदद करें । फिर चाहे वह इंसान किसी भी धर्म बिरादरी से संबंध रखता हो । मुफ़्ती जाहिद हुसैन ने पत्रकारों से खास बातचीत के दौरान कहा कि कोरोना महामारी से लोग इस बार परेशान हैं । बहुत से लोगों के रोजगार इस बीमारी की वजह से छीन गए हैं । उनके सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है । कपड़े तो हमारे पास पहले भी बहुत हैं , कोई नए कपड़े पहनना जरूरी नहीं है । गरीबों को या उनके बच्चों को ऐसा सामान दे , जिससे उनकी तबियत खुश हो जाए और वह किसी प्रकार से भी दुखी ना रहे। मुफ्ती जाहिद हुसैन ने कहा कि इस बार अन्य बीते ईद के त्यौहार से ज्यादा गरीबों का ख्याल रखने की जरूरत है । खासतौर से उन लोगों की जो रोज कमाते थे और रोज खाते थे । ऐसे लोग बेहद परेशान हैं , लिहाजा ईद की नमाज से पहले ऐसे लोगों की अपने गांव / शहर मौहल्ले में पहचान कर लें और शॉपिंग में फिजूलखर्ची के बजाय उस धनराशि को ऐसे गरीबों के उत्थान में लगाया जाए । इसके अलावा अगर कोई आस पड़ोस या बस्ती में बीमार है और वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा है तो ऐसे बीमारों की भी मदद की जाए ।सोशल मीडिया पर जो इन दिनों नो शॉपिंग का प्रचार चल रहा है । वह बेहद सराहनीय हैं । क्योंकि शॉपिंग करने से कुछ खास हासिल नहीं होता है । अगर गरीबों की मदद रमजान के पवित्र महीने में इंसान करेगा तो उसे बेहद ज्यादा सबाब मिलता है । लिहाजा नो शॉपिंग का जो आजकल मेवात जिले में खासकर युवाओं ने अभियान छेड़ा हुआ है वह सराहनीय हैं और युवा लगातार गरीबों , यतीमों , बेसहारों की मदद किसी न किसी प्रकार से कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर नो शॉपिंग का अभियान जोर पकड़ रहा है। प्रवासी मजदूरों को राशन इत्यादि तथा पका हुआ भोजन काफी लंबे समय से वितरित कर रहे हैं।

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