महिलाओं ने पति की लंबी आयु की कामना करते हुए की वट सावित्री की पूजा और रखा व्रत
May 22nd, 2020 | Post by :- | 49 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी)। हिंदू धर्म में महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए कई व्रत रखती हैं। ऐसे ही व्रतों में से एक है वट सावित्री व्रत। विवाहित महिलाएं इस दिन अपने सुहाग के दीर्घायु होने के लिए व्रत-उपासना करते हुए वट सावित्री की पूजा करती हैं। यह पूजा हर साल ज्येष्ठ माह में अमावस्या के दिन की जाती है। मान्यताओं के अनुसार जो स्त्री इस व्रत को सच्ची निष्ठा से रखती है,उसे न सिर्फ पुण्य की प्राप्ति होती है,बल्कि उसके पति पर आई सभी परेशानिया भी दूर हो जाती हैं। विवाहिताओं द्वारा यह व्रत किया जाता है और पूजा की जाती है परन्तु इस बार वट वृक्ष के पास भीड़ जुटाने की इजाजत नहीं है। शहर के और आसपास के क्षेत्रों में वट सावित्री का पर्व मनाया तो गया लेकिन लॉकडाउन ने नवविवाहिताओं का उत्साह कम कर दिया। वहीं जयसिंहपुरा खोर निवासी अनिता खंडेलवाल ने बताया कि वह हर बर्ष वट सावित्री व्रत करती है लेकिन अबकी बार लॉकडाउन के कारण सब ठप है। मंदिर भी बंद है, इसलिए बरगद के पेड़ के नीचे पूजा संभव नहीं हो पाई। घर पर ही किसी तरह पूजा की। शहर में कई ऐसे स्थान हैं जहां महिलाएं हर साल पूजा के लिए जाती थीं पर ये भी बंद हैं। लॉकडाउन से बाजार मंदा है और घर से निकलना भी मुश्किल। इसलिए इस बार वट सावित्री पूजा छोटे स्तर पर घर में ही की। न तो बांस का बना पंखा और ना ही मिट्टी के बर्तन बाजार में मिले। इसलिए महिलाएं काफी परेशान हुई। खासकर पहली बार व्रत कर रहीं विवाहिताओं के लिए अधिक परेशानी हुई क्योंकि पारंपरिक तरीके से पूजा नहीं हो पाई। इस व्रत में मिट्टी के बर्तन और पंखे का विशेष महत्व है,जो इस समय मिल नहीं पा रहा है। पूर्ण रूप से पूजा की सामग्री और फल भी नहीं मिल पाये।
*वट सावित्री व्रत व पूजा का महत्व:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थी। अतः इस व्रत का महिलाओं के बीच विशेष महत्व बताया जाता है। इस दिन बड़ के पेड़ का पूजन होता है। इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं।
*वट सावित्री व्रत व पूजा की विधि:
इस दिन प्रातःकाल घर की सफाई कर नित्य कर्म आदि से निवृत्त होकर स्नान करने के बाद पवित्र जल का पूरे घर में छिड़काव करतें है,टोकरियों को वट वृक्ष के नीचे ले जाकर, इसके बाद वट सावित्री का पूजन कर,सावित्री और सत्यवान की पूजा करते हुए बड़ की जड़ में पानी देते है। पूजा में जल,मौली,रोली,कच्चा सूत,भिगोया हुआ चना,फूल तथा धूप का प्रयोग करते है।

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