महिलाओं ने पति की लंबी आयु की कामना हेतु की वट सावित्री की पूजाऔर रखा व्रत
May 22nd, 2020 | Post by :- | 239 Views

कोंडागांव/ अमरेश कुमार झा

 

 

विवाहित महिलाएं इस दिन अपने सुहाग की दीर्घायु होने के लिए व्रत-उपासना करती है

 

वट सावित्री व्रत लॉकडाउन से बाजार मंदा है और घर से निकलना भी मुश्किल।

हिंदू धर्म में महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए कई व्रत रखती हैं। ऐसे ही व्रतों में से एक है वट सावित्री व्रत। विवाहित महिलाएं इस दिन अपने सुहाग के दीर्घायु होने के लिए व्रत-उपासना करती हैं। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह में अमावस्या के दिन की जाती है।

मान्यताओं के अनुसार जो स्त्री उस व्रत को सच्ची निष्ठा से रखती है, उसे न सिर्फ पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि उसके पति पर आई सभी परेशानिया भी दूर हो जाती हैं। विवाहिताओं द्वारा यह व्रत मनाया जाता है, परन्तु वट वृक्ष के पास भीड़ जुटाने की इजाजत नहीं है। शहर के और आसपास के क्षेत्रों में वट सावित्री का पर्व मनाया गया। लॉकडाउन ने नवविवाहिताओं का उत्साह कम कर दिया है।

वंही कोंडागांव निवासी रितिका झा बताती हैं की वह हर बर्ष वट सावित्री व्रत करती है लेकिन लॉकडाउन के कारण सब ठप है। मंदिर भी बंद है, इसलिए बरगद के पेड़ के नीचे पूजा संभव नहीं है। घर पर ही किसी तरह पूजा होगी। शहर में कई ऐसे स्थान हैं जहां महिलाएं हर साल पूजा के लिए जाती थीं पर ये भी बंद हैं। लॉकडाउन से बाजार मंदा है और घर से निकलना भी मुश्किल। इसलिए इस बार वट सावित्री पूजा छोटे स्तर पर घर में ही की जाएगी। न तो बांस का बना पंखा और ना ही मिट्टी के बर्तन बाजार में मिल रहे हैं। इसलिए महिलाएं परेशान हैं। खासकर पहली बार व्रत कर रहीं विवाहिताओं के लिए अधिक परेशानी है। क्योंकि पारंपरिक तरीके से पूजा नहीं हो पाएगी। इस व्रत में मिट्टी के बर्तन और पंखे का विशेष महत्व है, जो इस समय मिल नहीं पा रहा है। पूजा की सामग्री और फल भी नहीं मिल पा रहे हैं।

वट सावित्री व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थी। अतः इस व्रत का महिलाओं के बीच विशेष महत्व बताया जाता है। इस दिन वट (बड़, बरगद) का पूजन होता है। इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं।

वट सावित्री व्रत पूजा विधि

इस दिन प्रातःकाल घर की सफाई कर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान कर। इसके बाद पवित्र जल का पूरे घर में छिड़काव करतें है, टोकरियों को वट वृक्ष के नीचे ले जाकर, इसके बाद सावित्री का पूजन कर, सावित्री और सत्यवान की पूजा करते हुए बड़ की जड़ में पानी देते है। पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, फूल तथा धूप का प्रयोग करते है।

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