हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने 2010 में नियुक्त पीटीआई को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा
May 22nd, 2020 | Post by :- | 69 Views

अंबाला , मुलाना ( गुरप्रीत मुल्तानी )

हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ (संबंद्ध सर्वकर्मचारी संघ हरियाणा एवं स्कूल टीचर्ज फैडरेशन अॉफ इंडिया) की खण्ड साहा और खण्ड बराड़ा कार्यकारिणी ने आज खण्ड शिक्षा अधिकारी साहा और खण्ड शिक्षा अधिकारी बराड़ा माननीय राम प्रकाश चौधरी को मुख्यमंत्री हरियाणा के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुये जिला सचिव अशोक कुमार सैनी ने 2010 में नियुक्त 1983 पी.टी.आई. मामले पर विस्तार से बात रखते हुये कहा कि बार-बार अध्यापक संघ व सर्वकर्मचारी संघ द्वारा मांग उठाए जाने पर भी सरकार द्वारा उचित पैरवी न करने के बाद राजनीतिक बदले की भावना से केस कमजोर किया गया। अब भी अध्यापक संघ मांग करता है कि लगभग 68 याचिकाकर्ताओं को खाली पदों पर नियुक्ति देकर सभी को विभाग में रखा जाए। वैसे भी पूरे कोर्ट केस में एक भी नियुक्त टीचर दोषी नहीं पाया गया है। भर्ती एजैंसी दोषी पाई गई है, उसे ही 2000 जे.बी.टी. भर्ती मामले की तरह सजा दी जानी चाहिए। सरकार को अपनी विधायी शक्तियों का प्रयोग करके सभी प्रभावित पी.टी.आई. की सेवा सुरक्षा हर हाल में सुरक्षित रखनी चाहिये।
अध्यापक संघ मांग करता है कि सरकार बड़ी बेंच के समक्ष अपना पक्ष रखें कि भर्ती प्रक्रिया में चयनित अध्यापकों का कोई दोष नहीं है. सरकार व्यापक शिक्षा और बेरोजगारी हित में जो याचिकाकर्ता पी.टी.आई. पद की योग्यता एवं शर्तें पूरी करते हो उन याचिकाकर्ताओं को खाली पड़े पदों पर नौकरी देकर केस का निपटारा करवा सकती है। इस भर्ती के कई पी.टी.आई. अध्यापकों की मृत्यु हो चुकी है और उनके परिवार एक्स ग्रेशिया के तहत अंतिम वेतन का लाभ ले रहें है। इन परिवारों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो जाएगा.

कोविड-19 की महामारी में बिना किसी सुरक्षा साधन के जान जोखिम में डालकर 70-80 हजार शिक्षक देश हित में ड्यूटी कर रहे हैं। दूसरे जिलो में ड्यूटी न लगाकर गृह जिले में काम लेने के लिए सरकार पत्र जारी करती है, वहीं दूसरी तरफ मुकद्दमें बनाती है, इस फैसले की भी कड़ी निंदा की।

अशोक कुमार सैनी ने कहा कि टेलीविजन व विभिन्न चैनलों के माध्यम से पढ़ाई धरातल पर पूर्णत: फेल है। यह केवल कागजों के पेट भरने व चहेतों को खजाना लुटाने की स्कीम है। इससे बेहतर तो जो अध्यापक सोशल मीडिया अर्थात यू ट्यूब व व्हट्सऐप के माध्यम से नि:शुल्क मेहनत कर रहे हैं, उनके प्रयास कुछ सार्थक हैं। वैसे भी शिक्षाविदों अनुसार आनलाइन टीचिंग क्लास रूम का विकल्प नहीं है। शिक्षा तो सामाजिकरण का ही माध्यम व परिणाम है, मशीनीकरण का नहीं। यह लाभ पर आधारित प्राइवेटाइजेशन की खुराक जरूर है, क्योंकि सरकारी स्कूल के बच्चों की पहुंच में महंगे आधारभूत ढांचे नहीं हैं। टी.वी. चैनल पर पढ़ाई के नाम पर शोर मात्र है, पहले तो ये चलते ही नहीं, अगर कहीं-कहीं चलते भी हैं तो सरकारी विज्ञापन मात्र है। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा में कोरोना से समय बर्बाद होने का शोर भी अभी तक इसलिए मायने नहीं रखता क्योंकि पिछले 7-8 वर्ष से अप्रैल-मई-मास में तो विषय वस्तु पढ़ाने पर एल.ई.पी., सी.आर.पी. आदि के नाम पर सरकार ने बैन ही लगा रखा है। जुलाई में कक्षाएं लगाकर ही सिलेबस पूरा किया जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि बैठक मे जिला प्रेस सचिव लाभ सिंह ने कहा कि माननीयशिक्षा मंत्री जी के बयान आ रहे हैं कि गर्मी-सर्दी की छुट्टियां कम कर दी जाएंगी एवं स्कूल समय बढ़ा दिया जाएगा, इसलिए शिक्षा मंत्री से मिलकर ऐसी गैर मनोवैज्ञानिक नीति का विरोध किया जाएगा, क्योंकि गर्मी-सर्दी की छुट्टियां मौसम अनुसार होती है एवं विद्यालय समय बच्चे की सीखने समझने की क्षमतानुसार मनोवैज्ञानिक व शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा तय किए गए हैं। कोविड-19 का प्रभाव अपनी जगह है और बच्चे की क्षमता अपनी जगह है। बच्चा ज्ञान की निर्धारित खुराक का ग्राहक या मशीन नहीं है। उन्होंने कहा कि अध्यापक तो वैसे भी पिछले दो मास से रूटीन में विद्यालय ड्यूटी से अधिक बिना किसी अतिरिक्त परिश्रमिक के कार्य कर रहे हैं। लॉकडाऊन के चलते केवल विभागीय भवन बंद है और अनाज मण्डी, सर्वे, राशन बांटने, गृह कार्य देने, अस्पताल ड्यूटी, शैल्टर होम आदि में ड्यूटी है। अध्यापक संघ का एक सुझाव यह है कि इस सत्र में 20 प्रतिशत सिलेबस कम कर दिया जाए।

जन शिक्षा अधिकार मंच के जिला संयोजक कुलदीप चौहान ने अध्यापक संघ कै अपने कार्यकर्ताओं व समस्त अध्यापक वर्ग को आह्वान करता है अपील की कि स्कूलों में नए दाखिलों के लिए हर वर्ष की तरह नामांकन अभियान चलाएं। इसके लिए आंगनवाड़ी से विद्यालय जाने वाले बच्चों की सूची लेकर, सर्वे करके व सोशल मीडिया पर बच्चों के आधार व फोटो लेकर दाखिला अभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लें।
आप ने सरकार व विभाग द्वारा की गई उत्पीड़न की कार्यवाहियों के बारे बताया कि करोना के समय में ही फिरोजपुर झिरका जिला नूहं में जो अध्यापक बाहरी जिलों से थे वह लॉकडाउन की वजह से सर्वे की ड्यूटी में नहीं पहुंच पाए थे प्रशासन द्वारा उन पर दर्ज की गई एफ.आई.आर. रद्द की जाए । जिला भिवानी निवासी बलवीर सिंह, अतिथि जेबीटी अध्यापक राजकीय प्राथमिक पाठशाला बेगम कोटला गुड़गांव व जिला चरखी दादरी निवासी मुंशी राम राजकीय प्राथमिक पाठशाला भट्टू कला बूथ नंबर 131 दोनों साथी कोरोना के समय ड्यूटी देते वक्त स्वर्ग सिधार गए । अध्यापक संघ मांग करता है कि इन दोनों साथियों को करोना शहीद का दर्जा देकर सरकार द्वारा घोषित 50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए एवं परिवार के एक सदस्य को स्थाई नौकरी दी जाए ।
खण्ड साहा प्रधान ओमप्रकाश व खण्ड बराड़ा सचिव नीरज कुमार ने अतिथि अध्यापकों के 5% प्रतिशत डी.ए. एरियर के तुरंत भुगतान की मांग रखी और घर घर जाकर बच्चों की कापियां चेक करने व हर बच्चे की फीडबैक इकठ्ठे करने का विरोध किया। खण्ड प्रधान बराड़ा मुकेश घारू ने वर्ष 2018-2019 की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट जल्द से जल्द अध्यापकों को देने की मांग खण्ड शिक्षा अधिकारी बराड़ा के समक्ष उठाई।

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