मस्जिद के कोने में दिन – रात अल्लाह की इबादत करता है , एतकाफ का इस्लाम धर्म में बड़ा महत्व
May 21st, 2020 | Post by :- | 101 Views
नूंह मेवात , ( लियाकत अली )  । रमजान के पवित्र महीने में आखिरी असरे में असर की नमाज के बाद शबे कद्र की तलाश में हर मस्जिद या फिर हर बस्ती में एक व्यक्ति मस्जिद के एक कोने में शबे कद्र की तलाश में अल्लाह की इबादत में करीब 10 दिन तक मशगूल हो जाता है । कई बार चांद अगर 1 दिन पहले दिखाई दे जाता है तो 29 में रोजे को ही एतकाफ समाप्त हो जाता है और मस्जिद के एक कोने में दिन – रात एक पर्दे के अंदर बिना किसी से मिले लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए बैठा व्यक्ति उस जगह से बाहर आ जाता है । जब इस बारे में बड़ा मदरसा नूह के संचालक मुफ्ती जाहिद हुसैन से बात की गई तो उन्होंने कहा की बीसवें रोजे के बाद हर मस्जिद / बस्ती में शबे कदर की रात को इबादत करने के लिए एतकाफ में इंसान बैठता है । उन्होंने बताया कि रमजान में 21 , 23 , 25 , 27 , 29 वीं रात को शबे कदर की रात होती है । इस एक रात में इबादत करना 1000 महीने के इबादत करने के बराबर है । कुरान पाक में भी इस बात का जिक्र है ।क्योंकि यह महीना हजार महीनों से बेहतर है । मुफ्ती जाहिद हुसैन ने कहा कि इसमें बैठा हुआ व्यक्ति किसी से नहीं मिलता और ना ही बाहर आता है , वहीं पर चारों तरफ पर्दे लगाकर मस्जिद के कोने में दिन – रात अल्लाह की इबादत करता है । एतकाफ का इस्लाम धर्म में बड़ा महत्व है । एतकाफ में बैठने वाले व्यक्ति को बड़ी हिम्मत से काम लेना होता है क्योंकि 10 दिन तक ना तो वह किसी से मिल सकता है और ना ही अपने घर वगैरह जा सकता है । खास बात या तो 29 वें रोजे को चांद नजर आ जाए या फिर 30 रोजा पूरा होने के बाद वह एतकाफ से उठता है । कोई भी मौसम हो , लेकिन एतकाफ के कायदे कानून उतने ही सख्त हैं । मेवात जिले में ज्यादातर मस्जिदों में या फिर हर बस्ती में एतकाफ में कोई न कोई व्यक्ति जरूर बैठता है ताकि रहमत और बरकत वाले रमजान महीने का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाया जा सके। एतकाफ में बैठे व्यक्ति को खाना / पीना उसी स्थान पर बिना अंदर प्रवेश किये दिया जाता है। एतकाफ में बैठा व्यक्ति किसी से बात तक नही करता। शौच इत्यादि के लिए भी रात के अंधेरे में या फिर अकेले में ही बाहर आ सकता है।
बाइट :- मुफ़्ती जाहिद हुसैन संचालक बड़ा मदरसा नूह

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।