होम आइसोलेशन वाले लोगों की देखभाल नही
May 19th, 2020 | Post by :- | 174 Views
वजीरपुर( महेन्द्र शर्मा ) सरकार द्वारा कोरोना वायरस जैसै संक्रमण से निपटने के लिए गांवों बाहर से आने वाले व्यक्तियों को होम आइसोलेट किया जाता है। क्वारेन्टाइन नहीं।क्वारेन्टाइन की तहसील संयंत्र पर सभी जिलों में व्यवस्था होने के वावजूद वजीरपुर उपखण्ड़ होते हुए भी क्षेत्र में कोई व्यवस्था नहीं है। व्यवस्था नहीं होने से कर्मचारियों का काम भी कम हो गया। वजीरपुर के भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र वजीरपुर में इस महामारी का कंट्रोल रूम बनाया गया , लेकिन सुबह 11बजे तक कार्यालय का ताला तक नहीं खुलने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में सरकारी कर्मचारी कैसा काम कर रहे हैं।क्षेत्र में बाहर से आने वाली लोगों की अब बढ़ने लगी है, लेकिन जांच कर उनको होम आइसोलेट का कागज थमा दिया जाता है । जिससे घर से बाहर निकलने पर भादंसं की धारा 188के तहत कार्रवाई के निर्देश दे रखे हैं, लेकिन होम आइसोलेट हुए व्यक्तियों की किसी कर्मचारी द्वारा जांच के बाद कोई देख भाल नही  होती है। वहीं कोर कमेटी क्षेत्र में सभी ग्राम पंचायत स्तर पर टीम गठित की गई है ,जो केवल नाम की यह गई। इस टीम का कार्य बाहर से आने वाले व्यक्तियों की जानकारी कंट्रोल रूम को देना तथा उसकी जांच कराना होती है, लेकिन कर्मचारियों को पता तक नहीं चलता कि कितने कब आए। कंट्रोल रूम में कम से दो कर्मचारियों को अपनी सेवा देनी चाहिए। वहीं कोर कमेटी के कर्मचारियों को बाहरी लोगों की देखभाल करनी चाहिए। उनकी प्रतिदिवस की रिपोर्ट कंट्रोल रूम को देने की जिम्मेदारी है।
बीमारी कोई लक्षण लगे तो चिकित्सा कर्मचारियों को सूचना देनी चाहिए, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं होने से कर्मचारी अपने परिवार के साथ अधिकांश रूप से घर पर रहते ।  कितने लोगों की जांच हुई इसका रिकार्ड स्वास्थ्य चिकित्सालय में मिलेगा, लेकिन होम आइसोलेट हुए व्यक्ति की कोई देखभाल किसी कर्मचारी द्वारा नहीं होती है। जिससे होम आइसोलेट हुए व्यक्ति अपने परिजनों के द्वारा बनाए गए भोजन को करते हैं। जबकि होम आइसोलेट हुए व्यक्ति की देखरेख कर्मचारियों द्वारा की जानी चाहिए। सरकारी कर्मचारी के द्वारा भोजन की जांच कर होम आइसोलेट को देना चाहिए, लेकिन ऐसा क्षेत्र में देखने को नहीं मिलता है। जिससे पता ही नही चलता कि कौन आइसोलेट हुआ है। केवल कागजों में लोगों को आइसोलेट तो किया गया, लेकिन देखभाल शून्य रहने से बाहर से आने वाले व्यक्तियों से इस महामारी का प्रकोप बढ़ सकता है। अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है।
उपजिलाधिकारी वृजेन्द्र मीणा का कहना है कि क्वरंटाइन वजीरपुर गंगापुर सिटी का गंगापुर सिटी में है। वजीरपुर में नही।
चिकित्साधिकारी आर के मीणा का कहना है कि वजीरपुर में बाहर से आने वाले व्यक्तियों की चौदह दिवस देखभाल करौली जिले में तहसील स्तर पर विद्यालयों में कर रखी है। जिनकी देखभाल अध्यापक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा कर्मचारी जांच करते हैं। उनकी भोजन व्यवस्था सरकारी विद्यालयों में पोषाहार से होती है। अपने जिले में लोगों को होम आइसोलेट किया जाता है।हम उनको निर्देश देते देखभाल का जिम्मा अध्यापकों का होना चाहिए।

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