केंद्र सरकार का राहत पैकेज मजदूर, किसान और मध्यम वर्ग के साथ छलावा: बबलू पंडित
May 19th, 2020 | Post by :- | 177 Views

देश के लिए सबसे बड़ी आफत बन चुकी महामारी कोरोना का सबसे अधिक प्रभाव मजदूर, किसान और आम वर्ग पर पड़ा है। उद्योगों में कामकाज ठप्प होने के कारण सुबह कमाकर शाम को खाने वाले मजदूर वर्ग को अब भूखे मरने की नौबत आ गई है। वहीं छोटे मोटे स्तर पर स्वरोजगार में लगे मजदूरों के आसरे चलने वाले लघु उद्योग भी इस महामारी का शिकार हुए हैं। किसी भी स्थिति में सरकार के आगे हाथ नहीं फैलाने वाले तीनों वर्गों की मौजूदा स्थिति में घोर अपेक्षा की जा रही है। यहां जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में इंटक के प्रदेशाध्यक्ष बबलू पंडित ने केंद्र सरकार द्वारा दिए गए राहत पैकेज को छलावा करार देते हुए तीनों वर्गों हालत पर चिंता जाहिर की है। बबलू पंडित ने कहा कि देश भर में 12 करोड़ से अधिक मजदूर हैं जिन्हें आपदा की इस स्थिति में सीधे तौर पर सहायता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस समय सरकार को मजदूरों और गरीब परिवारों को न्यूनतम 6 हजार रूपये प्रतिमाह सीधे तौर पर उन्हें मुहैया करवाने की आवश्यकता है, जिससे उनका जीवन यापन भी होगा और क्रय शक्ति में इजाफा होने से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
बबलू पंडित ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा औद्योगिक घरानों से ऋण बसूलने की बजाए उन्हें राहत दी जा रही है। इस महामारी के संकट में दो वक्त की रोजी रोटी को मोहताज हो चुके मजदूर वर्गक को निचोडऩे के लिए सरकार ने श्रम कानूनों में बदलाव का जो निर्णय लिया है उसे वापिस लिया जाना चाहिए। बबलू पंडित ने कहा कि मौजूदा राहत पैकेज मजदूर, विकास और मध्यम वर्ग के साथ मात्र एक छलावा है। अगर सरकार ने तीनों वर्गों को सीधे तौर पर सहायता की नीति नहीं बनाई तो यह तीनों वर्ग तबाह हो जाएंगे।

– प्रदेश से कामगारों को पलायन को रोकने के लिए सरकार बनाए कारगर नीति…..
इंटक प्रदेशाध्यक्ष बबलू पंडित ने कहा कि जिस तरह से पूरे प्रदेश और औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन से श्रमिकों का पलायन हो रहा है अगर इसे रोका नहीं गया तो आने वाले समय में संकट पैदा होना तय है। उन्होंने कहा कि मजदूर ही किसी भी औद्योगिक क्षेत्र को चलाने के लिए सबसे अहम कड़ी होते हैं। महामारी के इस संकट के बीच रोजगार न होने, किराये के पैसे चुकता न कर पाने और परिवार के लिए दो वक्त की रोटी की व्यवस्था न होने के कारण श्रमिक प्रदेश से पलायन कर रहे हैं। वहीं घर वापिसी के नाम पर किराए की लूट के चलते कामगार मीलों का सरकार भूखे प्यासे पैदल करने को मजबूर हैं। अगर समय रहते यह पलायन रोका नहीं गया तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।