कोरोना कहर से डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी जूझ रहे, पर उनके लिए अनुकूल माहौल बना रही पुलिस
May 17th, 2020 | Post by :- | 250 Views

जब पूरा देश कोरोना वायरस से उपजी वैश्विक महामारी कोविड-19 से जूझ रहा है तब डॉक्टरों, स्वास्थ्य एवं सफाई कर्मियों के साथ-साथ पुलिस की भी भूमिका अहम हो गई है। समाज की निगाहें पुलिस के कामकाज और उसके तौर-तरीकों पर हैं। इस महामारी ने लोगों को घरों के अंदर बैठा दिया है और उनके पास करने को कुछ खास काम भी नहीं है। इस परिस्थिति में कोरोना के खिलाफ जंग में कौन कितना काम और कैसे कर रहा है, इसे जांचने-परखने के लिए लोगों को समय भी मिल गया है।

प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया तो पहले से ही था, अब सोशल मीडिया की बदौलत जन-जन तक हर जानकारी हाथों-हाथ पहुंच रही है।

कोंडागॉंव की जनता न केवल पुलिस के कामकाज को देख रही है, बल्कि पुलिस के सामने आ रही चुनौतियों का संज्ञान भी ले रही है। वह पुलिस को उन समस्याओं से अवगत कराने का भी काम कर रही है जो जिले में कहीं पर भी सामने आ रही हैं।

मीडिया ने पुलिस तक आम लोगों की पहुंच आसान बनाई :

सोशल मीडिया के इस युग में किसी समस्या को छिपाना संभव भी नहीं।

यदि पुलिस किसी समस्या से अनजान भी होती है तो किसी न किसी के जरिये वह उससे परिचित हो जाती है। दरअसल मीडिया और खासकर सोशल मीडिया ने पुलिस तक आम लोगों की पहुंच बहुत आसान बना दी है। इसे आसान बनाने का काम खुद पुलिस ने भी किया है। वह सोशल मीडिया पर उपलब्ध है और कोई भी उसे अपनी समस्या-शिकायत से अवगत करा सकता है।


लोग हर तरह की सहायता के लिए पुलिस से मांग रहे मदद :

अक्सर पुलिस की आलोचना होती है, लेकिन तमाम आलोचना के बावजूद एक सभ्य समाज संकट की घड़ी में आम तौर पर सबसे पहले उसे ही याद करता है, भले ही उस संकट से निपटना सीधे तौर पर पुलिस के कार्याधिकार में न आता हो। आज ऐसी ही परिस्थिति है। पुलिस लोगों को खाना दवाएं मुहैया कराने के साथ उनकी अन्य जरूरतों को पूरा कर रही है। आज तो लोग हर तरह की सहायता के लिए पुलिस से मदद मांग रहे हैं।

पुलिस के बढ़ते कामकाज को लेकर महकमे में अक्सर माथापच्ची :

संकट की हर घड़ी में पुलिस को याद करना उसके प्रति जनता के भरोसे का परिचायक है। पुलिस के लिए इससे बेहतर स्थिति और क्या हो सकती है कि देश के लोग उसे अपनी सब समस्याओं का समाधान करने वाला समझ रहे हैं। बहुत लोगों ने ऐसी-ऐसी परेशानियों में पुलिस को याद किया है जिनसे परंपरागत तौर पर एक पुलिसकर्मी का कोई वास्ता नहीं होता। आज पुलिस के कार्यक्षेत्र का दायरा बहुत व्यापक हो गया है। पुलिस के बढ़ते कामकाज को लेकर पुलिस महकमे में अक्सर माथापच्ची होती आई है। पुरानी पीढ़ी के कुछ पुलिस अधिकारी पुलिस के कार्यक्षेत्र को परंपरागत रूप से अपराध की रोकथाम और अपराधी को पकड़ने तक ही सीमित रखने के हिमायती हैं। कुछ अधिकारियों को तो पुलिस को सुरक्षा कार्य में लगाए जाने को लेकर भी एतराज रहा है। इसके विपरीत ‘शांति सेवा और न्याय’ के आदर्श को साथ लेकर चलने वाले पुलिस अधिकारियों को पुलिस के बढ़ते कामकाज से कोई गुरेज नहीं है। होना भी नहीं चाहिए।

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आज की तेजी से बदलती परिस्थितियों में पुलिस अपने दायरे को संकुचित नहीं रख सकती। उसे जन कल्याण की भावना से वह सब कुछ करने के लिए सहर्ष तत्पर रहना चाहिए जिसकी अपेक्षा मुसीबत में पड़ा व्यक्ति पुलिस से करता है। हां, फौरी मदद के बाद वह काम संबंधित विभाग के हवाले करने की व्यवस्था बनाना आवश्यक है, अन्यथा पुलिस का अपने असल मकसद से भटक जाने का खतरा पैदा हो जाएगा और उस पर काम का बोझ जरूरत से ज्यादा बढ़ जाएगा। वैसे भी वह काम के बोझ से दबी हुई है।

अनुकूल परिस्थितियों के निर्माण में पुलिसतंत्र की भूमिका :

कोरोना के कहर से बचने के लिए जारी लड़ाई में पुलिस की महती भूमिका ने इस बात को पूरी दुनिया में बड़ी मजबूती से स्थापित कर दिया है कि संकट काल में जनता की पहली पसंद पुलिस ही है। अब जब लोगों की पुलिस से उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं तब पुलिस कर्मियों के सामने एक ओर जहां अपना काम बखूबी निभाने की जिम्मेदारी है वहीं दूसरी ओर जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती भी है। वैसे तो कोरोना के कहर से सीधे तौर पर डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी ही जूझ रहे हैं, लेकिन उनके लिए अनुकूल परिस्थितियों के निर्माण में पुलिसतंत्र की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गई है।

कोंडागॉंव जैसे इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पुलिस सहायता के बिना काम करना लगभग असंभव है। ऐसे में पुलिस के सामने दोहरी चुनौतियां हैं-एक कानून का पालन कराना और दूसरे, असामाजिक तत्वों से निपटते हुए कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए किए जा रहे उपायों में योगदान देना। इस पर भी गौर करने की आवश्यकता है कि जहां स्वास्थ्यकर्मी सेहत के लिए पैदा किसी आपदा से निपटने के लिए प्रशिक्षित होते हैं वहीं पुलिसकर्मी आमतौर पर ऐसे प्रशिक्षण से कम ही गुजरे होते हैं।

बावजूद इसके पुलिस इन विषम परिस्थितियों में अपनी कर्तव्यपरायणता द्वारा दूसरे सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के सामने अपने काम की मिसाल पेश कर रही है। चूंकि देशव्यापी लॉकडाउन को विस्तार दे दिया गया है इसलिए यह तय है कि आने वाले दिनों में पुलिस की भूमिका और भी अधिक महात्वपूर्ण होने वाली है। उम्मीद है कि मौजूदा चुनौतियां पुलिस को और अधिक जिम्मेदार एवं संवेदनशील बनाएंगी तथा उसके मानवीय चेहरे को और चमकाएंगी। यदि कठिन चुनौतियों से जूझती पुलिस आत्मसंतोष के भाव में अपनी पीठ खुद थपथपाए तो इसमें किसी को कोई हर्ज नहीं होना चाहिए।

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