डामर प्लांट के जहरीले धुएं से परेशान हो रहे ग्रामीण, खाना – पीना, सोना हो रहा मुश्किल
May 17th, 2020 | Post by :- | 271 Views

कोंडागांव 17 मई – जिला मुख्यालय से 07 किमी दूर ग्राम मसोरा में बीच बस्ती स्थापित किए गए डामर प्लांट से राहगीरों समेत ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। की ग्राम पंचायत से अनुमति लिए बगैर संचालित किए जा रहे डामर प्लांट से निकलने वाला जहरीला धुंआ लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। ठंड और गर्मी के मौसम में प्लांट के काले धुएं से आसपास काली धुंध बन रही है। इससे लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही है। प्लांट से उठ रहे धुएं के चलते डस्ट आकर पानी व खाना बर्तन कपड़ो पर काला किट जम जाता है, वही गांव वालों ने कई बार प्लांट मैनेजर से इसकी शिकायत भी की है, सड़क का हवाला देकर निर्माण में लगी कंपनी के द्वारा पंचायत के शिकायती पत्र को रद्दी के टोकरी में डाल दिया जाता है।

जिले में अवैध डामर प्लांट धड़ल्ले से संचालित किये जा रहे हैं, डामर प्लांट लगाने से पहले लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है, लेकिन जिले में संचालित प्लांट विभाग के नियमों को भी ताक पर रखकर कार्य कर रहे हैं, प्लांट के लिए संचालकों ने ग्राम पंचायतों से भी अनुमति नहीं ली जिले में आधा दर्जन के करीब डामर प्लांट हैं, जिसमें से कुछ बिना अनुमति के संचालित हो रहे हैं, ऐसे में एक मसोरा पंचायत में मसोरा से गिरोला जाने वाले मार्ग में अवैध डामर प्लांट लगा हुआ है, प्लांट के कारण गांव के आसपास के लोग पूरी तरह से असुरक्षित हो चुके हैं ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडराने लगा है साथ ही पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं क्योंकि इनका कोई मानक स्तर तय नहीं है इसके अलावा प्लांट संचालन के लिए ग्राम पंचायत से भी अनुमति नहीं ली गई है, इसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होती है।

पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदायक

डामर प्लांट के कारण पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है। डामर प्लांट से निकलने वाले धुँए के कारण आसपास के क्षेत्र में रहने वाले के घरों में जैसे अंधेरा छा जाता है, जहरीले धुएं का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। इसकी चपेट में आने से बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। एक तरफ जिला प्रशासन लगातार सुपोषण अभियान चलाकर बच्चों को पोटीन पोषण आहार देकर, महिलाओं और बच्चों को सुपोषित कर रही है, वही डामर प्लांट से निकलने वाले धुएं के कारण कई तरह की बीमारियों के साथ ही कुपोषण भी फैल सकता है।

पक्षियों पर बुरा असर

डामर प्लांट का असर पक्षियों पर ज्यादा देखा जा सकता है, ग्रामीणों की माने तो जिन स्थानों पर प्लांट लगाए गए हैं उनके आसपास स्थानीय पक्षियों की संख्या नगण्य हो चुकी है प्लांट लगने के बाद पक्षियों की गूंज सुनाई नहीं देती प्लांट के आसपास पशु और पक्षी नजर ही नहीं आते।

सभी प्लांट मार्ग किनारे

जिले में जितने भी प्लांट हैं सभी मुख्य मार्ग के किनारे स्थित है इन प्लांटों तक सभी की नजर पहुंचती है लेकिन आज पर्यन्त तक किसी पर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई यह जांच का विषय है।

गांव में मचा हुआ हंगामा

बताया जा रहा है कि प्लांट सुबह 3 बजे से प्रारंभ हो जाता है और रात तक यहां पर काम चलते रहता है। जिला मुख्यालय से मात्र 7 किमी दूर ग्राम मसोरा से गिरोला रोड पर स्थापित डामर प्लांट को लेकर ग्राम पंचायत मसोरा में हंगामा मचा हुआ है। मसोरा के ग्रामीण प्लांट से फैल रहे ध्वनि एवं वायु प्रदूषण का हवाला देते हुए प्लांट को बंद करने की मांग कर रहे है। वहीं ग्राम सरपंच दिनेश मरकाम ने बताया है कि डामर प्लांट के चलते उनके गांव वालों का जीवन खतरे में पड़ गया है। ग्रामीणों ने अतिशीघ्र उक्त डामर प्लांट को बंद कराने की मांग रखी है।

ग्राम पंचायत से कभी भी एनओसी नहीं लिया गया – सरपंच

मसोरा गांव के सरपंच दिनेश मरकाम ने बताया कि गांव में डामर प्लांट लगाया गया है, जिसके लिए ग्राम पंचायत से कभी भी एनओसी नहीं लिया गया है। और गांव में डामर प्लांट लगाने की पंचायत कभी परमीशन नही देगा, ग्रामीणों का कहना है कि डामर प्लांट से निकलने वाले जहरीले धुंए से गांव के लोगो की सेहत में काफी प्रभाव पड़ है, वही लोग बीमार भी हो रहे है। गांव की जनसंख्या करीब 7हजार के आसपास है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग इस डामर प्लांट से प्रभावित होने की बात ग्रामीणों ने कही है। साथ ही इसकी वजह से पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। गौरतलब है कि इस डामर प्लांट को लेकर ग्रामीणों के द्वारा शिकायत की जा चुकी है। इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई जिला प्रशासन ने नहीं किया।

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