गेहूं खरीदने के लिए ब्याज मुक्त ऋण देने का पत्र जारी नही होने से कर्मचारियों में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश :- सुभाष लांबा
May 14th, 2020 | Post by :- | 76 Views

(मुकेश कुमार) पलवल हरियाणा :- सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को गेहूं खरीदने के लिए ब्याज मुक्त ऋण देने का पत्र अभी तक पत्र जारी न करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने सरकार से शीघ्र 25 हजार रुपए एडवांस गेहूं खरीदने के लिए ऋण सभी चतुर्थ श्रेणी के रेगुलर व अनुबंध कर्मचारियों को देने का पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि यह एडवांस गेहूं ऋण लेने के बाद कर्मचारी 10 बराबर किस्तों में वापस भी कर देते हैं।

उन्होंने बताया कि 28 अप्रैल को मुख्यमंत्री के साथ विडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से कर्मचारी संगठनों के साथ हुई बैठक में भी सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने यह मामला मुख्यमंत्री के सामने उठाया था। लेकिन इसके बावजूद सरकार ने हर साल 25 अप्रैल तक जारी होने वाला एडवांस गेहूं ऋण का पत्र अभी तक जारी नहीं हुआ है। जिसके कारण ग्रुप डी के कर्मचारी अभी तक गेहूं नहीं खरीद सके हैं और उनमें सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश है। क्योंकि सरकार उनका महंगाई भत्ता और एलटीसी पर पहले ही रोक लगा चुकी है और अब गेहूं खरीदने के लिए ब्याज फ्री वापस जमा करने वाला लोन देने का फैसला भी अभी तक नहीं किया है।

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा, जिला प्रधान राजेश शर्मा व सचिव योगेश शर्मा ने बताया कि अब किसानों ने अपना लगभग सारा गेहूं मंडियों में बेच दिया है। जिसके कारण अब कर्मचारियों को गेहूं महंगें भाव में मिलेगा। क्योंकि मंडियों से भी गेहूं करीब करीब उठ चुका है।  अब इन कर्मचारियों को महंगे भाव में गेहूं खरीदने पड़ेंगे। जिसके कारण उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा। उन्होंने भाजपा शासित राज्यों द्वारा श्रम कानूनों को निलम्बित करने की भी कड़ी आलोचना करते हुए मज़दूरों को बंधूवा मजदूर बनने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने बताया कि सरकार लाकडाउन का फायदा उठाकर तथाकथित श्रम एवं वित्तीय सुधारों का एजेंडा तेजी से आगे बढा रही हैं।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।