अगर 15 जून से पहले करी धान की रोपाई तो किसानों को देना होगा प्रति एकड 4 हजार रुपये का जुर्माना।
May 12th, 2020 | Post by :- | 24 Views

करनाल, हरियाणा (रजत शर्मा)। उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने कहा कि भू-जल को बचाने के लिए 15 जून से पहले धान की रोपाई पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है, जो किसान सरकार के आदेशों का उल्लघन करेगा तो अधिनियम 2009 के तहत प्रति एकड 4 हजार रुपये जुर्माना लिया जाएगा तथा धान को नष्ठï करने का खर्चा भी किसान से लिया जाएगा। इसके अलावा जिन किसानों द्वारा 15 मई से पहले धान की पनीरी उगाई गई है, ग्राम सचिव, पटवारी व कृषि अधिकारी की संयुक्त टीम द्वारा पुलिस बल के साथ सम्बन्धित गांव में पहुंचकर उसे नष्ठï किया जाएगा।

उपायुक्त निशांत कुमार यादव मंगलवार को कृषि विभाग की ओर से आयोजित बैठक में भू-जल संरक्षण तथा निर्धारित समय अवधि से पहले धान की रोपाई को रोकने के लिए किए गए प्रबंधों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भूमि के अंधाधुंध दोहन से जल स्तर निरंतर नीचे जा रहा है, जिसके कारण कई जिले डार्क जोन में आ चुके है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार द्वारा बरसाती सीजन शुरू होने से पहले यानी 15 जून से पहले धान की रोपाई पर प्रतिबंध लगाया गया है, इसके अलावा 15 मई से पहले पनीरी के उगाने पर भी रोक लगाई गई है।

उपायुक्त ने बैठक में उपस्थित विशेष तौर पर करीब 20 गांव के सरपंच व ग्राम सचिवों से कहा कि आपके गांवों में अकसर लुक-छिप कर 4-5 किसान निर्धारित समय अवधि से पहले धान उगाने का प्रयास करते है, उन पर कडी नजर रखें। उन्होंने सरपंचों व ग्राम सचिवों को निर्देश दिए कि वे गांवों में मुनियादी करवाए कि निर्धारित समय अवधि से पहले धान की पनीरी उगाई व धान की रोपाई पर पूर्णत: प्रतिबंध है, सरकार के नियमों की जहां उल्लघना पाई गई, वहां पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने सरपंचों को मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि लोगों की भलाई के लिए ग्राम पंचायत द्वारा कुछ कडे फैसले भी लेने पडते है वह घबराए नही प्रशासन उनके साथ है।

बैठक में कृषि विभाग के उप-निदेशक डा0 आदित्य प्रताप डबास ने जल बचाओं योजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि मई व जून माह गर्मी का महीना है और इन दिनों में बारिश भी कम होती है, ऐसे में धान की रोपाई पर रोक लगाई गई है, 15 जून के बाद ही धान की रोपाई करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा मक्का की फसल को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रति एकड 7 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है तथा मक्का को खरीदने की व्यवस्था समर्थन मूल्य पर की जाती है। उन्होंने बताया कि धान के उगाने पर प्रति एकड 20 से 25 हजार रुपये प्रति एकड खर्चा आता है जबकि मक्का की काश्त पर 10 से 12 हजार रुपये खर्च होते है यानि मक्का की खेती करने पर प्रति एकड किसान को प्रोत्साहन राशि को मिला कर 20 से 22 हजार रुपये तक की बचत होती है।

उन्होंने बताया कि जो किसान निर्धारित समय अवधि से पहले पनीरी व धान की रोपाई करता है तो विभाग द्वारा पहले सम्बन्धित किसान को नोटिस दिया जाता है अगर किसान नोटिस के बाद धान व पनीरी को स्वयं नष्ठï कर देता है तो उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नही की जाएगी लेकिन प्रशासन द्वारा नष्ठï करवाई जाती है तो सम्बन्धित किसान से खर्चा वसूल करने तथा जुर्माना करने का भी अधिनियम में प्रावधान है।

इस बैठक में जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजबीर खुडिया, जिला राजस्व अधिकारी श्याम लाल, उपमंडल अधिकारी कृषि सुनील बजाड, बीडीपीओ इन्द्री नरेश शर्मा उपस्थित रहें।

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