बेरोजगारों से छीना गया था उनका हक:- हिमाचल प्रदेश प्रशिक्षित वेरोजगार संघ के लीगल एडवाइजर एडवोकेट श्री अवनीश भारद्वाज
May 12th, 2020 | Post by :- | 3674 Views

सरकार की स्टॉप गैप प्रबंध के नाम पर बनाई नीतियों ने प्रदेश के शिक्षकों को बनाया बेरोजगार। हजारों ट्रेंड अध्यापकों को नहीं मिला बैच और  कमीशन देने का मौका। बेरोजगारों से छीना गया था उनका हक।

लोकहित एक्सप्रेस (हिमाचल ):-हिमाचल प्रदेश प्रशिक्षित वेरोजगार संघ के लीगल एडवाइजर एडवोकेट श्री अवनीश भारद्वाज ने प्रेस को दी जानकारी कहा हिमाचल प्रदेश सरकार ने संविधान की धारा 309 के तहत भर्ती नियम वनाए जिनमें यह प्रावधान किया गया कि नियमित शिक्षकों की भर्ती या तो कमिशन से की जाऐगी या वैचवाईज प्रक्रिया के माध्यम से की जाऐगी ताकि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता वनी रहे और प्रदेश के सभी पात्र उमीदवारों को रोजगार के समान अवसर मिल जाऐं/पिछले तीस साल से हजारों की संख्या में विना कम्पीटीशन स्यंवसेवी, विद्या उपास्क, पैट, पैरा, पी. टी.ए, एस. एम. सी शिक्षकों के इलावा आउटसोर्स से लगातार शिक्षकों की भर्ती होती रही l सरकार इन भर्तीयों को करते समय वेरोजगारों को धोखा देने के लिए ऐसी पॉलिसीयां वना रही थी जिनमें यह प्रावधान किया गया था कि जैसे ही नियमित शिक्षक आऐगा अस्थाई शिक्षकों की सेवाऐं अपने आप समाप्त हो जाएंगी/ नियमित शिक्षकों को अस्थाई शिक्षकों के स्थान पर भेजने में दो साल से अधिक समय नहीं लगता/दुर्भाग्य वश कोई भी सरकार 1990 से लेकर 2020 तक लगभग 20000 से अधिक अस्थाई शिक्षकों के स्थान पर एक भी नियमित शिक्षक नहीं भेज पाई/परिणाम स्वरुप वहुत से अस्थाई शिक्षक नियमित शिक्षक वन चुके हैं/ वर्तमान सरकार भी एस. एम. सी भर्ती कर चुकी है/ सरकार का यह दायित्व था कि एस. एम. सी पॉलिसी की कलाज नं 9 के अनूसार इन अस्थाई शिक्षकों के स्थान पर आनलाइन वैचवाईज भर्ती करके नियमित शिक्षक भेजती या कलाज नं 10 के तहत हर वर्ष ताजा सैलैकशन प्रोसैस करती ताकि शर्तों के अनूसार पहले से रखे गए एस. एम. सी शिक्षकों को सेवा विस्तार न मिलता/उल्टा सरकार अपने वनाए नियमों का उलंघन करके अस्थाई शिक्षकों को विस्तार दिलवाने के लिए हाईकोर्ट मे स्टे हटाने के लिए आवेदन करने की तैयारी में है ताकि लम्बी अवधि होने पर यह शिक्षक विना कमिशन नियमित हो जाऐं और वेरोजगारों का जीवन वर्वाद हो जाऐ/ यही नहीं वर्तमान सरकार ने विपक्ष में रहते हुए कुछ साल पहले इन भर्तीयों में रोस्टर पुरा करवाने के लिए विधानसभा से वाकआऊट किया था/ तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह जी ने वैकलाग के माध्यम से इन भर्तीयों में रोस्टर पूरा करने की वात कही थी/ सरकार की दिलचस्पी न तो वैचवाईज भर्ती करवाने में है और न वैकलाग के माध्यम से रोस्टर पूरा करवाने में है/इस पूरे प्रकरण के कारण हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में भारी कमी आई है/ यही कारण है कि आज का कर्मचारी वर्ग, अधिकारी वर्ग और शासक वर्ग अपनी संतान को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना पसंद नहीं करता/ऐसी स्थिती में आम जनता को समान शिक्षा का अधिकार कौन दिलवाऐगा/ प्रदेश का प्रतिभाशाली वेरोजगार युवा सरकार द्वारा वनाए गए भर्ती नियमो तथा समय समय पर स्टाप गैप अरेंजमेंट के नाम पर सरकार द्वारा वनाई गई नीतियों पर विशवास करता रहा जिनकी सरकार ने वेरोजगारों का तथा आम जनता का भविष्य खराब करने के लिए कोई परवाह नहीं की/इसलिए सरकार यदि वेरोजगारों का भला चाहती है तो भर्ती नियमों का कड़ाई से पालन करे/उदाहरण के तौर पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2003-04 के दौरान 724 टी. जी. टी पैरा शिक्षक भर्ती किए/भर्ती नियमों के अनुसार इन 724 टी. जी. टी शिक्षकों में से 362 टी. जी. टी शिक्षक वैचवाईज भर्ती होने थे लेकिन सरकार 2004-08 तक अपने वनाए नियमों के अनुसार 362 टी. जी. टी शिक्षकों की वैचवाईज भर्ती नहीं कर पाई/सरकार को इस वैचवाईज भर्ती के माध्यम से 362 नियमित शिक्षकों को 362 पैरा शिक्षकों के स्थान पर भेजना था/ ऐसा न होने से 1999-2000 वैच के 362 प्रशिक्षित युवा वेरोजगार हो गए/इसी प्रकार वर्ष 2006 से लेकर 2008 तक 1062 टी. जी. टी पी. टी.ए पॉलिसी के तहत भर्ती किए गए/ भर्ती नियमों के अनुसार 1062 टी. जी. टी शिक्षकों की भर्ती में से 531 टी. जी. टी शिक्षिक वैचवाईज भर्ती करने थे/ दुर्भाग्य वश हिमाचल प्रदेश सरकार 2008 से लेकर 2020 तक अपने वनाए भर्ती नियमों के अनुसार 531 टी. जी. टी शिक्षकों की वैचवाईज भर्ती नहीं कर पाई/ परिणाम स्वरूप 2000-2003 वैच के 531 प्रशिक्षित टी. जी. टी सरकार की गलत नीतियों के कारण वेरोजगार हो गए l

अंत में वेरोजगार संघ सरकार से आग्रह करता है कि 12013 पी. पी. पी शिक्षिकों का नियमतिकरण करने से पहले 893 टी. जी. टी शिक्षकों की वैचवाईज भर्ती करे तथा इन भर्तीयों में वैकलाग के माध्यम से रोस्टर पूरा करे ताकि वेरोजगारों के साथ तीन दशक से हो रहे अन्याय की क्षतिपूर्ति हो सके/इसके अतिरिक्त 3636 शिक्षकों की पहले से चल रही भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए/ यदि वेरोजगारों को अव भी न्याय नहीं मिला तो प्रदेश के लाखों वेरोजगार आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाऐंगे जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी/

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