मौत से लडती कोमल की कहानी :-  अजय प्रताप सिंह
May 11th, 2020 | Post by :- | 42 Views

किसी गरीब व बेसहारा का ईलाज पलवल के सरकारी अस्पताल में करवाना है तो आपके पास तगडी सिफरिश होनी जरूरी है, यहां ईलाज कम दुत्कार ज्यादा मिलती है|

हसनपुर पलवल (मुकेश वशिष्ट) :- कडी मेहनत के बाद आखिरकार सरकारी अस्पताल में कोमल का एडमिशन हो ही गया। कोमल के एडमिशन से ये साफ हो गया है कि अगर कोई बेहद गरीब इंसान सरकारी अस्पताल में ईलाज करवाने चला जाए तो ईलाज से पहले ही वो मर लेगा। हम आपको बता दे हिन्दूस्तान स्काऊटस एंड गाइड नामक संस्था सचिव रिसाल सिंह व उनकी टीम हाऊसिंग बोर्ड कालोनी पलवल में जब सूखा राशन बांट रहे थे तो उनकी मुलाकाम एक ऐसे मां बेटी से हुई जो मौत को गले लगाने की पूरी तैयारी कर चुकी थी।

फर्श पर बेटी बेसुध पडी थी और मां की आंखो से आंसू बह रहे थे। इनमें मां पूजा व बेटी कोमल पिछे से झारखंड के है जो यहां मजदूरी करने आए थे। लोकडाऊन के कारण घर में कैद हो गए। पिछले चार पांच दिन से खाने को कुछ नही मिला था इसलिए दोनो ने भूखे ही मौत को गले लगाने की सोच रखी थी परन्तु हिन्दुस्तान स्काऊटस गाइड की टीम भगवान बनकर इनके बीच आ गई। बेटी की नाजुक हालत को देखते हुए उसे सरकारी अस्पताल लाया गया।

जहां डाक्टरो ने कोई रिस्पोंस नही दिया और लडकी को दाखिल करने से मना कर दिया। इसके बाद सीएमओ के दखल के बाद दाखिल किया गया। जांच के बाद पता चला कि इसके शरीर में मात्र तीन ग्राम खून है और एचबी 2.5 है। एक बोतल खून चढाकर अगले दिन डाक्टरो ने इन मां बेटी को अस्पताल से निकाल दिया और ये घर आ गए। इस बारे जब हमने सीएमओ से बात की तो उन्होने सोमवार को दोनो को अस्पताल लाने को कहा। आज दोनो मां बेटी ठीक समय पर अस्पताल पहुंच गई। पिछे पिछे हम भी अस्पताल पहुंच गए।

अस्पताल में सबसे पहले हम सीएमओ डा. ब्रहमदीप से मिले और उन्हे मां बेटी के बारे में बताया और कहा कि आप उस डाक्टर से हमारे सामने पूछे कि किस अधिकार से उन्होने इन मां बेटी को अस्पताल से बिना समरी दिए बाहर निकाल दिया। सीएमओ ने आश्वासन दिया कि वे इसकी खुद जांच करेगे ऐसा नही होना चाहिए था। इसके बाद खुद सीएमओ ने कोमल की जांच की और पाया कि स्थिति गंभीर है इसे तीन चार दिन अस्पताल में ही रखना पडेगा। अब ये बेटी हमारी जिम्मेदारी है हम इसे ठीक करके ही यहां से भेजेगे। इसके बाद कोमल का एडमिट कार्ड बनाया गया और उन्हे महिला वार्ड में रखा गया।

जहां केवल महिलाए ही जा सकती थी इसलिए हम आगे नही जा सके। हमे लेडी डाक्टर ने कहा कि आप जाइये हम संभाल लेगे। वहां कोमल की मां पूजा ने एक नया खुलासा किया कि उससे मैडिकल टेस्ट के नाम पर 1100 रूपए मांगे गए जो गैर कानूनी है। हमने इसकी शिकायत डाक्टर से की उसकी भी जांच हम करवाएंगे कि टेस्ट के नाम पर गरीब बेसहारा महिलाओ से 1100 रूपए मांगे गए। करीब दो घंटे बाद महिला वार्ड से मां पूजा का फोन आया और उसने बताया कि आपके जाने के बाद यहां हमारी कोई सुध नही ले रहा और हमे ऐसे कमरे में बिठा दिया गया जहां पंखा भी नही है।

इसके बाद हिन्दुस्तान स्काऊटस गाइड की टीम अस्पताल पहुंची और वहां फिर से मोर्चा खोलना पडा। इधर हमने व्हटसएप पर प्राइवेट अस्पताल वालो को मैसेज भेजा कि पलवल का कोई ऐसा प्राइवेट अस्पताल है जो इन मां बेटी को निस्वार्थ निशुल्क ईलाज कर सके। हमे किसी की कोई रिप्लाई नही आई। कुछ देर बाद गुरूनानक अस्पताल से डा. अनूप सिंह का संदेश हमें मिला कि सरकारी अस्पताल वाले अगर ईलाज न करे तो इन्हे गुरूनानक अस्पताल भेज दो हम निशुल्क पूरा ईलाज करने को तैयार है।

हमने दिल से डा. अनूप सिंह का शुक्रिया अदा किया। इतने में सरकारी अस्पताल के सीएमओ ने खुद इस केस में हस्तक्षेप किया और कोमल को महिला वार्ड में पंखे वाला कमरे में शिफ्ट किया गया। अभी फिलहाल कोमल सरकारी अस्पताल में उपचाराधीन है और हम सब उसके ईलाज पर नजर रखे हुए है। आप सभी भी ईश्वर से प्रार्थना करे कि कोमल बच जाए और ठीक हो जाए। हम हिन्दुस्तान स्काऊटस गाईड के जिला सचिव रिसाल सिंह व उनकी टीम का , गुरूनानक अस्पताल के डा. अनूप सिंह जी का , सीएमओ डा. ब्रहमदीप जी का और रोटरी क्लब पलवल संस्कार का दिल से शुक्रिया अदा करते है जो इस बच्ची के लिए आगे आए।

 

 

 

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।