गरीबी किसी अभिशाप से कम नही, झारखंड की एक लडकी को गरीबी के कारण मिली दुत्कार|
May 11th, 2020 | Post by :- | 185 Views

कोरोना से लडने वाले सरकारी अस्पताल के डाक्टरो ने लडकी के साथ नही किया इंसाफ,

हसनपुर पलवल (मुकेश वशिष्ट) :- गरीबी भी एक प्रकार का श्राप ही है भगवान किसी को ऐसी गरीबी न दिखाए जैसी आज हमने पलवल में एक परिवार की देखी है।

हिन्दूस्तान स्काऊटस एंड गाइड नामक संस्था पिछले 40 दिन से गरीबो व जरूरतमंदो के घर राशन देने का काम कर रही है। ऐसे ही राशन देते देते संस्था के सचिव रिसाल सिंह व उनकी टीम हाऊसिंग बोर्ड कालोनी पलवल में जा पहुंचे जहां उन्हे एक कमरे में मां बेटी मिले।

मां एक कोने में रो रही थी और बेटी फर्श पर मरने जैसी हालत में लेटी हुई थी। बेटी की नाजुक हालत देखकर संस्था के सदस्य उसे तुरंत सरकारी अस्पताल लेकर गए जहां डाक्टरो ने उसकी हालत देखकर भी एडमिट करने से इंकार कर दिया ओर कहां कि हमारे पास आईसीयू नही है और इसकी हालत खराब है।

अगर इसे कुछ हो गया तो जवाब कौन देगा। दर्जनो प्रशनो में डाक्टरो ने उलझा दिया। इस प्रकार डाक्टरो ने अपना पल्ला झाडने का पूरा प्रयास किया। संस्था के लोगों ने सीएमओ डा. ब्रहमदीप से मदद मांगी और कहा सर इंसानियत के नाते इस बच्ची को बचाने का आप पूरा प्रयास करे।

जीवन मरण ऊपर वाले के हाथ है पर हम कोशिश भी न करे ये तो गलत है। सीएमओ के अंदर इंसानियत जागी और लडकी को दाखिल किया गया। जांच के बाद पता चला कि इसके शरीर में मात्र तीन ग्राम खून है और एचबी 2.5 है। उसी समय ब्लड बैंक से रक्त लिया गया और लडकी को चढाया गया। ये घटना शनिवार की है।

आज रविवार को सरकारी अस्पताल से लडकी को डाक्टरो ने घर भेज दिया , अमूमन अगर किसी को अस्पताल से छुटटी दी जाती है तो उसे डाक्टर पर्चा बनाकर देते है जिसमें घर पर मरीज को क्या करना है कैसे रहना है क्या दवाइया लेनी है आदि बताई जाती है परन्तु इस लडकी को बिना किसी पर्चे के ही घर भेज दिया।

जिस समय लडकी को दाखिल किया गया था उस समय खुद डाक्टरो ने कहा था कि इसको कम से कम से चार से पांच बोतल खून की चढेगी पर लडकी ने खुद बताया कि उसे केवल एक बोतल खून की चढी है।

कोरोना को लेकर डाक्टरो की जो छवि हमारे मन में बनी थी आज सरकारी अस्पताल के डाक्टरो ने वो छवि धूमिल कर दी है। इसके बाद हमने सीएमओ डा. ब्रहमदीप से सवाल किया कि कैसे बिना ईलाज पूरा किए लडकी को डिस्चार्ज कर दिया गया तो उन्होने जवाब दिया कि उनके नोटिस में नही है लडकी को कब डिस्चार्ज कर दिया गया। उसे तो कम से कम 6 से 7 बोतल खून की चढनी है।

हमने उनसे पूछा कि नागरिक अस्पताल में ऐसी घटनाए घट जाती है और आपको पता ही नही चलता। कल को लडकी को अगर कुछ हो जाता तो कौन जिम्मेदार होता।

इस पर सीएमओ शर्मिन्दा हुए और हमें आश्वासन दिया कि कल सोमवार को लडकी को लेकर अस्पताल आए मै खुद उसकी पूरी देखभाल करूंगा और जब तक पूरा ट्रीटमेंट नही हो जाता तब तक मै खुद निगरानी रखूंगा।

लडकी का नाम कोमल है उम्र 14 वर्ष है और सरकारी स्कूल न. 4 में आठवी कक्षा में पढती है। पिछले चार दिन से इनके घर खाना नही बना है। कोमल से जब पूछा गया तो उसने बताया कि मम्मी रोजाना गरीबी पर रोती रहती है इसलिए मै मरना चाहती हूं ताकि मै अपनी मां को अपने बोझ से मुक्त कर सकू।

कोमल की मां पूजा बल्लभगढ में किसी कंपनी में लगी हुई है। एक बेटा है जो इन मां बेटी से दूर रहता है। पीछे से पूजा व कोमल झारखंड के रहने वाले है। हिन्दुस्तान स्काऊटस गाइड के सचिव रिसाल सिंह ने उनके घर राशन भिजवा दिया है और दोनो मां बेटी को मास्क बनाने का काम भी दिलवा दिया है ताकि दोनो को कुछ पैसे मिल सके। रोटरी क्लब संस्कार की अध्यक्षा डा. अंजलि जैन ने इस परिवार को एक सिलाई मशीन देने का निर्णय लिया है।

 

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।