विनय का मूल आधार: उत्तम मार्दव धर्म – मुनि विश्वास सागर
September 4th, 2019 | Post by :- | 136 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । शहर मानसरोवर स्थित वरुण पथ दिगम्बर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन “उत्तम मार्दव धर्म”मनाया गया। इस अवसर पर मुनि विश्वास सागर और मुनि विभंजन सागर महाराज ससंघ सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रधुम्न शास्त्री के निर्देशन में मूलनायक महावीर भगवान के स्वर्ण कलशों से कलशाभिषेक एवं रजत कलश से भव्य वृहद शांतिधारा सम्पन्न की गई। जिसके पश्चात् आचार्य विद्या सागर सभागार में पांडुकशिला पर विराजमान श्रीजी के पांच इन्द्रों ने कलशाभिषेक किया साथ ही सोधर्म इंद्र गिरीश सीमा जैन परिवार द्वारा प्रथम कलशाभिषेक एवं श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जिसके बाद गीत-संगीत भजन भक्ति नृत्य के साथ कर्मो की निर्जरा की प्रार्थना करते हुए श्रीजी की भक्ति के रस में सरोबर होकर अष्ट द्रव्यों से जिनेन्द्र आराधना की गई। बुधवार को दस धर्म के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म और महावीर विधान पूजन का आयोजन किया गया। पूजन के बीच मे धर्म सभा का भी आयोजन किया गया। मुनि विश्वास सागर महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि “मृदो: भाव: कर्म पा मार्दव इति निस्कते। अर्थात मानसिक कोमलता का नाम मार्दव है और कोमलता और व्यवहार में नम्रता होना मार्दव धर्म है। मार्दव धर्म में सिद्धि के लिए जाति कुलादि के मद का त्याग करना आवश्यक होता है। ज्ञान, पूजा, कुल, जाति, बल, रिद्धि, पत शरीर इन आठ वस्तुओ का अभिमान नहीं करना मार्दव है। समस्त मानव प्राणी के मन में यह भाव रहता है। कि लोग मुझे अच्छा भला इंसान कहे और मेरा सम्मान करे। मेरी हर वास्तु की प्रशंसा करे,मेरे पास जो ज्ञान,कला,वैभव है। वह किसी और के पास तो हो नहीं सकती। इस तरह के भाव मान कषाय के कारण आते है। अर्थात व्यक्ति कभी खुद नहीं झुकता, दुसरो से चेष्टा करता है। ” मृदुता का भाव ही उत्तम मार्दव धर्म है। मान का नाश करता है मार्दव धर्म, विनय भाव सिखलाता है मार्दव धर्म ज्ञान की योग्यता बढ़ाता है मार्दव धर्म। भगवान के आगे ढुरने वाले चॅवर भी हमे ज्ञान की बात सिखाते है। वो कहते है – हम झुकते है ऊपर उठते है अर्थात जो जितना झुकेगा वो उतना ऊपर उठेगा। अधिकांशतया हमारा प्रयास दूसरों को झुकाने में लगा रहता है अगर हम थोड़ा सा झुक जाए तो सामने वाला पुरा ही झुक जाएगा किन्तु-” झुकता तो वही है जिसमे जान होती है वरना अकड़ तो मुर्दे की पहचान होती है। रावण की मान कषाय ने ही उसके प्राणों का वियोग करवाया। गुरु के चरणों में अगर रहकर शिष्य ज्ञान प्राप्त करे तो हो सकता है। लेकिन अगर वही शिष्य गुरु के सिर पर खड़ा होकर ज्ञान प्राप्त करना चाहे तो नहीं प्राप्त कर सकता है। रावण के अंतिम समय में राम ने लक्ष्मण से कहाँ जाओ रावण से कुछ सीख कर आओ तब रावण ने उसे एक ही सन्देश दिया कभी मान कषाय नहीं करना और विनय ही ज्ञान का मूल साधन है अतः मान छोड़ कर मार्दव धर्म को धारण करना चाहिए।
जो जीवन को सरल बनाये एवं मायाचारी से बचाए वह” उत्तम आर्जव धर्म“–मुनि विभंजन सागर
मुनि विभंजन सागर महाराज ने दशलक्षण पर्व के तीसरे धर्म उत्तम,आर्जव धर्म का महत्व बताते हुए कहा की “हम आज तक मायाचारी से ठगते आये है,माया ठगनी न ठगी,ठगया सारा संसार। जिसने माया को ठगा उनकी जय जयकार जो उस मायाचारी की पोल खोल दे माया को ठग दे वह गुरु होता है और जो मायाचारी में फँस जाए वह भेद होता है।ठगना नही हमारे जीवन में कितनी मायाचारी है। हमारी प्रत्येक क्रिया मायाचार से युक्त वह व्यक्ति कभी भी अपने जीवन में सफल नही हो सकता है क्योकि जो मायाचारी होता है उस व्यक्ति का कोई सम्मान नही करता। उत्तम आर्जव धर्म हमे यह शिक्षा देता है कि छल- कपट को छोड़ दो। अपने जीवन में सरल सहज बनाओ तभी तुम्हारा कल्याण संभव है।
प्रचार संयोजक अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया की बुधवार को दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर्व श्रद्धाभक्ति के साथ मनाया गया। सांध्यकालीन सायं:6.30 बजे मुलनायक भगवान महावीर स्वामी की महामंगल आरती की गई एवं साथ ही मुनि संघ की आरती भी की गई जिसको करने को सोभाग्य समिति अध्यक्ष एमपी जैन एवं संतोष कासलीवाल परिवार को प्राप्त हुआ। आरती से पूर्व संतोष कासलीवाल परिवार एवं समाज के गणमान्य श्रेष्ठियों के साथ आरती के थाल सजाकर बेंड-बाजों और जयकारों के साथ भव्य शोभायत्रा के माध्यम से रजत पथ,किरण पथ,बड़ा बाज़ार होते हुए वरुण पथ पहुंचे जहाँ पर श्रेष्ठीगणों ने श्रीजी की मंगल आरती करने का पुण्यार्जन प्राप्त किया। जिसके उपरांत सांध्यकालीन सत्र में सायं 7.15 बजे से प्रतिष्ठाचार्य प्रधुम्न शास्त्री द्वारा उत्तम मार्दव धर्म पर शास्त्र प्रवचन संपन्न प्रारम्भ हुए और रात्रि 8.15 बजे से वरुण पथ महिला मंडल द्वारा धार्मिक हाऊजी का भव्य आयोजन किया गया। अध्यक्ष रजनी लुहाड़िया और मंत्री हिमानी जैन सहित शालिनी बाकलीवाल के संयोजन में आयोजित हाऊजी प्रतियोगिता में वरुण पथ दिगम्बर जैन समाज के 300 से अधिक परिवारों ने कार्यक्रम में भाग लिया। प्रतियोगिता में 25 से अधिक पुरुस्कार सहित विभिन्न पुरुस्कार वितरित किये गये। गुरुवार को तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म मनाया जायेगा। गुरुवार को उत्तम आर्जव पूजन सहित णमोकार विधान पूजन का आयोजन होगा।

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