पुरोहितों को सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए कर्मकांड करने की छूट दी जाए : पं,जयशंकर जोशी
May 8th, 2020 | Post by :- | 113 Views

चंडीगढ़( मनोज शर्मा) देव भूमि कुमाऊँ ट्रस्ट के संस्थापक पं,जयशंकर जोशी ने कहा कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिए सरकार की तरफ से जनता कर्फ्यू के साथ ही सभी धर्मस्थल बंद किए गए थे इसके बाद लॉकडाउन शुरू हो गया।

            तभी से धर्मनगरी में स्थिति सभी मंदिर और धार्मिक स्थल बंद हैं अब तीर्थों पर सन्नाटा पसरा है तीर्थ पुरोहित भी लॉकडाउन की वजह से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं लॉकडाउन के तीसरे चरण में भी सरकार धार्मिक स्थलों को बंद रखने का ऐलान कर चुकी है वहीं पर्यटन गतिविधियां भी बंद रहेंगी।
पं,जयशंकर जोशी का कहना है कि  पुरोहितों के परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गयाहै सरकार से मांग की है कि धर्मस्थलों को खोलने की अनुमति दी जाए मंदिरों व तीर्थ स्थलों और पुरोहितों को सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए कर्मकांड करने की छूट दी जाए ,धार्मिक स्थलों को खोला जाए लोग मृतकों कि आत्मा की शांति के लिए कर्मकांड व पिंडदान करवाने के लिये तीर्थों मैं जाते हैं, लेकिन लॉकडाउन के कारण यह कार्य बंद है इससे पुरोहितों का काम ठप है उन की आर्थिक हालत खस्ता हो गई है।
मंदिर भी खोलने जरूरी  है पिंडदान व कर्मकांड करवाने के बाद मंदिर में पूजा अर्चना करने की परम्परा है।
लॉकडाउन में शराब की दुकानें खोले जाने के बाद अब मंदिरों को भी आम श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने की मांग की है सरकार ने शराब की दुकानें खोली हैं तो आखिर देवालयों के दरवाजे श्रद्धालुओं के लिए अब तक क्यों बंद रखे गए हैं।
देवभूमि कुमाऊँ ट्रस्ट के संस्थापक ने कहा है कि कोरोना को लेकर पिछले डेढ़ माह से लॉकडाउन है और लगभग दो माह से मंदिरों के कपाट बंद हैं। ऐसे में मंदिरों में पुजारियों और अन्य कर्मचारियों को वेतन मिलने मैं कठिनाई हो सकती है जब राजस्व के लिए सरकार शराब की दुकानें खोले जाने की अनुमति दे सकती है, तो उसे दूसरी दुकानें और मंदिरों को भी खोले जाने की अनुमति दे देनी चाहिए जिससे लोगों की रोजी-रोटी भी चलती रहे।
हमे विश्वास है कि सभी श्रद्धालुओं व भक्तगण मन्दिर के पुजारी सभी नियमों और प्रोटोकॉल का भी पालन करेंगे उन्होंने कहा है कि मंदिर खुलने से लोग यदि मंदिर में दर्शनों को जाएंगे तो अपने आराध्य से कोरोना को खत्म करने की प्रार्थना भी करेंगे उन्होंने कहा है कि सनातन परम्परा में लोगों का ऐसा विश्वास है कि वे आराधना करेंगे तो उनके कष्ट दूर होंगे। लेकिन मंदिर बंद होने से लोग अपने आराध्य से प्रार्थना भी नहीं कर पा रहे हैं।
सरकार को मंदिर खोलने पर जल्द विचार करना चाहिए और मठ मंदिरों के प्रबंधकों और पुजारियों की भी जिम्मेदारी होगी कि मंदिर खुलने पर वे सोशल डिस्टेंसिंग का श्रद्धालुओं से सख्ती से पालन कराएं।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।