मुख्यमंत्री गहलोत ने वीसी के जरिए शिक्षा विभाग से संबंधित लिए महत्वपूर्ण निर्णय
May 8th, 2020 | Post by :- | 44 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । कोरोना वैश्विक महामारी के संदर्भ में लॉकडाउन के कारण कोई अभिभावक आर्थिक स्थिति के चलते यदि फीस जमा नहीं करा पाता है तो निजी स्कूल ऐसे विद्यार्थी का नाम नहीं काटे यदि कोई स्कूल ऐसा करता है तो राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि उस विद्यालय की मान्यता को निरस्त किया जा सकता है। शिक्षा विभाग इस बात का भी परीक्षण कराएगा की निजी स्कूल विद्यार्थियों को फीस एवं अन्य शुल्क में किसी प्रकार से राहत दे सकते हैं जिससे कि उन विद्यालयों का संचालन भी प्रभावित नहीं हो। मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने निवास पर वीडियो कांफ्रेंस के जरिए स्कूल शिक्षा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा से जुड़े विषयों पर समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह कोरोना महामारी मानवता के समक्ष ऐसा संकट है जिसका हम सभी को मिलकर सामना करना है ऐसे वक्त में एक दूसरे का ध्यान रखकर हम मुश्किल वक्त का मुकाबला कर सकते हैं। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं एवं 12वीं कक्षाओं की शेष परीक्षाएं फिलहाल स्थगित रहेंगी कोरोना महामारी से निपटने के बाद में सीबीएसई द्वारा लिए जाने वाले निर्णय के अनुरूप फैसला किया जाएगा ताकि दोनों बोर्ड की परीक्षाओं में एकरूपता बनी रहे और प्रदेश के विद्यार्थियों का भी अहित न हो इसी प्रकार उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में भी सभी परीक्षाओं का आयोजन स्थितियां सामान्य होने पर करवाया जा सकेगा। शिक्षा विभाग ग्रीष्मावकाश में बच्चों को मिड डे मील के लिए उचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें यदि बच्चों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना संभव नहीं है तो ऐसे अभिभावकों को सुखी राशन सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। लिपिक ग्रेड भर्ती परीक्षा 2018 के अभ्यर्थियों को जिला एवं विभागों का आवंटन दोबारा नई प्रक्रिया से करने के निर्देश दिए। जिससे सभी विभागों को मेरिट के आधार पर उनकी आवश्यकता के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों की सूची उपलब्ध कराएं उसके बाद संबंधित विभाग मेरिट एवं काउंसलिंग के आधार पर उन्हें जिला आवंटित करें इस वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि भविष्य में सभी भर्तियों में प्रथम नियुक्ति सभी विभागों द्वारा मेरिट एवं काउंसलिंग के आधार पर ही दी जाए। यूपीए सरकार के समय शिक्षा का अधिकार अधिनियम लाकर गरीबों को निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने का ऐतिहासिक कदम उठाया गया था। विगत कुछ वर्षों में इस कानून की भावना के अनुरूप जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पाया।सभी अधिकारियों भी को निर्देश दिए गए है कि इस कानून की पारदर्शिता के साथ पालना सुनिश्चित करवाई जाए इसके लिए अभिभावकों की आय सीमा को एक लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रुपए किया जाए। मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया गया है कि आरटीआई के जरिए बच्चों को बड़े नामी निजी स्कूलों में भी पढ़ने का सुअवसर मिले। गत सरकार के समय एकीकरण के नाम पर बड़ी संख्या में स्कूल बंद कर दिए गए थे ऐसे विद्यालयों के अनुपयोगी पड़े भवनों का उपयोग विद्यालयों को पुनः खोलने के साथ-साथ जरूरत होने पर पंचायत उपकेंद्र तथा सामुदायिक केंद्रों के रूप में भी किया जा सकता है। प्रदेश में जिन विद्यालयों के भवनों का निर्माण नहीं हुआ है उनके लिए भी योजना बना कर दी जाए ताकि राज्य सरकार विभिन्न माध्यमों से इनके भवनों का निर्माण करवाने पर कार्रवाई कर सकें।

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