सड़कों पर भटकती गौ माता को आश्रय देगी हरियाणा सरकार।
May 8th, 2020 | Post by :- | 52 Views

करनाल, हरियाणा (रजत शर्मा)। सड़कों पर भटकते गौवंश को अब गौशालाओं में आश्रय देने के लिए हरियाणा सरकार ने एक नई व्यवस्था बनाकर संवेदनशीलता दिखाई है। गौरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को सभी जिलों के उपायुक्तों के साथ विडियो कॉन्फ्रैंसिंग के जरिए विस्तृत रूप से चर्चा की ।

इसकी जानकारी देते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार की ओर से करीब 50 करोड़ रूपये का प्रावधान किया जा रहा है, यह राशि गौशालाओं को प्रोत्साहन देने जैसे कार्यों पर खर्च होगी। गौरक्षा से जुड़ी व्यवस्था पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि बेसहारा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है और सड़कों पर भटकते गौवंश को चारा भी नहीं मिलता तथा दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं।

सरकार ने पूर्व में गौ सेवा आयोग बनाकर शहर और गांव में उपलब्ध गौशालाओं के जरिए गौवंश की रक्षा के प्रयोग किए, जो काफी सफल भी रहे। अब नई योजना बनाकर इसे सिरे चढ़ाया जा रहा है, जिसमें सरकार की बजाए गौशालाओं के माध्यम से पशुधन विशेषकर गौवंश की रक्षा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में करीब 600 गौशालांए हैं, जिसमें उपयोगी यानि दुध देने वाली गाय व दूध ना देने वाले अनुपयोगी पशु बाहर घूमते दिखाई देते हैं, अब इनकी गिनती की जाएगी। सभी गौशालाओं का रजिस्टे्रशन किया जाएगा, चाहे वे सरकारी लाभ ले रही हैं या नहीं। यह कार्य पशुपालन विभाग की ओर से किया जाएगा, जो अब तक गौ सेवा आयोग करता था।

इसके लिए प्रत्येक खण्ड में एक कमेटी गठित की जाएगी। रजिस्ट्रेशन के लिए ग्रामीण क्षेत्रो में ब्लॉक स्तरीय तथा शहरी क्षेत्रो में अर्बन लेवल पर कमेटियां गठित की जाएंगी। गठित कमेटियों का नाम पशुधन सर्वेक्षण समिति रहेगा ओर इसका मुख्य कार्य बेसहारा पशुओं की सेवा करने का होगा। इस व्यवस्था में पशुपालन विभाग के वेटनरी सर्जन इंचार्ज होंगे।

कमेटी में कौन-कौन लोग शामिल होंगे, इस बारे मुख्यमंत्री ने बताया कि गौसेवा दल के लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, गौशालाओं को चलाने वाले प्रमुख व्यक्ति, स्वयं सेवक तथा जनता के लोग शामिल किए जाएंगे। मार्गदर्शन जिला व प्रदेश स्तर पर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सबसे पहला काम पशुओं का सर्वेक्षण करना होगा, जिसमें गौशाला में उपयोगी व अनुपयोगी पशुओं की संख्या काउंट की होगी। गौशाला के नाम कितनी जमीन है और यदि उसे विस्तार करने की जरूरत है, तो वह भी किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि सभी गौधन चाहे वह गौशाला में है या सड़कों पर भटक रहे हैं या घरों में हैं, सबकी टैगिंग होगी। दूध देने वाली गायों को हरा टैग तथा अनुपयोगी यानि दूध ना देने वाली गायों को पीले रंग का टैग लगाया जाएगा। यदि उपयोगी पशु कुछ समय के बाद अनुपयोगी हो जाता है, या अनुपयोगी पशु दोबारा उपयोगी हो जाता है, तो उनके टैग में परिवर्तन किया जाएगा। हर टैग का एक नम्बर होगा।

वैटरनरी सर्जन, सी.एस.सी. की वैबसाईट को खोलकर ऐसे पशुओं की संख्या के डाटा को अपडेट करते रहेंगे। वीसी में विषय को लेकर सरकार की ओर से क्या प्रोत्साहन दिया जा रहा है, इस बारे मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन गौशालाओं में अनुपयोगी पशुओं की संख्या 33 प्रतिशत से अधिक है, उन्हें प्रोत्साहन देंगे। यह संख्या जितनी ज्यादा होगी, प्रोत्साहन राशि भी उतनी होगी।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की प्रोत्साहन राशि वितरित कर दी गई है, जहां अभी तक वितरित नहीं हुई है, वो भी कर दी जाएगी। नए वित्त वर्ष में करीब 50 हजार रूपये का प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंंत्री ने बताया कि गांवो में उपलब्ध गौचरांद को गौशालाएं 7 हजार रूपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष लीज़ पर ले सकेंगी।

संस्थाएं चाहें तो नई गौशालाएं भी बना सकती हैं। इस बारे शहरी क्षेत्र के लिए सरकार लीज़ की पॉलिसी बनाएगी, क्योंकि शहरों में जमीन कम होती है, जो आउट स्कर्ट पर ली जा सकती है। वीसी में उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने करनाल जिला की जानकारी देते हुए बताया कि जिला में 24 रजिस्टर्ड व 5 अनरजिस्टर्ड गौशालाएं हैं, जिनमें पशुओं की संख्या 18 हजार से ऊपर है।

उन्होंने बताया कि बीते 3 सालों में जिला में 6505 बेसहारा पशुओं को गौशालाओं में पहुंचाया गया है, मात्रा 2476 पशु बचे हैं, जिन्हें गौशालाओं में भिजवा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि करनाल शहर में 4 नंदीशाला व 1 गौधाम भी है।

बैठक में डीएमसी धीरज कुमार, पशुपालन विभाग के एसडीओ डॉ. रूपेन्द्र तथा विभिन्न गौशालाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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