कोरोना वायरस क्या वाक़ई जून-जुलाई में भारत में तबाही मचाने वाला है
May 8th, 2020 | Post by :- | 38 Views

गुरुवार को एम्स निदेशक के हवाले से देश के तमाम मीडिया चैनल और सोशल मीडिया में एक बयान चल रहा था – “जून-जुलाई में अपने चरम पर होगा कोरोना- डॉ. रणदीप गुलेरिया.”

शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कोरोना का पीक आने वाला है. जब उनसे इससे जुड़ा एक सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं एक्सपर्ट नहीं हूँ. लेकिन मुझे लगता है पीक और देर से आएगा. मगर ये पीक जब भी आए, जून में आये या जुलाई या अगस्त में आए हमें लॉकडाउन से ट्रांजिशन के लिए तैयार रहना चाहिए.”

शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा है कि अगर सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करें तो हो सकता है कि कोरोना का पीक आये ही ना.

लेकिन ये पीक क्या है- इसका मतलब कहीं नहीं समझाया जा रहा. उस पीक में रोज़ कितने मामले सामने आएंगे, इस पर भी कोई बात नहीं हो रही.

हर कोई इस बयान को अपने हिसाब से समझ रहा है. कोई कह रहा है अब लॉकडाउन आगे भी बढ़ाया जाएगा, अब तो दुकानें फिर से बंद करनी पड़ेंगी…वगैरह-वगैरह…

डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने क्या कहा?

इन तमाम सवालों के साथ बीबीसी ने एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया के पूरे वक्तव्य को दोबारा सुना और समझने की कोशिश की ताकि ये पता लगाया जा सके कि आख़िर इस बयान का आधार क्या है?

दरअसल रणदीप गुलेरिया से सवाल पूछा गया था – “क्या भारत में कोरोना का पीक आना बाकी है.”

रणदीप गुलेरिया का जवाब था, “अभी तो केस बढ़ रहे हैं. पीक तो आएगा ही. पीक कब आएगा, ये मॉडलिंग डेटा पर आधारित होता है. कई एक्सपर्ट ने इसकी डेटा मॉडलिंग की है. इंडियन एक्सपर्ट ने भी की है और विदेशी एक्सपर्ट ने भी की है. ज़्यादातर लोगों का मानना है कि जून-जुलाई में पीक आ सकता है. कुछ एक्सपर्ट ने इससे पहले भी पीक आने की बात कही है. कुछ एक्सपर्ट ने कहा है कि इसके आगे अगस्त तक भी पीक आ सकता है”

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