आइए जानते हैं बुद्ध पूर्णिमा और महात्मा बुद्ध की परिश्रम को लेकर की एक प्रेरक कहानी के बारे में।
May 7th, 2020 | Post by :- | 48 Views

बुद्ध पूर्णिमा-

आज वैशाख मास की पूर्णिमा है । इस पूर्णिमा को गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।इसलिए वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है। कहते है इसी दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। भारत में बुद्ध को विष्णुजी का नौवा अवतार मानते हैं।विश्वभर में बौध धर्म के करोड़ों अनुयायी और प्रचारक है।

कौन थे गौतम बुद्ध-

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में सिद्धार्थ गौतम के रूप में हुआ था ।वह एक ऐतिहासिक व्यक्ति थे, जो कि एक राजकुमार थे, जो आधुनिक भारत और नेपाल की सीमा से लगे एक छोटे से राज्य के रहने वाले थे। सिद्धार्थ ने एक सुंदर महिला से शादी की और उनका एक बेटा था।

जब सिद्धार्थ सत्ताईस वर्ष के हुए तब उन्होंने महल के बाहर जाने का फैसला किया। जब उन्होंने महल के बाहर जाकर वृद्धावस्था, बीमारी और मृत्यु के बारे में जाना तो उनका संसार से मन उठ गया । तब वह अपनी पत्नी, पुत्र और राज पाठ को छोड़कर आत्मज्ञान की तलाश में तपस्वी बन गए।

वह कई स्थानों पर भटकते रहें और अंततः पैंतीस वर्ष की आयु में वह बोधगया गए, जहाँ उन्होंने एक पेड़ के नीचे बैठकर इकतीस दिनों के एकांत साधना के बाद आत्म ज्ञान ,निर्वाण, स्थायित्व की स्थिति को प्राप्त किया। इस इस तरह वह महात्मा बुद्ध बन गए।

प्रेरक कहानी -व्यक्ति को परिश्रम करने के साथ धैर्य भी चाहिए रखना ।

एक बार महात्मा बुद्ध अपने अनुयायियों के साथ किसी गांव में उपदेश देने जा रहे थे। उस गांव सें पहले ही रास्ते मे उन्हें जगह-जगह बहुत सारे गड्ढे खुदे हुए दिखाई दिए।

उन खुदे हुए गड्ढों को देखकर महात्मा बुद्ध के एक शिष्य ने महात्मा बुद्ध से पूछा, आखिर इस तरह गढे का खुदे होने का मतलब क्या है?

महात्मा बुद्ध बोले,पानी की तलाश में किसी वयक्ति ने इतनें गड्ढे खो दिए हैं है। यदि वह धैर्यपूर्वक एक ही स्थान पर गड्ढा खोदता तो उसे पानी अवश्य मिल जाता। पर वह थोडी देर गड्ढा खोदता और पानी न मिलने पर दूसरा गड्ढा खोदना शुरू कर देता ।

महात्मा बुद्ध ने कहा कि व्यक्ति को परिश्रम करने के साथ धैर्य भी रखना चाहिए।

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