अध्यापक संघ द्वारा शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को ज्ञापन भेजा गया
May 7th, 2020 | Post by :- | 163 Views

अंबाला , बराड़ा ( गुरप्रीत मुल्तानी )

हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ (संबंद्ध सर्वकर्मचारी संघ हरियाणा एवं स्कूल टीचर्ज फैडरेशन आफ इंडिया) की राज्य कमेटी के निर्णय अनुसार आज 7 मई को जिला शिक्षा अधिकारी, अम्बाला के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को ज्ञापन भेजा गया। इस ज्ञापन को भेजने की कार्यवाही में स्वास्थ्य विभाग एंव हरियाणा सरकार के दिशा निर्देश का पूर्णतया पालन करते हुए जिला कार्यकारिणी के 6 सदस्यों ने ही जिला शिक्षा अधिकारी, अम्बाला के कार्यालय जाकर अधिकारी महोदय को ज्ञापन सौंपा।
जिला प्रधान बृजमोहन ने बताया कि कोविड-19 विश्वव्यापी महामारी एंव लंबे लाक डाउन के चलते हरियाणा के 70-80 हजार अध्यापक पिछले 45 दिनों से तन मन धन से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, परंतु खेद है कि सरकार व विभाग अध्यापकों की सहनशीलता एंव महामारी की आड़ का दुरुपयोग कर रहा है। बार-बार शिक्षा मंत्री महोदय व विभाग के उच्च अधिकारियों से आग्रह करने के बावजूद अध्यापकों को सुरक्षा संबंधी उपकरण जैसे कि पी.पी.ई. किट, मास्क, सैनिटाइजर, दस्ताने आदि उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं। जिससे अध्यापकों का अपना जीवन ही असुरक्षित हो गया है। अध्यापकों की एक ही समय में कई-कई प्रकार की डयूटियां लगा रखी हैं। अध्यापकों के जिम्मे वो काम भी लगा रखे हैं, जिनका उनसे कोई वास्ता नहीं है और वह तकनीकी रूप से भी सक्षम नहीं हैं।
जिला कोषाध्यक्ष सतनाम सिंह और जिला प्रेस सचिव लाभ सिंह ने कहा कि चाहे अनाज मंडी में अनाज खरीदने की ड्यूटी हो अथवा ऑनलाइन परिवार पहचान पत्र बनाने हों, किसी भी ड्यूटी के लिए सहयोगी व्यक्ति, सामग्री एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध नहीं है । अनेक अध्यापकों का कार्यस्थल एवं निवास स्थान अलग-अलग जिलों में है। ऐसे अनेक अध्यापक हैं जिनके निवास स्थान फतेहाबाद, हिसार, भिवानी ,चरखी दादरी, रोहतक और सोनीपत आदि में है और उनकी नौकरी गुरुग्राम, नूंह, पलवल, फरीदाबादऔर अंबाला में है। संगठन के आवेदन पर ऐसे आदेश भी जारी हो चुके हैं कि जिन अध्यापकों का निवास स्थान दूसरे जिलों में है, उनकी ड्यूटी ना लगाई जाए। फिर भी नूंह, फरीदाबाद, पलवल गुडगांव का प्रशासन ना केवल डयूटियां लगा रहा है बल्कि अनुचित दबाव भी बना रहा है। ऐसे दबाव में एक अध्यापक की मौत भी हो चुकी है। नूंह प्रशासन ने अनेक अध्यापकों पर एफ.आई.आर. दर्ज करवा दी है। इससे पहले यमुनानगर में एक अध्यापक अजय वालिया की सेवाएं ही समाप्त कर दी हैं। शायद अध्यापकों की ईमानदारी से सेवा करने के ये इनाम हैं।
जिला सचिव अशोक कुमार सैनी ने कहा कि संगठन आज के ज्ञापन के माध्यम से मांग करता है कि उपरोक्त सभी समस्याओं का उचित समाधान किया जाए। अध्यापक अजय वालिया सहित अन्य अध्यापकों से उत्पीड़न की कार्यवाही वापस ली जाए। आज के ज्ञापनों का दूसरा प्रमुख मुद्दा कोविड-19 की आड़ में अध्यापकों पर किए जा रहे हैं आर्थिक हमलों का विरोध भी है। जब अध्यापक स्वयं स्वेच्छा से सरकार व प्रशासन को आर्थिक सहयोग कर रहे हैं तो जबरन अतिरिक्त महंगाई भत्तों की आगामी 18 महीने तक की क़िस्तों को रोकना, एल.टी.सी.व अन्य कटौतियां करने का क्या औचित्य रह जाता है। भर्तियों पर रोक भी किसी भी दृष्टि से न्यायोचित नहीं है। संगठन का मानना है कि आगामी 18 महीने तक की महंगाई भत्ते की किस्त को रोकने का क्या औचित्य । सरकार कम से कम यह तो सुनिश्चित करें कि जो भी राशि एक बार रोकी जाएगी उसका भुगतान स्थिति सामान्य होने पर कर दिया जाएगा। यदि उपरोक्त मुद्दों पर सरकार ने समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया तो हरियाणा का कर्मचारी चुप नहीं बैठेगा। जिला सचिव अशोक कुमार सैनी ने 1987 पी.टी.आई. की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने, सर्वे में साहा खण्ड के अध्यापकों की ड्यूटी साहा में ही लगाने, पंजाबी प्राध्यापकों सहित सभी पदोन्नति सूचियाँ जारी करने, मिड डे मील वर्कर्स की माह अप्रैल और मई का वेतनमान देने का आदेश तुरंत जारी करने, बी.एल.ओज का मानदेय शीघ्र देने और गैस्ट अध्यापकों के देय एरियर के शीघ्र भुगतान का पत्र जारी करे, अन्यथा हम आगामी रणनीति बनाकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे जिसकी जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी। साहा खण्ड प्रधान ओमप्रकाश और वित्त सचिव साहा जसवंत सिंह भी शामिल थे।

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