होम क्वॉरेंटाइन रहते बाहर घूमना पड़ा महंगा,स्वास्थ्य विभाग ने सत्यापन कर कार्यावाही हेतु संबंधित थानों में दी रिपोर्ट।
May 6th, 2020 | Post by :- | 226 Views

2 साल के कारावास व जुर्माने का प्रावधान

बीकानेर,(मनीष)। कोरोना संक्रमण की आशंका के मद्देनजर बीकानेर लौटे प्रवासियों को होम क्वॉरेंटाइन किया जा रहा है लेकिन कुछ व्यक्ति होम क्वॉरेंटाइन के नियमों व आदेशों को दरकिनार कर घर से बाहर घूमते पाए गए हैं। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन लापरवाह लोगों पर कार्यवाही शुरू कर दी गई है। बुधवार को जिला प्रशासन से प्राप्त उल्लंघनकर्ताओं की सूची अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर जाकर सूचनाओं का सत्यापन किया और संबंधित पुलिस थाना में उल्लंघनकर्ता पर कार्यवाही के लिए रिपोर्ट भी कर दी है। जिला कलेक्टर कुमार पाल गौतम द्वारा समस्त उपखंड अधिकारियों को भी इस बाबत सख्त कार्यवाही करवाने के निर्देश जारी किए हैं।
सीएमएचओ डॉ बीएल मीणा ने बताया कि जिला कलेक्टर कुमारपाल गौतम के निर्देशानुसार आरसीएचओ डॉ रमेश गुप्ता व डीपीएम सुशील कुमार द्वारा स्वयं कई घरों-मोहल्लों में जाकर पूछताछ और अन्य गतिविधियों से सूचनाओं का सत्यापन किया गया। इसी प्रकार संबंधित बीसीएमओ व फील्ड स्टाफ द्वारा ऐसे व्यक्तियों की सूचनाएं जुटाई जा रही है । उन्होंने बताया कि होम क्वॉरेंटाइन किए गए लोगों द्वारा घर से बाहर निकलने संबंधी सूचनाएं जागरूक पड़ोसी, सिविल डिफेंस के लोग, सरकार द्वारा नामित व्यक्ति व स्वयंसेवी संस्थाओं के लोग दे रहे हैं। साथ ही उनके मोबाइल की लोकेशन पर टावर सिग्नल द्वारा, आरोग्य सेतु एप व राज कॉविड ऐप के माध्यम से भी पूरी नजर रखी जा रही है। महामारी के समय ऐसी लापरवाही न सिर्फ उनके स्वयं के लिए बल्कि समाज के लिए भी खतरनाक हो सकती है। इन पर एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1957 के तहत प्रदत्त शक्तियों के अनुसार कार्यवाही प्रस्तावित की गई है। उल्लंघनकर्ता के विरुद्ध आईपीसी की धारा 188 के तहत जुर्माना अथवा 2 साल तक कारावास या दोनों दंड दिए जा सकते हैं।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुशील कुमार ने जानकारी दी कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा होम कारंटाइंड के नियमों का उल्लंघन करने वालों की सूचियां प्रदान की गई है। इन्हें संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्रेषित कर उनके क्षेत्र में सत्यापन व कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।

किन्हें करते हैं होम क्वॉरेंटाइन ?
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जिले से बाहर से आने वाले समस्त प्रवासियों को 14 दिन के लिए होम क्वॉरेंटाइन किया जा रहा है यदि उनमें फ्लु के लक्षण नहीं है। साथ ही जो व्यक्ति सरकार द्वारा बनाए गए क्वॉरेंटाइन सेंटर पर 14 दिन रहकर जांच में कोरोना नेगेटिव पाए गए हैं उन्हें भी होम क्वॉरेंटाइन किया जा रहा है। इस कार्यवाही में उनके हाथ पर अमिट स्याही से ठप्पा भी लगाया जाता है कि वे कितने तारीख तक घर में रहेंगे। आलोच्य अवधि में ना केवल उन्हें घर से बाहर निकलने की मनाही रहती है बल्कि उन्हें घर में भी सेल्फ आइसोलेशन के नियमों की पालना सुनिश्चित करनी होती है। ऐसे व्यक्ति द्वारा ₹50000 का मुचलका भी भरवाया जाता है कि वह इन सभी नियमों की पालना के लिए बाध्य है।

क्या कहता है एपिडेमिक डिजीज एक्ट ?
एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1957 द्वारा सरकार को किसी भी महामारी को रोकने के लिए बड़ी शक्तियां दी गई है। सरकार द्वारा किसी भी व्यक्ति की जांच करवाई जा सकती है। संक्रमण की आशंका होने पर किसी व्यक्ति को अलग-थलग किया जा सकता है और संक्रमण फैलाने की आशंका में किसी व्यक्ति को हिरासत में भी लेने की शक्तियां इस एक्ट में प्राप्त है। आमजन को कोरोना वारियर्स का सहयोग करना चाहिए। महामारी को रोकने के लिए सरकार द्वारा जारी आदेशों की सदभावना पूर्वक पालना करवाने के दौरान किसी भी अधिकारी या निरीक्षक के विरुद्ध वाद या विधिक कार्यवाही भी नहीं की जा सकती।

 

 

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