स्व रचित कविता : प्रणाम का परिणाम
May 6th, 2020 | Post by :- | 119 Views

चंडीगढ़ ( मनोज शर्मा)कविता का केंद्रीय भाव: प्रस्तुत कविता ‘प्रणाम का परिणाम’ डॉ. विनोद कुमार शर्मा द्वारा रचित है। इस कविता का केंद्रीय भाव यह है कि बड़ों के आगे झुकना बड़प्पन है। प्रत्येक व्यक्ति अपने बुजुर्गों से जीवन के उतार-चढ़ाव  के बारे में अनुभव प्राप्त करता है। बड़ों के आशीर्वाद मिलने से व्यक्ति के लिए जीवन की राह आसान हो जाती है। उनकी बातों को आत्मसात कर लेने पर ही विचारों में परिपक्वता आती है।

     कवि के कहने का भाव यह है कि बड़ों अर्थात बुजुर्गों का आदर करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उनकी सभी बातें कवच की भांति मनुष्य का बचाव करती हैं। उनकी सेवा को अपना सौभाग्य मानना चाहिए।

प्रणाम का परिणाम

बड़ों के आगे सीखो झुकना,
आदर देने से न कभी रुकना,
बड़े छोटे से करते जब स्नेह,
सही रास्ते चलते दूर होते भय,
बड़ों से मिलती हमेशा शिक्षा,
न लगे ठोकर न मांगे भिक्षा,
हर बात में इनकी होता दम,
खुशियां आती दूर होता गम,
प्यार ही है इसका  इनाम,
अनमोल है प्रणाम का परिणाम।

बड़ों के चेहरे पर जब आती खुशी,
नहीं होना पड़ता तब दुखी,
पास इनके गुणों का खजाना,
संग्रह कर मोती नहीं होगा पछताना,
बैठ इनके सानिध्य में घड़ी दो घड़ी,
सत्संग में मिलेगी सलाह की झड़ी,
चुकाना मुश्किल है इनका मोल,
मधुर लगते इनके मीठे बोल,
जीवन के पल- पल आएगा काम,
अनमोल है प्रणाम का परिणाम।

बिगड़े भी काम जाते हैं बन,
छाए हो चाहे काले घने घन,
बनोगे बड़ों की आंखों का तारा,
टिमटिमाओगे बनकर सितारा,
आपके दुखों को समझेंगे अपना,
दुआओं से आपको सलामत रखना,
खुद ग्रहण करने से पूर्व उनसे पूछो,
भूलकर भी उनसे कभी ना रूठो,
आदर दो चाहे सुबह हो या शाम,
अनमोल है प्रणाम का परिणाम।

बड़ों का आशीर्वाद है प्रसाद,
बात ना काटो आदर दो आगाध,
कवच बन जाती है इनकी आशिष,
कर्तव्य पथ पर चल झुकाकर शीश,
इनकी सेवा को मान सौभाग्य,
सम्मान न करने वाले हैं अभाग्य
व्यक्त करो उनका आभार,
भूलकर भी न  समझो लाचार,
जिंदगी में मिलेगा आराम,
अनमोल है प्रणाम का परिणाम।
डॉ. विनोद कुमार शर्मा, चंडीगढ़।

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